[28/10, 1:48 am] sanantha.50@gmail.com: एक अक्षर मा़ँ के नाम पर
एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु
281026
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माँ ममता का प्रतिबिम्ब।
माँ -पिता के प्रेम मिलन का परिणाम ।
जगत में मानव जन्म।
माँ के गर्भ में ही शिशु का आकार।
जन्म लेते ही प्रथम चुंबन माँ का।
प्रथम शब्द माँ के
मुख ध्वनि।
अतः भाषा बनी मातृभाषा।
माँ के स्तन पान
प्रथम आहार।
माँ के गोद प्रथम पलना।
माँ के साथ पकड़कर
प्रथम चलना।
माँ ममतामयी।
निस्वार्थ प्रेम दिखानेवाली।
त्याग की जीवित मूर्ति।
खुद भूखी,
खिलाती खाना।
नहलाती
वस्त्र पहनाती।
पल पल के विकास में
ध्यान रखती।
विविध कष्ट सहकर,
संतानों को सुखी रखने में तत्पर।
पन्ना जैसे देश की रक्षा के लिए,
अपने पुत्र की हत्या सहनेवाली।
कुंती जैसे निर्दयी माँ।
माँ अमूल्य सिक्का।
अक्षर अमर अक्षय है माँ का प्यार।।
[28/10, 2:00 am] sanantha.50@gmail.com: एक अक्षर माँ के नाम पर
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
28-10-2026
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माँ की ममता का प्रतिबिंब,
माँ-पिता के प्रेम-मिलन का परिणाम,
इस जगत में मानव का जन्म।
माँ के गर्भ में ही
शिशु का आकार बनता है।
जन्म लेते ही
माँ का प्रथम चुंबन मिलता है।
माँ के मुख से निकली ध्वनि
शिशु के कानों में पड़ती है,
इसीलिए तो उस भाषा को
मातृभाषा कहते हैं।
माँ का स्तनपान
शिशु का प्रथम आहार,
माँ की गोद
उसका प्रथम पालना।
माँ की उँगली पकड़कर
प्रथम कदम बढ़ाना,
माँ की ममता में पलना,
जीवन का प्रथम पाठ सीखना।
माँ ममतामयी,
निस्वार्थ प्रेम की प्रतिमूर्ति,
त्याग और तपस्या की
जीवंत मूर्ति।
खुद भूखी रहकर भी
संतान को भोजन खिलाती,
नहलाती, वस्त्र पहनाती,
पल-पल उसका ध्यान रखती।
विविध कष्ट सहकर भी
संतानों को सुखी रखने में
सदैव तत्पर रहती।
पन्ना धाय जैसी माँ,
देश की रक्षा के लिए
अपने पुत्र का बलिदान देकर भी
कर्तव्य-पथ से नहीं डिगती।
कुंती जैसी माँ,
जीवन की कठिनाइयों में भी
अपने पुत्रों को
धर्म-पथ पर चलना सिखाती।
माँ अनमोल रत्न है,
उसके प्रेम का कोई मोल नहीं।
माँ शब्द का एक-एक अक्षर
अमर है, अक्षय है।
माँ का प्यार
अनंत है, अविनाशी है!
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