: आज की चुनौती
हर एक को
हर पल एक चुनौती कब,क्या होगा,
पता नहीं।
नेपाल यात्रा गये,
बाढ की चुनौती।
अमेरिका जाने निकलें तो ईरान उग्रैन की चुनौती।
महँगाई की चुनौती
भ्रष्टाचार और रिश्वत की चुनौती।
इन सबके बीच
Daily challenge
रचना की है चुनौती।
सोच विचार परिवर्तन का समय।
अब विषय और चुनौती चार पाँच दिन से न तो
सोच-विचार न करने की चुनौती।
समय काटने की चुनौती।
कहते हैं मानव जन्म दुर्लभ।
यह दुर्लभ जन्म न होने में भला ही भला।
अन्य जीव जन्म में
न भविष्य की चिन्ता।
न पढ़ाई की चिंता।
न परीक्षा कीचिंता।
न नौकरी की चिंता
न शादी की चिंता।
न संतान की चिंता।
न संतान होने की चिंता।
राम भी रोया।
कृष्ण भी रोया।
हर मानव
रंक हो या राजा
चिंता ही चिंता।।
आज की चुनौती
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हर एक के जीवन में
हर पल एक चुनौती है।
कब, क्या हो जाएगा,
किसे पता है?
नेपाल की यात्रा पर जाएँ,
तो बाढ़ की चुनौती।
अमेरिका जाने निकलें,
तो ईरान-यूक्रेन युद्ध की चुनौती।
महँगाई की चुनौती,
भ्रष्टाचार और रिश्वत की चुनौती,
इन सबके बीच
हर दिन एक नई चुनौती।
प्रतिदिन नई रचना करना,
वह भी अपने आप में एक चुनौती।
सोच-विचार करना,
नए विषय खोजना,
समय के साथ बदलना—
यह भी एक चुनौती।
अब चार-पाँच दिनों से
न विषय सूझता है,
न विचार आते हैं,
न कुछ लिखने का मन होता है।
यह भी एक चुनौती है—
समय काटने की चुनौती!
कहते हैं,
मानव-जन्म दुर्लभ है।
कभी-कभी मन सोचता है—
यह दुर्लभ जन्म न मिला होता,
तो शायद चिंताएँ भी न होतीं!
अन्य जीवों के जीवन में
न भविष्य की चिंता,
न पढ़ाई की चिंता,
न परीक्षा की चिंता,
न नौकरी की चिंता,
न शादी की चिंता,
न संतान की चिंता,
न संतान होने की चिंता।
राम भी रोए,
कृष्ण भी रोए।
जब अवतारों के जीवन में भी
दुःख और संघर्ष आए,
तो सामान्य मानव की क्या बिसात!
रंक हो या राजा,
हर मानव के जीवन में
चिंता ही चिंता!
यही है आज की चुनौती—
चिंताओं के बीच जीना
और फिर भी जीवन से
हार न मानना।
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