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Saturday, January 10, 2026

विश्व हिंदी दिवस

 विश्व हिंदी दिवस।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

11-1-26.

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बहुत भाषी भारत देश में,

 ज्ञान की लहरें बढ़ते देश में,

ज्ञान के सुनामी विश्व को हिलाते देश में,

 हजारों जनप्रिय  आध्यात्मिक देश में 

संस्कृत, अवधि, व्रज, मैथिली   तमिल आदि 

 भक्ति लहरों के देश में 

 खड़ी बोली की सुनामी

 आकर हिंदी के रूप में बदली।।  

अहिंदी प्रांत के राजाराम मोहन राय, दयानंद सरस्वती, मोहनदास करमचंद गांधी ,

दक्षिण के स्वतंत्रता प्रेमी 

 नेताओं के अधिक कठोर 

 प्रयत्न कह के प्रचार में 

 संस्कृत की बेटी बनकर 

 उर्दू की बहन बनकर 

 आज महाविकट रूप धारण कर विश्व की तीसरी भाषा बनी।

 यद्यपि यह अंग्रेज़ी जीविकोपार्जन और ज्ञानोपार्जन की भाषा के रूप में लोक प्रिय है,

 फिर भी हिंदी के विकास 

 आत्मीय रूप में,

 विश्व की बड़ी तीसरी भाषा के रूप में 

 चमक रही है।

 रामचरित मानस की अवधि साहित्य,

 सूरसागर की व्रज भाषा

 कबीर की सधुक्कडी, खिचड़ी भाषा 

 सब बन गये हिंदी साहित्य।

भारतेंदु काल 10वीं शताब्दी  से पक्की नींव डाली गयी।

 जयशंकर प्रसाद, मैथिली शरण गुप्त, रामधारी सिंह दिनकर, हरिवंशराय बच्चन , गद्य में मुंशी प्रेमचंद, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय 

 महादेवी वर्मा,

 सुभद्र कुमारी चौहान 

 आदि सरस्वती पुत्र- पुत्रियों ने   समृद्ध बनाया।

126साल ही खड़ी बोली हिन्दी का इतिहास।

 आज आश्चर्यजनक 

 उत्तुंग चोटी पर पहुँचकर

 विश्व की भाषा तीसरी भाषा के रूप में चमक रही है।

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई 1918 में 

स्थापित  करमचंद गांधी जी की दूरदर्शिता 

हिंदी विरोधी शासकों के बावजूद पनप कर वटवृक्ष बन गई हैं।

 जिसकी छाया में 

  हजारों प्रचारक 

 तन मन से हिंदी की सेवा कर रहे हैं।

 जय भारत!जय हिन्दी! 

जय भारत की भाषाएँ।

जय हिन्दी के निस्वार्थ तमिलनाडु के प्रचारक।

 जिनके साथ नहीं 

 केंद्र सरकार।

 नहीं राज्य सरकार।

 जनता साथ हैं।

 कवि सम्राट कण्णदासन

 अपनी भारतीय भाषाओं के योगदान गीत में लिखा है

 हिंदी मोर नाचो नाचो।

 मातृभूमि एक दिन अपनाएगी।

 कवि वचन मिथ्या नहीं।

 आज प्रमाण है हिंदी का विराट विकास विश्व दर्शन।

 एस. अनंत कृष्णन सौहार्द सम्मान प्राप्त 

 हिंदी सेवक।





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