Thursday, September 21, 2017

तिरसठ नायनमार --- शिवभक्त

तमिलनाडु  तो
  प्रशिद्ध  हैं ,
भक्ति  के लिए.
 शिव भगवान की दैविक क्रीडाएं ,
 शिव भक्तों के  चमत्कारी
आत्म समर्पण.
श्री गणेश  जी   कर रहा  हूँ ,
तेरे चरण स्पर्श , श्री गणेश .
उन तिरसठ    नायन मार ,
अर्थात शिव भक्त   की जीवनियाँ .
निर्विघ्न   पूरा करने  चाहिए तेरा अनुग्रह.


१, सुन्दरमूर्ति नायनार.

     
   शिव -दास  , शिव और  तमिल के उत्तम सेवक.
   शिव से तर्क कर नाम पाए ,  वाणी कठोर सेवक.
  अपने जीवन काल  में  दिखाए  कई चमत्कार.
  नाम है  सुन्दरमूर्ति नायनार.
       सर्वेश्वर अनुग्रह   प्राप्त  करके ,
       सर्व संपन्न    देश  है  तिरुमुनैप्पाडि  I
       नृसिंह   मुनैयार नृप   के सुशासन   देश ,
         समुरुद्धि  में न कोई कमी.
नामी नगर के एक दिव्य-दम्पति ,
नगर में रहा करते थे .
नाम  थे  सदैयनार -इसैग्यानियार.

इन्के दिव्य पुत्र हुए  नाम्बियारूरार .
जिनके नाम सुन्दरर  भी  है.

नरसिंह  मुनैयार    नृप  एक दिन ,
इरैयानार  के   यहाँ  आ पहुंचे .
 एक विनती की , आप के  पुत्र को
आम पुत्र  बनाकर शहर को देना,
राजा के प्रिय निवेदन कैसे करते ठुकरा.
बिना कुछ बोले भेज दिया ,
प्रिय सुत को  प्यारे नृप के साथ.

   बालक  खेल रहा  था  राजमहल के
   आँगन में  अति आनंद से .
   बचपन  टिकेगा   कैसे?
   नाम्बियारूरार   बना जवान .
   अति सुन्दर युवक बन गया  विवाहोग्य.

    पुत्तूर   के   प्रसिद्ध    सदंगावी शिवाचारियर
   उनकी  इकलौती    पुत्री  से  शादी पक्की हुयी.
    विवाह के दिन, मंडप की व्यवस्था अति चमत्कार .
    अति सुंदर.    सुन्दर्नायिनार की शादी.
 
    ऐन  वक्त नृप नरसिम्ह नायनार आ पहुंचे.
     तभी हुई  वह  आघात घटना.
    पूर्व जन्म    एक  वर  से  भगवान शिव ,
    साधू सन्यासी के  वेश  में आ  गए.
   मुहूर्त के     दिन  ही  सुन्दर को अपने अधीन
   करने  का  उचित दिन तय किया.
    शादी   मंडप  के पास आये नृप .
     सब उठ नृप   की की वंदना.
      तभी सन्यासी शिव  के मुख से
      जलन  भरे    शब्द  निकले.
        विवाह का  प्रबंध तो  अति संतोष.
       पर  मेरा  अपना है  एक शिकायत.
       यह  सुन्दर तो एक  दास .
       उसके स्वामी  की अनुमति और आज्ञा बिन
        कैसे कर  सकता है  यह  विवाह.
           सुन्दर तो दास  है  मेरा.
            पूछ- ताछ करना  है ,
            उसके निजी जीवन  के   बारे    में.
             नगर के  प्रबंध एक क्षण अवाक खड़े रहे.
          फिर बोले, शादी होने दो ,
          बाद में बोलेंगे   बाकी बात.
          सन्यासी अति क्रोध से  बोले ,
          बात तो पक्की, प्रमाण भी मैं लाया हूँ साथ.
          कमर में रखे एक ताड़ के पत्ते ,
          ले  दिखाया  तो सुन्दरर  अवाक खड़े रहे.
           कहा- क्या है नयी कहानी?
           सन्यासी ने कहा , नहीं है यह  कहानी .
           सत्य बात है तेरे वसाज सब के सब मेरे दास.
          इतने  में ताड़ के पत्ते छीन ,
          टुकड़े टुकड़े   करके , यज्ञ कुंड  में
         डालकर  सुन्दरर  बोले अब कहाँ है प्रमाण.
         आवाज  में था  परिहास.
          संयासी आग बबूला होकर  बोले,
          देख !  इसका झूठा  व्यवहार.
           जो पत्ता दिया वह  है  नकली.
           मूल   मेरे  पास  है  देख! कह
           दूसरा पत्ता दिखाया  वह.
            नगर प्रबंधक लेकर पढ़ा तो
            सन्यासी की शिकायत सच  निकला.
               पंचायत  तो सन्यासी के  साथ
              जाने  का अपना न्याय  कह  सुनाया.
              विवश  हो , सुन्दरर  गया,
              राजमहल   के  सुविधा में सुन्दरर  को जाना
                 लगा  अति  मुश्किल.
             इतने  में पहुँचे,तिरुवेन्ने  नल्लूर.
             शिव का  प्रसिद्द शिव स्थल.
            सन्यासी तेज़ी से चला मंदिर  के  अन्दर.
             देखते -देखते ओझल हो गए!.
              सन्यासी! सुन्दर  ने पुकारा!
                इतने  में  देखा , ऋषभ   वाहन में
                उमामहेश्वर अमा के  साथ दर्शन दे  रहे थे.
                 हर्षोल्लास में  सुन्दर ने की प्रार्थना.
                 इस  घटना की सूक्ष्मता  जान  ली .
                 पुत्तूर दुल्हन चिंतित खडी  रही.
                 सुन्दरर  ने कहा, आगे मेरे  मन  में
                 और किसी को स्थान   नहीं.
                     ऋषभ  वाहन को नमस्कार  किया,
                     निकला  कैलाश  की और.
                  तिरु वेन्ने  नल्लूर से निकलकर,
                 चिदंबरम  स्थल पहुंचा.
                 वहां नटराज  का  नृत्य देखा. 
             
               वहाँ    से   तिरुवतिकै  की और निकले।
                  वीरटटनेश्वर   तिरुनावुक्कारासर नामक अन्य
                  शिव भक्त मंदिर की सेवा करते थे.
                  वे मंदिर छोड़  चित्तवट   नामक मठ में ठहरे।

                   रात के वक्त  भगवान शिव
                  एक  बूढ़े के रूप  में ,
                    मठ  में पधारे।
                    सुंदरर   के सर पर बूढ़े के  पैर पड़े.
                            सुन्दरर  ने  बूढ़े  से  कहा --

                             आपके चरण मेरे सर स्पर्श कर  रहा  है
                              ज़रा   हटना,  वृद्ध ने  कहा--
                               मैं  बूढा हूँ; तुम्हीं  हटकर लेटना.
                               सुन्दरर  ने   मान  लिया;
मीठी नींद सोते वक्त ,
फिर चरण सर पर लगा.
गुस्सेमें   भक्त  ने चिल्लाकर पुछा --
कौन  है  तू?  
  भगवान  शिव ने  हंसकर पूछा--
क्या तू नहीं जानता है  मैं  कौन?

तू तो भक्त  है  मेरा.
भक्त  को  अपनी गलतियाँ  मालूम हुईं.   
सुबह के  होते  ही ,
केटिल  नदी  में  स्नान  कर,
विराटटेश्वर  की  प्रार्थना करके ,
तिरुमान कुली की भी वंदना   करके,
 तिरुनेलवेली  की ओर  गए.
भक्त ने कीर्तन  गाया,
तभी उसके कानों पर एक आकाशवाणी पडी--
आरूर आवो.
आरूर जाकर वाहान विराजमान
शिव  की
प्रार्थना कर
शीर्काली तीर्थस्थान  गया.
वह  तो ज्ञान्सम्बंध नामक
शिव भक्त  का जन्मस्थान.
वह शहर की परिक्रमा  करके
आगे बढ़ा  तो
विश्वनाथ उमादेवी   सहित
सामने दर्शन  दिए .
शिव भक्त सुन्दरार  को
तम्बिरान का  सखा  कहकर
उनको प्यार से बुलाने लगे.

पिछले  जन्म  में   कैलाश    में  रहते  समय

कमलिनी से  सुन्दरर ने प्यार   किया.

वही कमलिनी आज  परवैयार नामक
सुन्दरी  के  रूप    में    आरूर  में
पुनः  जन्म  लिया.

सुन्दरर  की नज़र    उस  पर  पडी.
पूर्व जन्म की विधि
दोनों में  प्रेम    बंधन   गया.

देव दर्शन कर परवैयार दुसरे मार्ग पर
चली     तो   सुन्दरार  वाल्मीकिनाथ की
प्रार्थना  कर  आगे  बढ़ा  तो
परवैयार  की   तलाश  की.
विरह  ताप  से  दोनों  भक्त .
आधी रात को
शिव भक्तों के  स्वप्न में
शिव   ने   कहा --  सुन्दरर  है  मेरा  भक्त.
परवैयार और  सुन्दरार दोनों  करते  हैं प्यार .
उन  दोनों  की  शादी कराना.
   शिव भक्तों ने   दोनों    की शादी  कराई.
 वैवाहिक    दाम्पत्य जीवन शुरू किया  तो
सुन्दरर    दरिद्रता से  पीड़ित .
 कुंडैयूर    के   शिव  भक्त बूढा
शिव की प्रार्थना कर
जरा सोने    लगे  तो उनके स्वप्न  में
शिव  प्रकट  होकर  कहा
सुन्दरार    को  हमने   धान दिया है
जल्दी उन्हें  सुन्दरार के घर  पहुंचाना.
बूढा  जागा  तो  चकित रह  गया.
गली भर धान  ही  धान.
बूढ़े से धान उठाना मुश्किल लगा  तो
सुन्दरार    को  सन्देश  भेजा.
सुन्दरार    आया  तो उसने  शिव से  ही
नौकर भेजने   की  प्रार्थना  की .
शिव  ने     अपने  भूतगण  भेजे.
शिव  के      दिए   दान  को
दम्पतियों     ने    सब   को  बाँटा.
कोत्पुलियार  नामक धनी   ने   अपनी
दोनों  पुत्रियों को     सुन्दर  से विवाह  कराने  तैयार .
तब  शिव      के   अधीन  सुन्दरर ने  कहा-
आपकी  पुत्रियाँ आपको जैसी हैं ,
वैसी  ही    मेरी.
फाल्गुन     महीने   का उत्सव ,
परवैयर ने    देखा   ,
घर में  एक कौड़ी भी नहीं,
अपने  पतिदेव  सुन्दर    कहा-
सोने  के    सिक्के  हो  तो
उदारता से   त्यौहार  मना  सकते  हैं.
सुन्दरर      कहा --मेरे  परिचित भी शिव,
मेरी दशा    के  ज्ञाता  भी वही  है,
माँगें  तो  न मना  करेगा  वह.
यों  ही सोचकर  मंदिर    की  ओर  गया.
एक नया  यशोगान   गाया.
थका मांदा    वह ,एक  ईंट को
सिरहानी      बना    मठ  में  ही  सो  गया.
उठा  तो      देखा,
ईंट बदला हुआ  था
सोने  की    ईंट.
ईश्वर ने भक्त को  दिया
यह  स्वर्ण   का   पदक.
तिरुमुतु कुन्रम ,दूसरा शिव स्थल,
शिव के कीर्तन गा,सुन्दरर के  अद्भुत  वक्त ,
ईश्वर  ने बारह हज़ार स्वर्ण मुद्राएँ  दीं.
 फिर  भी   भक्त  का  अहंकार,
कहा, स्वर्ण मुद्राएँ  देने मुझमें  बल नहीं  है,
आरूर   में   ही देंगे तो
दास करेगा स्वीकार.
 शिव को दी उसने आदेश.
शिव ने कहा --  मुकता  नदी में
स्वर्ण मुद्राओं को बहा दो,
आरूर मंदिर के तालाब  से
निकाल लो  ये  मुद्राएँ.
 नगर -नगर  मंदिर की  तलाश में
घूमने वाले  भक्त को
जब-जब भूख  लगेगा,
तब-तब  दास  का वेश  धारण  कर ,
भोजन खिलाएगा.
शिव स्थल  घूम -घूम ,
ओटरीयूर  आये  सुन्दरर.

वहां एक  शिव भक्त  था ,
संगिली  नाम के .
 सुचरित्र  बूढा
ज्ञायिटरु  बूढा  नाम से नामी .
बूढ़े  की एक बेटी
लता सी थी ,
नाम  था  अन्जुकम .
कोंपल  सी  थी.
सुन्दरर   ने  शिव   से
 अन्जुकम  से अपने प्रेम ,
 प्रकट  किया .
अन्जुकम की मांग  की.

शिव ने  अपने भक्त   की
इच्छा पूर्ती  के    लिए ,
संगिली  के स्वप्न   में ,
शादी  की बातें  कीं .
संगिली को  भी खुशआ .
पर  उनके  मन  में   दुविधा    हुईं .
सुन्दरर   तो  विवाहित गृहस्त .
अपनी पत्नी की  याद  करके ,
चला जाएगा  तो ....
लम्बी सांस खींची  तो
तब   शिव   ने  इसका प्रमाण  दिया .

    अच्छी बात सोचकर ,
मन्दिर   में   आज्ञा लेने  का निश्चय किया .
सुन्दरर   को  एक उपाय  सूझा .
शिव !मैं  गर्भ गृह    में
सत्य प्रमाण   दूंगा.

Friday, September 8, 2017

युग की परिपाठी


दक्षिण  भारत  हिंदी प्रचार  
राष्ट्रीय  उन्नति एक ओर, 
त्याग मय प्रचारक एक ओर. 
जग में हमेशा स्वार्थ 
निस्वार्थ का संग्राम. 
आज केवल तमिलनाडु  के हिंदी
 प्रचारक. स्वेच्छा ये  पढने वाले  हिंदी प्रेमियों को
प्रमाण पत्र का लोभ दिखाकर 

दस साल में ही प्रवीण. 
यह तो आंकडे दिखाने की तरीका. 
हिंदी के प्रति रुचि कैसे? 
कारण समाज के संचार साधन 
उसी को नायक बनाता  है, 
जो बदमाश, खूनी, बलात्कारी, 
पुलिस के मारनेवला,  लडकी वश सुधरनेवाला, 
मैं सोचा यह कलियुग  की बात. 
पर छानबीन  कर देखा तो 
बदमाश ही लुटेरा ही  वालमीकी बन 
रामायण  की   ृृजन की. 
तुलसी स्त्रीलोलुप 
रामचरितमानस  की रचना की. 
वेश्यागमन ही अपने  जीवन समझ चलनेवाला
अरुणगिरीनाथ  ने तिरुप्पुकळ की रचना की. 
क्रूर अशोक अशोक सम्राट महान बना. 
 विचित्र लगता है मुझे ईश्वर की लीला. 


Friday, September 1, 2017

கா லை வணக்கம்.
सुप्रभात.
मनुष्य को अपने को अति शक्तिशाली सोचना गलत है.
बिना भगवान की कृपा  से कुछ भी कोई भी
साध्य वहीं  है. प्रयत्न ये न होगा.
बार ही पडेगा.
करुणानिधि  के अत्यंत प्रयत्न,
उनके स्वयंसेवक  के प्रयत्न
सब कुछ होने के बाद भी
जयललिता की जीत. उनके  पैरों पर पडे.
फिर शशिकला  के पैरोंपर.
दिनकर का प्रयत्न.
पन्नीर शेल्वम का पतन.
खान वंश का गांधी वंश बनना.
सीता की जंगल में जाना.
प्रबल सन्यासी पर कलंक,
ऐसे सब को नचानेवाले भगवान की कृपा
और रक्षा पाने प्रार्थना  करेंगे.
 अल्ला ईसा, शिव विष्णु शक्ति
को पूर्ण रूप में समझकर, जानकर,
स्पष्टता प्राप्तकर्ता मनुष्यता, सत्य, ईमानदारी के मार्ग पर
कर्तव्यनिष्ठ होकर जो मनुष्य चलता  है, उसके आत्म संतोष, अात्म आनंद ,आत्म शांति,  सब मिलते हैं.

மனி தன் தன் னை  மி கவு ம் ஆற்றல
மி க்கவன் என்று  நி னை ப் ப து  தவறு.
இறைவ னி ன்
அரு ளி ன் றி  எதுவும்
சா தி க்க மு டி யா து .
முயற்சியா ல் மு டி யா து
தோல்வி யே.
கரு ணா நி தி  அவர்கள் மு யன் று ம்
ஆழ் மன தொண்டர்கள் முயன்று ம்
அம்மா  வெ ற்றி.
கா லி ல்  வி ழு த்தர்கள்
சி ன்னம் மா   காலி ல்.
சின்னம்மா  சிறை யி ல்.
தி னகரன்  மு யற்சி
பன் னீ ர் வீ ழ்ச் சி.
பி ரபல சா மி யா ர்  களங்கம்
அனி தா  தற்கொலை
கா ன் காந்தி  ஆனது
சீ தை  கா னகம்
என எல் லோ ரை யு ம்
ஆட்டு  வி க்கு ம்  ஆண்டவன்
 அரு ள் பெற  வணங்கு வோம்.
அல்லா  என்றா ல்
ஏசு  என்றா ல்
சி வன் வி ஷ் ணு
சக்தி  என்றா ல் மு ழு மை யா க
அறி ந்து  தெரி ந் து    பு ரி ந்து
தெ ளி ந்து  மனி த நே யத் து டன்
சத் தி ய வழி யி ல் கடமை ஆற்றும்
மனி தர் ளு க்கு  மன நி றை வு,
மன மகிழ்ச்சி  மன அமை தி  நி ச்சயம்.

Monday, August 28, 2017

నారీ సత్తాత్మక్ - नारी सत्तात्मक

नर-नारी की बातें , 
प्रेम -इश्क -मुहब्बत की बातें 
कविता के मूल समझ 
रचना करना ही सही समझना 
कहाँ तक सार्थक है पता नहीं.
नारी का कठपुतली समझ
उसके अपहरण में ही वीरता,
बाल विवाह , सति प्रथा.
जवाहर व्रत , कितने अत्याचार .
सब केवल एक मान -मर्यादा के लिए .
पतिव्रता के सम्मान के लिए ,
नारी को दुर्बल बना रखे थे पूर्वज.
पढना मना, हँसना मन , खिड़की से झाँकना मन .
मुग़ल आये तो पर्दा प्रथा आयी ,
साथ ही तलाक का मन माना ;
बहुविवाह न केवल मुगलों में ,
हिन्दुओं में भी नहीं मना.
तमिल की एक कहावत हैं,
तोते से सुन्दर पत्नी के रहते ,
बंदरिया -सी एक रखैल रखना
बड़े-प्रमुख लोगों के लिए तो गौरव की बात.
अब ज़माना बदल रहा हैं ,
पुरुष कमज़ोर हो रहा है,
केवल पढाई लिखाई में ही नहीं,
कमाई में , और काम की शक्ति में.
युवा पीढी संयम भूल ,
अंग्रेज़ी सभ्यता के पीछे पढ़ ,
कथानक के नायक बनता बदमाश,
नायिका बनती पढी लिखी होशियार .
पर करती प्रेम उस नायक से जो खलनायक
बाद में बनता साद-नायक.
पुरुष को सतानेवाली नारियां,
तलाक के मुकद्दमे बढ़ रहे हैं.
ईश्वरीय दृष्टी में नारी कोमल,
पर अति चतुर.
आगे नारी सत्तात्मक राज्य ,
पितृ सत्तात्मक ख़तम.

Friday, August 25, 2017

हिंदी प्रचारक रीढ़ की हड्डी

ईश्वर करुण जी को जनसंपर्क अधिकारी का  पद  मिला  है. बधाइयां.दक्षिण हिंदी प्रचार सभा की रीढ़ की हड्डी प्राथमिक से प्रवीण  की परीक्षाएँ  न  उच्च शिक्षा और शोध संस्थान .


 पर उनके बयान में केवल उच्च परिक्षा और शोध संस्थान  का ही उल्लेख हैं ,
जिसमे अधिकांश छात्र तमिलनाडु के नहीं.
दूसरी बात है प्राथमिक से प्रवीण तक  कठोर मेहनत करके छात्रों की संख्या और सभा के नाम बढाने वाले सच्चे जनसंपर्क  की परीक्षाएं प्राथमिक से प्रवीण तक का  उल्लेख नहीं है .

आगे से इस पर  भी ध्यान देना है और प्रचारकों की सहूलियतें  और स्थायी प्रचारक की नियुक्ति पर भी  ध्यान देना चाहिए.
शोध संस्थान   में खर्च और छात्र संख्या और प्रचारोकों द्वारा मिलनेवाले नाम और आय पर  भी ध्यान देना है.
उच्च संस्थान का उद्देश्य हिन्दी प्रचार नहीं है. और उसमें नौकरी भी तमिलनाडु के हिंदी विद्वानों को नहीं मिल रही है. 

Tuesday, August 22, 2017

सत्य की चमक

क्या लिखूं ?
ईश्वर से प्रेरणा  न मिली ,
ईश्वर  से  संकेत न मिला
ईश्वर से ज्ञान  न मिला  तो
लिखूं  क्या?
हर बात के मूल में
आदी मूल है तो
यह नर तन का मैं
क्या लिखूं?
कहा  किसी ने करोड़  पति ,
पर  वहां एक बच्चा  पागल,
एक बड़े डाक्टर उनके बच्चे लंगड़ा
क्या लिखूं मैं
बगैर  उसकी प्रेरणा के
वज़ह हैं अनेक
संसार के सुख -दुःख का ,
यश -अपयश  का
हम हैं परेशान में
सत्य -असत्य के   मनुष्य जीवन  में ,
नश्वर जगत , चंचल मन , चंचल विचार
न जाने क्या बनता  है, बिगड़ता है
पर  वास्ताविलता के पहचान में
आरोप -प्रत्यारोप में
गलत्फह मियाँ  ही  ज्यादा .
भिखारी भी दुखी , बड़े पदाधिकारी भी दुखी
न चैन  मन , न खामोशी मन ,
दिल है तो कर सकते  हैं ,
दिल में बल है सुविचार .
सद्विचार , सत्कर्म ,सत्संग
पनपते  कहाँ ?
राजनीति में  सोचा  नहीं .
आध्यात्मिक  परिवेश में
वह  भी नहीं ,
शिक्षित समुदाय में
वह भी नहीं ,
कहीं भी नहीं तो
ईश्वर  सत्य को ऐसे बनाया ,
वह बीच , उसके इर्द गिर्द
घू मते हैं , भ्रष्टाचार ,मोह म मद , माया, ममता
लाल पन्नों के रूप में ,
बाह्याडम्बर के रूप में ,
निथ्यादाम्बर के रूप में ,
तस्करी के  रूप  में ,
फिर भी सत्य की चमक
चमकते सत्य  महिमा मानते हैं सब .
यही ईश्वरीय लीला -क्रीडाएं .

Thursday, August 17, 2017

हिंदी प्रचारक

अहिन्दी क्षेत्र खासकर 
तमिलनाडु के प्रचारक 
उनको प्रोत्साहित करने ,
युवकों को हिंदी प्रचार में लागने चाहिए 
नयी शक्ति . 
वर्ष है यह सभा के शदाब्दी वर्ष
कुछ करना है हिंदी प्रेमियों को
न वहां राज्य सरकार से प्रोत्साहन ,
न केंद्र सरकार से ,
खुद अपने परिश्रम और आमदनी से कर रहे हैं प्रचार.
मुफ्त में कुछ लोग , पैसे लेकर कुछ लोग
अन्यान्य कामों के बीच हिन्दी के प्रचार में ही लग जाते,
न पूर्ण कालीन हिदी के सहारे जीने वाले प्रचारक,
न यहाँ हिंदी में जीविकोपार्जन का मार्ग
फिर भी लाखों की संख्या में हिंदी के चाहक
कम से कम करें प्रशंसा के प्रोत्साहन.
अहिन्दी लेखकों को भी दें प्रोत्साहन.