Wednesday, November 22, 2017

जागो, जगाओ .


मनुष्य शक्ति मिल जाती तो
देवों को भी कर देती टुकड़ा.
शिव के भक्त--
पर उनके अपने दल अलग .
विष्णु के भक्त -
उनके राम दल ,
कृष्ण दल.
ईश्वर के नाम
दल-दल में
झगड़ा.
अंधविश्वासों का बाह्याडम्बर ,
स्वर्ण-चाँदी-रूपये सब तहखाने में.
सुन्दर देव -देवी की मूर्तियाँ
समुद्र में विसर्जन.
न देश-समाज-गरीबों की चिंता.
राजनीतिज्ञ कब्र ,स्मारक , मूर्तियाँ ,तोरण-द्वार में
लाखों करोड़ों का खर्च.
सरकारी दफ्तर-धूल-दूषरित.
आम जनता की सुविधा कम .
भ्रष्टाचार-रिश्वत के रकम अधिक.
युवक-युवतियां ज़रा सोचो -जागो
अपने प्रतिनिधि चुनने में
दल के बंधन से दूर रह.
नेता का अन्धानुकर मत कर.
ऐसे नेता चुन ,मुख सामान.
जो चबाता हैं ,
उससे सभी अंगों को बल देता हैं.
तटस्थ नेता चाहिए,
जो जीतने के बाद
केवल देश की ही चिंता करता हो .
जागो,जगाओ .
देश ही प्रधान.
याद रखो जय जवान, जय जवान .

Sunday, November 19, 2017

हिंदी

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी जगत 
और राष्ट्र जगत .
हिंदी एक सेतु .
किसने बाँधा ,
पता नहीं ,

अपभ्रंश , मैथिली , अवधि , व्रज ,
भोजपुरी , मारवाड़ी , सब भाषाएँ
हड़पकर खडीबोली हिंदी ,

कैसे पनपी?
किसने विकसित  किया?
हिन्दीवालों की देन--नहीं
वे अन्यों की हिंदी को
ज़रा दूसरी या तीसरी श्रेणी ही देते.
वज़ह क्या ? कारण क्या ?पता नहीं .
राजा राम मोहन राय , दयानंद सरस्वती ,
आचार्य विनोबा . मोहनदास करम चंद जी ,

(गांधी कहने पर सब को खान परिवार की ही याद आती ).
हिंदी या हिन्दुस्तानी ?
गांधीजी का समर्थन हिन्दुस्तानी से था .

संस्कृत मिले या उर्दू मिलें

चित्र  पट दुनिया तो अधिक


शुक्रिया को , किस्मत को ,इश्क मुहब्बत को

शोर ,आवाज़ को जोर दिया.

क्रोध को दबाया, रूठ रूठ को बढ़ाया.
जो भी हो खडीबोली बाजारू हिंदी
आज विश्व मित्र को जोड़ रही है.
अतः हम मिल रहे हैं .
संभाषण करते हैं .
वार्तालाप या संवाद?
सब में हैं हिंदी यार बोलो ,सखा बोलो
दोस्त बोलो , मित्र बोलो ,
सब में चमकती हिन्दी.

Sunday, November 12, 2017

कलियुग की आजादी

संगम के मित्रों को प्रातः कालीन प्रणाम.
कलियुग की बातें निराली ,
आजादी प्राप्त युग ,
आ साथी कहें तो कर्ण सा कृतज्ञता होना है ,
पर
दल बदल कर शासन करने तैयार .
बड़े भाई शासित दल में ,
छोटे भाई विपक्ष दल में ,
बुआ ,मामा , चाचा , भतीजा या
कोई विश्वस्त साथी बड़े ओहदे पर .
आजादी मिल गई तो भ्रष्टाचार के ढंग
क़ानून से बचने दिन ब दिन बढ़ रहे हैं.
एक ही दूकान, विभिन्न रसीद बुक विभिन्न नामों में ,
सलाह देने तैयार क़ानून की आँखों में धुल झोंकने ,
वकील, आडिटर , अफसर , उनको चाहिए
काले धन , साथी वकील न्यायाधीश ,
साथी मित्र या नाता रिश्ता उच्च पद पर
आजादी से बचने बेनामी के नाम पर
बड़े -बड़े होटल कारखाने ,
गहराई से सोचा तो राजतंत्र ही
लोकतंत्र के आवरण में ,
मरने -मारने -मजदूरी सेना ,
आज कल तो एक ऐसी सेना
आत्महत्या की सेना.
लव जिहात की सेना प्यार के चंगुल में फंसाकर
सम्पत्ति हड़पना, धर्म -परिवर्तन , हत्यायें ,व्यभिचार .
सोचो , आजादी सब को मिल गई क्या ?
आजादी उनको मिल गयी ,
जो सरकारी बैंक से कर्जा लेकर
न चुकाता हो ;
आजादी उन नेताओं को मिल गयी
जो फोन से बोलकर ही पैसे बैंक से मिलता हो ,
आजादी उनको मिलगई जो कालेधनी हो.
आजादी उनको मिलगई , जो आश्रम चलाकर
करोड़ों की संपत्ति जोड़ता हो,
नए नए मंदिर काले धन छिपाने
नए नए आश्रम काले धन बटोरने ,
आजादी तो मिल गयी धनियों को मनमाना करने.
धन जोड़ो बलात्कार करो ,
धन जोड़ो मन मनमाना कमाओ ,
धन जोड़ो , पद जोड़ो , मजदूरी आत्महत्या , धन लोलुप
तुझको बचानी भीड़ , इकठ्ठा करके
बचाने तैयार.
वकील ,न्यायाधीश कानून के खोखले से
बचाने मुकद्दमा को १८ -बीस साल तक स्थगित रखने तैयार.
हाँ , आजादी उनको मिलगई ,
जो मन माना लूटता हो.
ईमानदारियों को बचने -बचाने तो कोई नहीं ,
भ्रष्टाचारियों को बचाने राजनैतिक शासक, विपक्षी , प्रसिद्द चित्रपट अभिनेता आदियों की बड़ी सेना तैयार .
मिलगई आजादी उनकी , जिनके पास
लाखों करोड़ों का काला धन हो , भ्रष्टाचारी में सर मौर हो.
यही नाटक देख रहे हैं आसाराम , राम -रहीम . ,
राजीव के हत्यारे, दिनाकरण के आय कर खोज ,
और अन्य राजनैतिक भ्रष्टाचार जैसे कोयले , बोफर्स , २जी , ३जी में .
जय लोकतंत्र, जय ऐसे नेता ,
वोट देने तत्पर तैयार
भारतीय मतदाता. आदि काल में राक्षसों के शासन देव भी कैद .
कलियुग में भी वैसा; पर कलियुग अच्छा, जरा डरते डरते चलते हैं.

Wednesday, November 8, 2017

आत्म मंथन

मनुष्य समाज,
घर परिवार

व्यक्ति   को

मानसिक संतुष्ट के लिए

सोने के पहले

बहुत सोचना है,


किस के बारे में.

सबेरे से ऱात तक

हमारे कर्मों में कितनी सफलता मिली,

     कितनी असफलता मिली.

कितने हम से सुखी हुए ,

कितने दुखी हुए,

कितने भले किये

कितने  बुरे.

हमारे कर्म अपने को

कितना आनंदप्रद रहा,

कितने कर्म आम सभा में

 कहने योग्य रहे,

कितने खुद को लज्जित किये?

यही  आत्म मंथन

मनुष्य को ईश्वर तुल्य बनाएगा.

मनुष्य को सुधारेगा.

आगे बनाएगा.

आत्मचिंतन मंथन

संतोषप्रद होंगे.

Saturday, November 4, 2017

सोचो समझो सनातन धर्म का उद्धार करो



सोचो समझो,
सनातन धर्म का उद्धार करो

हमारे मन की गहराई में ,
भक्ति हैं असली ,तो
गंभीर विचार करना ही है
आत्म मंथन.
प्यार की बातें , खूब सूरत लडकी
विश्वामित्र की तपस्या भंग .
बड़े -बड़े राजा महाराजा के चरित्र व् राज्य पतन .
फिर भी बाह्याडम्बर से सनातनधर्मवासी
कर्म फल ,भाग्य-फल , पापों का दंड कह
मनुष्यता के दान धर्म छोड़
मनुष्यों में उच्च-नीच भेद भाव उत्पन्न कर
हीरे के मुकुट , सोने के कवच से
देवी-देवता- और ढोंगियों को अलंकृत कर
उत्सव के नाम ,भक्ति के नाम ,
समाज-दींन -दुखियों की सेवा भूल
ईश्वर के विसर्जन के नाम
गरीबों को भी नहीं , समाज को भी नहीं ,
ईश्वर और धर्म संस्थापनों को ही नहीं ,
करते तन -मन धन का व्यर्थ प्रयोग .
तेरसा आयी , ईसाई आये , सेवा में लगे ,
धर्म परिवर्तन आसान से होने लगे .
दलितों को कनवर्टेड ईसाई बनाए,
अपम्मानित मनुष्य जागने लगे ,
ऐसे जनकल्याण के कार्य में लग
परिवर्तित धर्मियों के मानसिक परिवर्तन लाना
आत्म-मंथन के सिवा और कुछ नहीं.
आत्मा कहती है बिना अंग्रेज़ी के
जागरण असंभव .
सामाजिक क्रान्ति असंभव.
दलितों को आज भी इतना अपमान .
आरक्षण की नीति से उच्चवर्ग और देशोन्नति,
बुद्धीमानों और होशियारों का अपपान .
न नौकरी, न उन्नति. फिर भी
हिन्दुओं में इंसानियत की कमी ही लगी.
गरीबों को दलितों को उचित शिक्षा दो ,
विदुर के जैसे बुद्धिजीवियों को
हटाकर अछूत कह दूर मत करो .
स्वरचित अनंत कृष्णन द्वारा . आत्म चिंतन के लिए

Saturday, October 28, 2017

खिले निचार खुले - भारतीय संत संस्थान --3

संत श्री रमणर.

  कलंकित मन को
  सही दशा में
 ले आने  कुछ उपाय हैं.
 वैसे मन को
तुझमें  से  निकालकर
  फेंक देना चाहिए.
उस के मूल की खोज करनी चाहिए.
अहंकार  को मन से मिटाना  चाहिए.
   सब के पार  की परमेश्वर  शक्ति
   जब तुममें   बन जाता है,
  तभी तेरा मन तेरे वश में आएगा.
 वैराग्य का तात्पर्य  है,
 मन में जो भी विचार आते हैं,
 उनको उत्पत्ति के   समय  में  ही
 मिटा देना  चाहिए.

श्वास   एक  घोड़े के समान   है.
मन उसपर  सवारी करके
नियंत्रण  करने  से  सवारी करनेवाले भी
नियंत्रित होते  हैं.
सांस नियंत्रण  ही प्राणायाम  है.
 साँस  नियंत्रण और मंत्रोच्चारण
द्वारा  ही मन का  नियंत्रण  कर सकते  हैं.

मन और साँस  जुड़ना  ही   ध्यान   है.

दोनों जितना गहरा  होता  है,
उतना ही  मनुष्य सहजता प्राप्त करता  है.
मन   का  नियंत्रण  ही ध्यान  है. मौन रहने  का  मतलब है ,
अपने  बारे में आप  ही सवाल करके जवाब भी पाना.
तब   तुम अपने को पूर्ण रूप  से   समझ  सकते  हो.

मैं   कौन  हूँ ?   इस  विचार  में   मन को  लगाने  पर ,

आँखें  खुलेंगी   कि   मन   भी  मैं  नहीं,
मनके विचार   भी  मेरे   नहीं,
ये  विचार   ही   आत्मानुभव    होगा.

तुम  सच्चे स्वरुप   को  जानते  हो  तो 
ह्रदय  कमल  में  सच्चे  सूर्य प्रकाश जैसे
अपने  आप   सचाई  की  रोशनी  प्रकट होगी.
 पीडाएं मिटेंगी और  मन  निर्मल होगा.
सच्चा  आनंद  उमड़ेगा.
 सुख  ही  आत्म स्वरुप  होगा.
 महर्षी रमण , तिरुवन्नामलाई .तमिलनाडु


Friday, October 27, 2017

खिले विचार खुले --भारतीय संत चिंतन --2


महावीर

हम  ज़िंदा  रहते  समय
जो सद्कर्म करते हैं ,
वे ही  हमें  अमर  कीर्ति की ओर
ले जायेंगे .
जब  जब  हम बुजुर्गों  को  ,
बच्चों  को , गूँगे  बहरों  को ,
विदेशियों को , गरीबों को देखते  हैं ,
उनको करुणा  के  पात्र  समझकर ,
उनकी आवश्यकता  पूर्ती करनी चाहिए.
शरणार्थियों  की रक्षा करना ,
आश्रय देना,
मदद माँगनेवालों की  सेवा  करना ,
अभय दान  है.
वह दानों में  से  बड़ा  दान   है .
बड़ों  और  अच्छों को
हम जो भी छोटी -सी
मदद  करेंगे ,
वह हमारे लिए बढ़कर  साथ  रहेगी.
देने  की आदत   चाहिए .
दान  देनेवालों  को
कभी रोकना  न  चाहिए.
जिन्दगी  में    परायों  की चीज़ों को
अपना  न  बनाकर ,
दूसरों  की भलाई में  ही
अपनी  भलाई सोचनी चाहिए.
ऐसे सोचनेवाले 
चन्दन पेड़  के  समान 
होते  हैं .
चन्दन के पेड़ घिसकर
दूसरों को सुगंध  देता  है.

वैसे  ही  मनुष्य   को
 दूसरों की सेवा और भलाई  के  लिए 
जीना   चाहिए .
बुराई  न  करके ,
जीने  की  जिन्दगी  ही
श्रेष्ठ जीवन   है.
दुखों  को सहने का मन  चाहिए.
हमारे जीवन रेशम की गद्दी नहीं ,
    कंकट और काँटों  से भरे   जंगली मार्ग हैं.
लालच मुक्ति  मार्ग  की  बाधा है.
लालची अपने चारों  ओर
 दुश्मनी बढ़ा लेता  है.
क्रोध मनुष्य की आयु को 
घटा  देता  है.
क्रोध  मानसिक  चिंता  को
बढ़ा   देता  है.
क्रोध ,ईर्ष्या के  बुखार,कृतघ्नता ,
बेकार  हठ,आदि  बुरे  गुण होते  हैं.
हमारे कल्याण   कार्य  ही
हमें अमर कीर्ति की ओर
 ले  जायेंगे.