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Thursday, January 15, 2026

संपत्ति का दफ्तर

 दौलत का दर्पण

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई।

दौलत का दर्पण 

 दान धर्म करो

 दर्पण में  तेरा

  खुशी भरा 

 मानसिक संतोष भरा 

 अभिगमन का चेहरा     दीख पड़ेगा।

 भ्रष्टाचार और रिश्वत के धन से  खुल्लमखुल्ला खुशी न होगा जान।

 दौलत का दर्पण सब कुछ देता नहीं,

 बड़े बड़े रईस

 शासक पदाधिकारी 

 महाराजा दशरथ तक

 संतान भाग्य के लिए

 तड़प रहे थे।

 दानी कर्ण का नाम 

अमर।

 धन के ढेर,

शरिया मृत्यु शय्या पर

 दौलत का दर्पण 

 हँस रहा है,

 कोई प्रयोजन नहीं है।

बड़े बड़े रईस के सुपुत्र 

 अल्पायुष में

 मर चुके हैं।

  दौलत के दर्पण को देखो,

 अन्याय की सफलता,

 पढ़ें लिखे प्रतिभाशाली वकील  अपराधी को दंड से छुड़ाते हैं।

 खूनी बच जाता है,

करोड़ों का बैंक लोन 

 न चुकाकर विदेश में

 सानंद बस गये।

 दस हजार कर्जा 

 गरीब कानून के शिकंजे में।

 लाखों करोड़ों के मंत्री

 विधायक सांसद भ्रष्टाचार के पैसे से मनमाना कर रहे हैं।

 नशीले पदार्थ के व्यापारी 

 मालामाल।

 कबीर ने कहा

 गो रस गली गली बिकै,

 मदिरा बैठा आराम।

 धन  का लोभ

 मातृभूमि के विरोध 

 द्रोह,

 मातृभाषा को मारकर 

 अंग्रेज़ी का उत्थान।

 मातृभाषा बोलना अपमानित।

दौलत का दर्पण 

 झीलों को नदारद करता है।

 सोचो समझो 

 मेहनती अन्नदाता किसान 

आत्महत्या कर्जदार।

 धनी थोक व्यापारी 

 मालामाल।

 दौलत का दर्पण 

 अश्वमेध यज्ञ,

 लड़ाई दुर्बल राजाओं की हत्या।

 दौलत का दर्पण 

 भाग्यवानों को दिखाता है।

हीरे मुकुट के मंदिर में भीड़।

 वटवृक्ष के नीचे बैठे

 विधायक  अकेले।

 स्वर्ण शांति के आसन में 

 दिव्या श्रम वासी,

प्रवचन देता है

 धन से सुख नहीं 

‌पर उसके पलंग का दाम

 80लाख।

 दौलत के दर्पण यह भी दिखाता है,

 करोड़ों रुपए खर्च करो

 अन्याय क्यों, तुम बनोगे

 सांसद , विधायक मंत्री।

 दौलत का दर्पण स्वर्ण

 स्वर्ग हीरा।

 सदा रहेगा चमकता।

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

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