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Friday, April 10, 2015

भारत की न्याय व्यवस्था मर रहीं है.

क़ानून  भारत  में  ,अमीरों को  सजा  स्थगित रखता है;
गरीबों  को और गरीब  बनाता है;

पियक्क  अभिनेता का  मुकद्दमा सालों चला ,

अभी एक ड्राईवर का गवाह  हैं गाडी मैंने चलाई;

मुख्य मंत्री का  मुकद्दमा  सालों चला,

न्याय सुनाने के बाद अपील में  कहते हैं 

अठारह साल पहले   दाम कम ,

सजा क्या सुनायेंगे पता नहीं.

अभी आंध्रा में बीस तमिलनाडु  के 

चन्दन पेड़ काटनेवाले अपराधियों को 

पुलिस  ने गोली चलाकर  मार डाला.

वे अपराधी है या नहीं  पता नहीं ,
पर तमिलनाडु सरकार ने  का दिया  

हर  गोली  के शिकार  हुए लोगों  को 

तीन लाख सरकार देगी.

छे  ही अपराधी नहीं ,लेकिन सब को तीन  लाख.

आत्महत्या करने वालों को कई लाख ,

यह तो आत्म हत्याके लिए प्रोत्साहन.
अपराधियों के लिए प्रोत्साहन ,

दिल्ली  में तो बलात्कारियों को साक्षात्कार और रूपये.

भारत  की न्याय व्यवस्था  मर रहीं है.


Tuesday, April 7, 2015

भगवान है या नहीं.भगवान खुद नाराज.

आज  भी चर्चा है  --भगवान  है या  नहीं.

है तो  अपराध क्यों ?

है तो भ्रष्टाचार क्यों ?

हैं तो भगवान के दर्शन में धनी-निर्धनी का भेद  क्यों ?

क्यों  मनुष्य गुण में फरक?

भेद /अंतर /फरक /डिफरेंट इतने शब्द   क्यों ?एक ही 


अर्थ के लिए.

बैल गाडी से जेट  तक वाहन.

गोरे /काले .सुन्दर -भद्दे लम्बे -नाटे 


काँटे-फूल  इतने फरक .


सूर्य -चन्द्र तारे  पानी हवा  सब जीने का आधार एक.


भगवान  एक . उनकी सृष्टि  में अंतर.


दस हज़ार देने पर   दस लोगों को 




एक घंटे में खर्च करता है एक,

एक तो  दस को बीस हज़ार बनाने में चतुर.


एक तो दान -धर्म ,फिर खाली हाथ.


दस हज़ार तो बराबर बांटे गए.



एक बन  गया करोडपति 

,
एक पीकर अर्द्ध नग्न फुट पात पर,


इसमें  दाता का दोष क्या?

यों ही मनुष्य की  सृष्टि तो बराबर ;

पर  उनके कर्म फल  को ईश्वर नहीं बनेगा जिम्मेदार.



देखो मनुष्य का करतूत ;


वह खुद भगवान बनाकर  कर दिया छिन्न-भिन्न 


.
पैसे का सदुपयोग करके अपने धर्म का विकास न करके ,
कुकर्म से करना चाहता एकता

.
भगवान खुद हो जाता नाराज .


भगवान सोचता ,मेरी ही हालत ऐसी तो




कितना  अधर्मी -पापी मनुष्य

 ;
जुलुस निकलता उस दिन छा जाता आतंक -भय भीत.

मेरे नाम पर कलंक ; करोड़ों का  बर्बादी 

.

नहीं हुआ कोई विकास;




आजाद भारत में  मेरी स्तिथि 

कई लोग गरीबी में ,


बोलता है पैसे लेकर बन जाता  हिन्दू विधर्मी .


हिन्दू तो  क्या करता गरीबों के विकास में.


धन आश्रमों में मंदिरों में 

,
दान दिए खेत हदापते अधिकारी या राजनीतिज्ञ ;


सोना -चाँदी लूटते 

,
भगवान के दर्शन के लिए टिकट.


तहखानों में जो सोना -चाँदी  धीरे धीरे नदारद.


अपराधी की प्रार्थना उसके काले धन से 


करूंगा क्या इनकी भलाई ;



भगवान खुद नाराज.

Wednesday, March 11, 2015

संसार तो दुरंगी

जग  में  तूफान -आंधी -सुनामी  होता है,भूकंप  भी ;

नहीं कह सकते मनुष्य 

मन ,दयालु के बीच एक निर्दयी है काफी 


एक घड़े भर की भात में ,एक बूँद विष भी काफी;

प्यार भरा संसार है तो घृणा की बात क्यों;

सत्य भरा  संसार हो तो असत्य  का अस्तितिव क्यों?


सुख मय  संसार्  है  तो दुःख कीबात  क्यों?

फूल ही फूल है तो कांटे भी तो है साथ ही;

मृदु रेत है तो उसमें कंकट  भी  मिश्रित है.


बिजली की रोशनी  है तो उसमें धक्का भी साथ है;

अग्नि मिटाती सर्दीतो  जलन  की क्रिया भी;

धूप ही धूप में छाया भी है जगत में;

पतझड़ है तो वसंत भी ;

संसार है अति विस्तार ,

संसार  है अति निराली 


जानना -पहचानना अति दुर्लभ;दुश्वार.

Thursday, March 5, 2015

चुप --छिप -स्वार्थ.


सबेरे उठा;न जाने  कुछ भी लिखने को न सूझा

राजनीति ---

धर्मनीति -

लोकनीति 

सब में भलाई . सब में बुराई .

सकल  जगत में फूल -काँटा 

विष -अमृत 

द्वित्व . 

दया-निर्दया ;

निर्दयता देख निर्दयी की आँखों में भी  अश्रु.

चोरी देख चोर को भी गुस्सा .

भ्रष्टाचारी देख भ्रष्टाचार भी निंदा ;

सत्यवान की प्रशंसा असत्य का काम 

यह्दुनिया ही  दुरंगी;

द्वि जीभ ; द्विआचरण ;

हाथी के दांत खाने के और 

दिखाने के और;

मगर मच्छ आँसू;

क्या लिखूँ ?क्या  छोडूँ?

गुरु का उपदेश --चुप रह.

चुप.छुप.-वे तो ज्ञानी ;

मैं तो अधजल गगरी छलकत जाय.

मेंढक सा टर-टर --

फँस जाता साँप के मुँह में.

चुप -चुप- चुप 

जो बोलता है उसकी चाल --चुप --छिप -स्वार्थ.

Tuesday, February 24, 2015

for hindus to reform.


ஹிந்தி கற்க



मैं हिन्दू हूँ ;  --நான் ஹிந்து .
     
आजकल हिदुओं को अपनी दयनीय स्थिति  पर विचार करना है;

இந்நாட்களில் ஹிந்துக்கள் தங்களுடைய  தயைநிறைந்த நிலையைப் பற்றி சிந்திக்க வேண்டும்.

कई बड़े बड़े मंदिर अन्धकार में ;பெரிய -பெரிய கோயில்களில் இருட்டில்  .

 मेले उत्सवों के समय  मंदिरों के चहार दीवार पर पेशाब का दुर्गन्ध ,
திருவிழாக்கள் உத்சவ நாட்களில் கோயில்களின் மதில் சுவர்களில் சிறுநீர் நாற்றம்.


 कई मंदिरों में अन्धकार ,--aneka koilkal iruttu அநேக கோயில்கள் இருட்டு
जेनेराटर की सुविधा नहीं.==ஜெனரடர்   வசதி கிடையாது.

कई प्राचीन मंदिर उजड़े हुए हैं . பல கோயில்கள் பாழடைந்த நிலை .

हिन्दुओं की एकता के लिए  करोड़ों की मूर्ती विसर्जन करनेवाले हम
 मंदिरों को स्वच्छ न रखें तो भगवान खुद उन्हें स्वच्छ --बदल देगा;

ஹிந்துக்களின் ஒற்றுமைக்காக கோடிக்கணக்கான சிலைகளை விசர்ஜனம் செய்யும் நாம் ,கோயில்களை    தூய்மையாக   வைக்கவில்லை என்றால் கடவுள் தானே சுத்தம் செய்து கொள்வார் .
कांचीपुरम एकाम्बरेश्वर मंदिर गया तो  मंदिर के अन्दर ही पाखाना;
காஞ்சிபுரம் ஏகாம்பரநாதர் கோயில் சென்றால் கோயிலுக்குள் திறந்தவெளி கழிப்பறை.

अपने को हम ऐसा बनाना है ,हम खुद गर्व का महसूस करें.
நம்மை நாமே கர்வமாக உணரும்படி நம்மை ஆக்கிகிக் கொள்ளவேண்டும்.

मंदिरों के सामने ही पेशाब करने को रोकना है.

கோயிலுக்குதிரிலேயே  சிறுநீர் கழிப்பதை தடுக்கவேண்டும்.

 पैसे हैं ,लेकिन क्या करते हैं तो विसर्जन; பணம் உள்ளது. அதை விசர்ஜனத்திற்கு  பயன்  படுத்துகிறோம்.

फिर मंदिरों के पर्वों के दिनों   बदमाशों की वसूली रोकना चाहिए;

பிறகு கோயில் பண்டிகை காலங்களில் போக்கிரிகள் வசூலிப்பதை  தடுக்கவேண்டும்.

विनायक चतुर्थी जुलुस में  पियक्कड़ अश्लीली नाच करते हैं रोकना  चाहिए;

விநாயக சதுர்த்தி ஊர்வலத்தில்  குடிகாரர்கள் அசிங்கமான நடனம் ஆடுகின்றனர்  தடுக்கவேண்டும்.
भक्ति के क्षेत्र अत्यंत पवित्र ; பக்தி மிகவும் புனிதமான  துறை.

उन्हें  जाति ,भाषा आदि के नाम अपवित्र करना ठीक नहीं;
அதை ஜாதி ,மொழி என்று புனிதமற்று செய்வது சரியல்ல.

मैं कुछ सुधार और एकता की सलाह देने पर  नरेश कुमार ने लिखा मैं मुसलमान का चमचा;

நான் சில திருத்தங்களையும்  ஒற்றுமைக்கான
ஆ லோசனையும்   எழுதினால் நரேஷ்குமார் நான் முகலாயர்களின் தேக்கரண்டி என்று எழுதுகிறார்.

यह ऐसा लगता है  बन्दर को  बया ने उपदेश दिया तो उसने उसका घोंसला नष्ट किया;
குரங்கு தூக்கணங்குருவி உபதேசம் செய்ததும் கூட்டை நஷ்டப்படுத்தியதுபோல்  தோன்று கிறது  அவர் கூற்று.

पहले अपने को पवित्र रखना है; முதலில் நாம் நம்மை பவித்திரமாக வைத்துக்கொள்ளவேண்டும்.

धुल धूसरित मंदिर ,बदबू मंदिर  --தூசி நிறைந்த கோயில் .துர்நாற்றமுள்ள கோயில் .
मैं हिन्दू हूँ ,बीस हज़ार कीसुन्दर मूर्ति को समुद्र में फेंकनेवाले हिन्दू
अपने मंदिर को कूड़ा बना रखा है;

நான் ஹிந்து; இருபதாயிரம் அழகு சிலைகளை கடலில் எரிகின்ற  ஹிந்து ,தன்னுடைய கோயிலை குப்பைத் தொட்டி ஆக்கிஉள்ளான்.

एक सच्चा हिन्दू होने से  मेरा आदर्श और कर्तव्य यह लिखने की प्रेरणा दे रहा है.
ஒரு  உண்மையான ஹிந்துவாந்தால் என்னுடைய ஆதர்சமும் கடமையும் இதை எழுத தூண்டிக்கொண்டிருக்கிறது.

इन बातों पर ध्यान कीजिये. இதில் கவனம் செலுத்துங்கள்.

ॐ  श्री गणेशाय नमः;--ஓம் கணேசாய நமஹ

  ॐ कर्तिकेयाय नमः --ஓம் கார்த்திகேயாய நமஹ

ॐ नमः शिवाय --ஓம் நமஹ  சிவாய
ॐ दुर्गायै नमः ஓம் துர்காயை நமஹ

; ॐ हनुमंताय नमः -ஓம் ஹனுமந்தாயை  நமஹ

हरे राम हरे कृष्ण--ஹரே ராம் !ஹரே கிருஷ்ணா
तेरे भक्त मूर्ति विसर्जन छोड़ उस दिन में मंदिरों को  स्वच्छ पेशाब
 बदबू रहित के वातावरण बनाने -बनवाने की सद्बुद्धि दें.

உன்னுடைய பக்தர்கள் சிலை விசர்ஜனம் விடுத்து அந்த நாட்களில் தூய்மையான சிறுநீர் நாற்றமற்ற சூழல்  ஆக்கவும்
ஆக்குவிக்கவும்  நல்ல  அறிவைக் கொடுக்கவும்.

Sunday, February 22, 2015

sumaarg--सुमार्ग --नल वली-अव्वैयार. ६ to१०

   सुमार्ग 


अव्वैयार तमिल कवयित्री का नलवली--संघकाल-ई.पू.-२वीन शताब्दी 


अव्वैयार  कहती है :---

एक व्यक्ति को उनके भाग्य  रेखा  के अनुसार 

जितना मिलना है ,उतना मिल ही जाएगा.

यही संसार में चालू है.
संसार में  लहरोंवाले समुद्र पारकर 

द्रव्य आदि कमाकर आनेपर 

वापस समुद्र तट पर  पहुँचने पर 

उतना ही आनंद या सुख मिलेगा ,
जितना मिलना है.

उससे अधिक  न मिलेगा.

तमिल में एक कहानी हैं --

दो व्यक्ति जैतून का तेल लगाकर 

रेतीले प्रदेश में लुढ़ककर उठे.

एक के शरीर पर ज्यादा रेत चिपके हुए थे,दुसरे के शरीर पर कम.

अतः प्रयत्न तो ठीक है,

पर फल उतना ही मिलेगा ,जितना मिलना था.

७.

नाना प्रकार से सोचो ,
कई प्रकार से अनुसंधान करो,
सामाजिक शस्त्र पर खोजो ,
यह शारीर नाना प्रकार के कीड़े  और 
अनेक प्रकार के रोगों का केंद्र हैं;

एक दिन ज़रूर प्राण पखेरू उड़ जाएगा.
इस बात को चतुर ,बुद्दिमान ज्ञानी जानते हैं.

अतः वे कमल के पत्ते और पानी केसमान संसार से अलग 

अनासक्त जीवन जियेंगे.
वे  माया जग नहीं चाहेंगे.
संसार से अनासक्त रहेंगे .
८.

अव्वैयार कहती है -

भूलोक वासियों! सुनिए!

बड़ी बड़ी कोशिशों में लगिए;

आपका  समय ग्रहों के अनुसार 

अनुकूल न हो तो 

आपके प्रयत्न में न मिलेगी कामयाबी.

यदि अपने प्रयत्न में सफलता मिल ही जायेगी तो भी 

मन चाही चीज न मिलेगी .

ऐसा मिलने पर भी स्थायी न रहकर 
वह अस्थायी होगी.
हमें  शाश्वत सम्मान देनेवाला इज्जत है.
मर्यादा की तलाश करके पाना ही  शाश्वत संपत्ति है.

९.

नदी के बाढ़ सूखने पर ,
रेतीली नदी  में पैर रखने पर धूप के कारण पैर जलेगा .

पर वहीं स्त्रोत से पानी निकलकर सुख पहुंचाएगा.

वैसे ही बड़े सज्जन  गरीब होने पर भी ,
जो उनसे मांगते हैं ,उनको नकारात्मक उत्तर न देंगे.

१० .

जो मर गया उसका जीवित आना असंभव.
रोओ,साल भर रोओ ;
रोना दुखी होना बेकार.

गाँठ बांधकर रखो --भूलोक वासियों !एक दिन 

आप की भारी आयेगी.

अतः जितना हो सके ,
उतना दान -धर्म देकर 
आप भी पेट भर खाइए .




तमिल साहित्य -एक परिचय --सुमार्ग --अव्वैयार ;

Stream




Sethuraman Anandakrishnan

Shared publicly  -  10:45 AM



Sethuraman Anandakrishnan

Discussion  -  10:44 AM
मातृभाषा दिवस  के सन्दर्भ  में ,अव्वैयार ,तमिल कवयित्री के चालीस पद्य का गद्यानुवाद का  प्रयत्न किया गया है. आशा है ,हिन्दी भाषी इसका स्वागत करके अपनी रायें प्रकट करेंगे ; इनमें खूबी है तो  प्राचीन तमिल साहित्य का रसास्वाद कीजिये;


अनुवाद में भूलें हो तो समझाइये; टिप्पणी  आलोचना कीजिये जिससे मैं अपनी हिन्दी के भूलें समझ सकूँ. मेरे गुरु  प्रचारक प्रशिक्षण में ही मिले ;श्री गणेश मेरे माताजी गोमती ने और मामाजी ने किया;  आशा है हिन्दी भाषी भूलें हो तो समझायेंगे और मैं बुढ़ापे में  सुधर सकता हूँ. आज तक किसीने मेरी गलती नहीं बतायी हैं 
मेरे प्रचारक विद्यालय के गुरुवार राम्चान्द्रशाह ,ई.तंगप्पन जी ,श्री के.मीनाक्षीजी ,श्रीसुमातींद्र ,आदि के प्रति मैं आजीवन  आभारी हूँ.

    अव्वैयार --नल  वलि ----सुमार्ग --संघ-काल  ईस्वी पूर्व  दूसरी शताब्दी 

प्रार्थना गीत 
  गजवदन ! तेरे नैवेद्य के रूप में  ,
 दूध ,शुद्ध दही ,गुड-रस ,दाल  आदि मिश्रित 
पकवान दूंगी मैं;बदले में देना त्रि -तमिल
भौतिक ,संगीत और नाटक आदि तमिल भाषा ज्ञान देना.
   वर स्वरुप '"तमिल भाषा ज्ञान माँगना कवयित्री  के भाषा -प्रेम कीझलक है.

१. पुण्य-कर्म से मिलेगा सुख ,संपत्ति ;
   पाप  कर्म से होगा सर्वनाश;
  भू में जन्म लेनेवालों का खजाना तो 
  उनके पूर्व जन्म  के पाप-पुण्य कर्म फल ही;
 सोचकर अन्वेषण अनुशीलन करें तो ये ही सत्य है.
  बुराई तज,भला कीजिये .यही है जीवन के सुख की कुंजी.
२. संसार  में जातियां तो दो ही है;
एक  जो परोपकार ,दान -धर्म  और न्याय मार्ग  चलते हैं वे  ही 
उच्च जाति के मनुष्य  है;
जो  परोपकार  नहीं करते ,वे हैं निम्न जाति के लोग;
नीति ग्रंथों में यही बात हैं.
3. यह शरीर मिथ्या है,यह तो  वह थैली है ,
जिसमें स्वादिस्ट सामग्रीयां अन्दर सड़कर
 बदबू केरूप में निकलती है;
यह शरीर तो अशाश्वत है;
इसे स्थायी मत मानो ;समझो;
अतः  जो कुछ मिलते हैं 
उन्हें दान और परोपकार में फोरन लगा दो;
धर्म्-वानों को जल्दी मिलेगी  मुक्ति;
4.कार्य जो भी हो ,कामयाबी के लिए 
   भाग्य साथ देता हैं;
 जितना भी सोचो ; करो ;
 कामयाबी वक्त  और पुण्य कर्म पर निर्भर है;
इसे  न  समझकर प्रयत्न करना ,
उस अंधे के कार्य के समान हैं जो 
आम तोड़ने अपनी लकड़ी फेंकता है;

5.जिनता भी प्रयत्न करो,
   मांगो ,बुलाओ;चीखो ;चिल्लाओ ;
तेरी चाहों की वस्तुएं  न मिलने का सिरों rekha  है  तो 
कभी नहीं  मिलेंगी ;
जो चीज़ें नहीं चाहिए ,वे मिलना सहज है.
यह वास्तविकता न जान -समझकर दुखी होना ही 
अति दीर्घ काल से मानव -कर्म हो गया है.

क्रमश चालीस सुमार्ग अव्वैयार के सात दिन आयेंगे. 
आशा है हिन्दी जानकारी रखने वालों के लिए उपयोगी रहेगा 
तमिल  संघ साहित्य की जानकारी के लिए;