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Sunday, January 18, 2026

ஃआशीर्वाद

 आशीर्वाद 

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई 

19-1-26.

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भारतीय शास्त्रों में 

 वेद उपदेशों में 

 आशीर्वाद का अपना महत्व है।

 भारतीय संस्कृति का अविभाज्य अंग है

‌आशीषें और नमस्कार।

 संध्या वंदन में 

 गोत्र , ऋषियों के नाम पिता के नाम और अपने नाम कहकर 

 नमस्कार करके आशीषें

 प्राप्त करना,

 गुरु का नमस्कार करके आशीषें पाना,

 जीवन में अमन चमन शांति संतोष प्रगति के लिए

 आवश्यक है।

 आशीर्वाद 

में सकारात्मक उर्जा।

आशीषें  

  दीर्घायुष भव।

‌सौभाग्यवती भव।

 विधवा ब्राह्मणी को

 आशीर्वाद दिया

पुत्रवती भव।

 कबीर का जन्म हुआ।

 पुत्र वाणी का डिक्टेटर बना।

परशुराम ने कर्ण को शाप दिया।

 भीष्म ने कुंती को

 सौभाग्यवती भव का आशीर्वाद दिया ।

जन कल्याण के लिए 

 समाज कल्याण के लिए 

 सकारात्मक मंगल शब्द 

 आशीर्वाद।

 भगवान भला करे।

आयुष्मान भव 

 विजयी बनो

  सदा खुशी रहो।

 फूलों फलों

 ये आशीष वचन 

 ही सनातन धर्म का 

‌संदेश है।

 माता पिता दादा दादी 

 और बुजुर्गों से

‌आशीषें  पाने का रिवाज़ 

 धीरे धीरे लुप्त हो रहा है।

 परिणाम आज कल के

 युवक युवतियों के जीवन में 

 शांति संतोष चैन नहीं है।

 तलाक चाय पीने के समान 

 माता पिता के क्रोध 

 दुख के भागी बनकर शादी

 बगैर शुभाशीष के

 जीवन में

 न प्रेरणा

न प्रोत्साहन 

 न सुख चैन।

सदा मंगल शब्द 

सुनने   नमस्कार करके

 आशीर्वाद की शुभकामनाएँ

 जीवन में देगी  आनंद।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

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