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Monday, November 18, 2019

इंदिरागांधी

प्रणाम।
 एक नेता  राम सा हो तो
 पत्नी को आदर्श  के लिए
जंगल  में  भेज  देता।
एक नेत्री लौह महिला,
 गाँधी  का अर्थ  बनिया
पर अपने खान वंश को
गाँधी  (बनिया) वंश में  बदल दिया।
व्यक्तिगत जीवन का प्रभाव
समाज पर पडता है।
ब्राह्मण भी गाँधी बन गये।
परिणाम  सांसद  बनने
बनने के बाद  दल बदलने
घुड़दौड़ व्यापार।
  इंदिरागांधी  विश्व विख्यात,
पर देश की एकता
अखंडता की
दूरदर्शिता  नहीं।
प्रांतीय दलों को
गठबंधन  के नाम
बढावा दिया।
परिणाम  तमिलनाडु  में
राष्ट्रीयता कम हो गई।
बावन साल के बाद भी
राष्ट्रीय  दल के योग्य नेता बन सके।
भाजपा में  नेता  नियुक्त  करने में  देरी।
 जो भी हो वीर महिला
उत्तम प्रशासक  उनको सलाम।

नारी की तरक्की  हुई  हैं
पर प्रौढ़ पुरुषों  की संख्या
वैवाहिक  पुरुष
ब्रह्मचारियों की संख्या
बढ गई।

स्वरचित स्वचिंतक
यस।अनंतकृष्णन

भलें

प्रणाम। वणक्कम।
 भूलें  होंगी  जरूर।
मनुष्य  जीवन में।
भूलारोपित मनुष्य  ही
 सब के सब।
ऐसा कहना सत्य।
क्यों?
दस महीने अंधेरे  में।
सूक्ष्म  बिंदुओं  के मेल से
शिशुरूप।
जुड़ने के पहले न रूप-  रंग ।
अब कहिए
 बगैर भूलों  के
मनुष्य  जीवन है नहीं।
रामावतार में  भूल।
कृष्णाअवतार में
धर्म के नाम भूल।
वामन अवतार में
भूल ही भूल।
ज़रा  सोचिए-
अर्धरात्रि पत्नी और शिशु को
छोड कर जाना बडी भूल।
करतल भिक्षा तरुवर वासा
सीख भी भूल।
भूलों  से सुधारना ही मनुष्य  जीवन।
मनुष्य  को परिश्रमी  बननी है।
अपने पैरों  पर खडा होना हैं।
स्वाभिमानी  से जीना है।
बेकार मन शैतान  का कारखाना।
कर्तव्य  करना ही भक्ति  है।
कर्तव्य  भूल तब राम नाप
जपना भक्ति  नहीं ।
हमारे पूर्वजों  की भूल।
आज साफ मंदिर  की दीवारों  पर
परीक्षाअर्थी अपनी पंजीकृत नंबर लिख
गंदी करना भक्ति  मान रहा है।
यह तो बडी भूल।
सुधरना
सुधारना
हमारा काम।
आजादी  के सत्तर 
साल के बाद
स्वच्छ भारत की गूँज।
अपनी गली में
सुदूर  शहर -गाँव  की
गलियों  में  कूडे के ढेर 
देख आज कहता है
मोदी ने साफ नहीं  किया।
ऐसी गैर जिम्मेदारियों को
उनकी भूलें  समझानी हैं।
 स्वचिंतक स्वरचित
यस-अनंतकृष्णन।

Saturday, November 16, 2019

फ़र्ज

मेरे प्रेरक हिंदी  प्रेमियों  को
नमस्कार।
प्रणाम।
 कलम की यात्रा के संचालकों को
जो मुझे प्रोत्साहित कर रहे हैं,
उन सब को प्रणाम।

    कर्तव्य  /फ़र्ज
 गीताकार श्री कृष्ण  की कृपा मिलें।
  कर्तव्य  करो,
फल की प्रतीक्षा  न करो।
 भगवान का उपदेश।
मनुष्य  तो सद्य:फल चाहक.
मन तो संचल।
मन चंगा तो कटौती में गंगा  मान
मन नियंत्रित नहीं  करता।
आजकल  के शासक,प्रशासक,
अधिकारी, कर्मचारी , भक्त
फल मिलने पर ही
कर्तव्य निभाते हैं।
मेवा पहले,सेवा बाद में।
तत्काल लाभ धर्म बदल जाते।
मातृभूमि तजना,
प्रवासी नागरिक बनना,
मज़हब बदलना,
कर्तव्य  बाद  में।
सरकारी  संस्थाओं  के कर्मचारी
निजी संस्थाओं  के कर्मचारी
पहले के चेहरे  में  उतना तेज नहीं।
दूसरे के चेहरे  में  तेज अधिक।
वजह?
पहले को कर्तव्य  करें  या न करें
मेवा मिलता जरूर।
दूसरे  को कर्तव्य  न करें  तो
मेवा न मिलता कभी।
सरकारी  अध्यापक /निजी अध्यापक
कर्तव्य  करने में  फरक।
नतीजा  सरकारी स्कूल  बंद।
निजी  स्कूल की संख्या  अधिक।
गरीबों  की  शिक्षा अपमानित।
अमीरों  की शिक्षा  सम्मानित।
कर्तव्य  चूकना अतःपतन का मूल।
स्वचिंतक स्वरचित
यस।अनंतकृष्णन।

दिल धड़कन

तुम मेरा दिल
मैं तेरा धड़कन।
  परिवार दल के संगठक व  संयोजक, सदस्य-मित्र
सब को नमस्कार।
  दिल अलग धड़कन अलग तो
जीना दुर्लभ।
दिल धडकता है मेरा तो
तेरे ही कारण।
न तो धड़कन बन्द ।
मेरे दिल का धड़कन
 तुम पर निर्भर।
साँस चलता है तो
हवा तेरी,
 बाहर से आती।
प्यास बुझना है तो
तेरे प्रेम का पानी ।
अवाज निकलती है तो
तेरी करुण  ध्वनी।
हे ईश्वर! तेरा अनुग्रह न तो
धड़कन बन्द।
साँस बन्द!
प्यासा ही सब अन्त।
  स्वरचित स्वचिंतक
यस.अनंत कृष्णन

Thursday, November 14, 2019

प्रेम और तपस्या

नमस्ते।वणक्कम।
प्रेम स्थाई या अस्थाई
पर व्यस्त ,
तपस्या का उददेश्य
प्रेम  लक्ष्य।
तपस्या करने
गुरु चाहिए।
प्रेम स्वत:सिद्ध।
राम नाम उपदेश तपस्या।
बगैर उपदेश प्रेम।
क्षणिक प्रेम।
स्थाई प्रेम
तन प्रेम।
धन प्रेम
मन प्रेम।
देश प्रेम।
स्वार्थ प्रेम
निस्वार्थ प्रेम।
लेन देन प्रेम।
एक पक्ष प्रेम।
द्वि पक्ष प्रेम।
त्याग्मय प्रेम भोगमय प्रेम ।
तपस्या कहीं अन्धेरे में।
ईश्वर साक्षात्कार के लिए।
प्रेम की कथा प्रचलित।
तपस्वियों की कथा अप्रचलित।
प्रेम संकीर्ण फिर भी मोहक।
तपस्या जग कल्याण
  पर मोहता सोहता नहीं।
लाली मेरे लाल की
जित देखो तित लाल।
पर तपस्या आँखें  मूंद।
प्रेम क्रिया प्रधान।
तपस्या  में
अकेलापन /एकान्त।
प्रेम संकीर्ण।
ऋषी गण पर प्रेमगण  नहीं।
स्वरचित स्वचिंतक
यस।अनंतकृष्णन

बाल दिवस

प्रणाम।
बाल दिवस।
आज के बालक
भविष्य के शासक,
प्रशासक,
अभियंता,
चिकित्सक,
देश के रक्षक
देश के निर्माता
अत:चाचा नेहरू ,
अब्दुल कलाम
कर्मवीर काला गाँधी कामराज
आदि दूरदर्शी नेताओं का ध्यान
बच्चों की प्रगति केंद्रित।
आजकल चित्रपट प्रधान
अश्लील नाच
उत्तर भारत कैसा है
स्कूल के वार्षिकोत्सव पता नहीं
तमिलनाडू में चित्रपट गीत  नाच।
स्कूल-कालेज के कार्यक्रमों में
चित्रपट के संवाद।
मूल उद्देश्य भूल
अनुशासन हीन  शिक्षा।
बाल दिवस बालों की उन्नति  के लिए
चरित्र अनुशासन की प्राथमिकता।
पैसे को ही शिक्षा
पैसे दिखाओ  शिक्षक दास।
नकली छात्र परीक्षा देने
खेद के समाचार।
शिक्षक को मारना,
शिक्षक का अपमान।
शिक्षकों का बद व्यवहार।
आज के बाल दिवस ऐसा
मनाना जिससे बालकों की
चाल चलन सुधर जाएं ।
अनुशासन हीन समचार न प्रकाशित हो
बालकों को सुभाशीष।

Monday, November 11, 2019

बचपन

प्रणाम।वणक्कम

पचपन
बचपन सा खेल कूद नहीं।
बचपन के लोगों से चर्चा  नहीं।
बडे  हो बढ बढ़ाना नहीं।
बुढापा का पहला सोपान।
तनाव,अवकाश होने तीन साल।
बेटी की शादी,लडके की पढाई नौकरी।
शक्कर,प्रेशर,न जाने वह है या नहीं
चेकप करने दोस्तों का आग्रह।
बचपन का मस्त खुशी पचपन में नदारद।
न धन,न पद,न अधिकार
वापस न देता जवानी।
ईश्वरीय नियम दंड पचपन।
यस।अनंतकृष्णन।