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Monday, January 5, 2015

आरुद्रा दर्शन







आज  देश में शिव भक्तों के लिए आरुद्र दर्शन है.


अहंभाव मिटाने शिव का सुन्दर रूप ,

विष्णु का  मोहिनी रूप.

तारुका वन के ऋषियों  के ममकार

शिव की याद दिलाने शिव शक्ति का परिचय.

संसार  बिगाड़ने ,अहंभाव हटाने

नर -नारी आकर्षण पर्याप्त

सुन्दर नर के पीछे  ऋषी -पत्नियाँ,

सुन्दर नारी के पीछे युव-ऋषि ,

हो गया उनके सब शास्त्र ज्ञान व्यर्थ ;

जग को अज्ञानी करने  पर्याप्त है

मोहिनी -मोह रूप.

विश्वनाथ के ध्यान में

मन से हटाओ नारी मोह;

तब हो जाओगे अहम् ब्रह्मास्मी

का साक्षात्कार.

यही तत्व प्रधान "आरुद्रा दर्शन".

यही  मोहिनी रूप "भस्मासुर "का वध

याद दिलाते हैं शिव का गुण -गान.

संयम सीखो; सदा याद करो सदा शिव की .

जग में पाओगे सदा संतोष -शान्ति.


Sunday, January 4, 2015

आपस में है भाई -भाई.



हमें भूलना नहीं कभी ,

धार्मिक एकता को तोड़ते हैं.

फिर वही कहानी आजादी के  ६७ के बाद
दक्षिणमें  तमिल तमिल चिल्लाते हैं तो
 हिन्दू मुसलमान दलित  के भेद
सोचो !भारतीयों! हम हैं भारत वासी ,
फिर तोडना -जोड़ना -टूटना
देश की भलाई नहीं ,
याद रखना हैं हम हिन्दू -मुस्लिम
आपस में है भाई -भाई.

 हम हैं  भारतवासी.

हमने सामना किया

आक्रमण कारियों का.


जो  बस गए  यहींके  हो गए.

कुछ नाता जोड़कर गए तो

कुछ नाता तोड़कर गए.

कई  देश भक्त पुरु जैसे थे तो

आंबी  जैसी देश द्रोही भी.

गोरी लूटा ,गजनी लूटा,

हम भी बिन एकता के टूटे हुए थे.

जो आये  हमें जातियों के नाम

धर्म के नाम तोड़ते रहे ,

हमारी विविधता में एकता

लाने में हो गए असमर्थ .

जब भेड़ों को भूल एक होकर लड़ें तो

जीत हासील करके छोड़े;
पर हमारे भाई को हम से  अलग करने में
हो गए सफल.

भारत का  एक टुकड़ा  टूट
पाकिस्तान  बन गया तो
पाकिस्तान टूटकर दो बन गए.

याद रखना हैं हम हिन्दू -मुस्लिम
आपस में है भाई -भाई.

Monday, December 29, 2014

वह है भगवान

 ईश्वर  को स्नान कराके ,
सुंदर आकार में सजाना,
सनातन धर्म में कब से प्रचलित?
आदि कवि वालमीकी को
ईश्वर दर्शन तो वन में मिला.
कालीदास तो मूर्ख ,
उसने सजाया या मंत्रों का
उच्चारण किया ही नहीं,
उनको कवित्व मिला.
विश्वविद्यालय की पढाई नहीं
रैट ब्रदर्स ने विमान का  किया
आविष्काऱ.

अनपढ कबीर बने  वाणी का डिकटेटर

यों ही हर एक के जीवव में प्रेरणाएँ

चतुराई होशियारी कैसे?

सोचो तो पता चलेगा..

एक गूढ तत्व से मिलती प्रेरणा़

वह है अदृश्य ़...वह है भगवान.

बदनाम

    
मैं  भी हिन्दू ,

मेरे जीवन में 

हर क्षण ,हर कर्म 

जीवन कीगति-विधि सब में 

मानता हूँ  इसमें 

भगवान का हाथ -साथ रहता है.

लेकिन 
अब  हिन्दू धर्म में 
कई नकली ठगी  लोलुप 
भोली-भाली जनता को 
लूट  रहे हैं,
इन पर सरकार नहीं लेगी कार्रवाइयाँ.

जनता को जगना है,
जगाना है 
नहीं तो हिन्दू धर्म का नाम होगा 

बदनाम.

Saturday, December 27, 2014

वहाँ नहीं शान्ति -संतोष.

गजवदन!गणपति !शिव सुत!

संकट हर!सर्व व्यापी!पीपल तले वासी !

सकल कार्य के श्री गणेश  के मूल -मन्त्र !

श्री गणेश के चरण में शरणार्थी हूँ  मैं.


आज धरा  स्वर्ग तुल्य , तेरी कृपा कटाक्ष से.

पर एक बात से खटकता दिल.

तू ने बनाया कर्म फल के अनुसार ,

क्षम -सक्षम अति क्षम अतिसय लोगों को ,

तू ने सृष्टी की है रूप -कुरूप गुणी -अवगुणी लोगों को.

इनमें तो जग में  जन्मे लोगों की भूल नहीं,

तूने सुखी लोगों के कार्य  का महत्त्व दिया; पर

अति  आकर्षक अश्लीलता माया की सृष्टि तू ने की;

उनसे बचने के ज्ञान  से  फंसाने के काम में तू तो क्षमता दी.

तेरे चरणों में यही प्रार्थना ,माया से बचने का सुज्ञान देना.

हम भी जी सके भ्रष्टाचार पाप रहित जीवन. .

Thursday, December 25, 2014

सनातन -धर्म

सनातन धर्म. …हिंदु मत

सनातन धर्म  सागर  है  तो
 हिंदु  मत  एक नाला |
नालै में  कई बुरे जंतु

जातियाँ,संप्रदाय  !.
 विदेशी
 हिंदु   एकता बिगाड रहे    हैं

नतीजा विदेशी धार्मिक देश की एकता बिगाडने तत्पर .

स्वार्थ राजनीती    विदेशी धर्मों को

अति  प्राथमिकता    दे  रही  हैं.

हिन्दुओं  को  एकता   से  सामना  करने

अपने  अस्तित्व     का  कायम  करने

एक आवाज उठानी  है --
सनातन धर्म  की जय हो.
शिव-विष्णु -राम - कृष्ण
सब  को एक मन से 
  एक होने  का  समय आ  गया|

Tuesday, December 23, 2014

सोचिये!भारतीयों!

 
भारत तो महान ,
शांतिप्रिय  पर ,
विदेशियों के रंग -रूप,
उनके सुगन्धित मामूली वस्तुओं से
मोहित भारतीय देश द्रोही,
चंदृप्यों के लिए ,
भाई -भाइयों में दुश्मनी ,
महाभारत - सा
भारतीय एकता निगालने है तैयार.
हमें न चाहिए सोना -चाँदी,

न चाहिए बाह्याडम्बर सुविधायें ,
न चाहिए विदेशी आगमन
 वह जैसा भी रूप में हो ,
न चाहिए विदेशी पूँजी ,
न चाहिए विदेशी माल,
न चाहिए विदेशी माल;
भारतीय उद्योग धंधों ,
भारतीय हस्त -कौशल ,
नाच -रंग ,गान -कविता
आदि को दें प्रधान.

"मेक इन इण्डिया"
 भारतीय हथ-करघा ,
भारतीय कृषि ,
भारत में हैं
सभी प्रकार की सम्पन्नता.
हरे -भरे खेत ,
जीव-नदियाँ
स्वार्थ मनमुटाव,जलन ,ईर्ष्या ,
लोभ ,लालच ,विदेशियों की भेद नीति ,
कर दिए  भारत का विनाश.
अब तो ज्ञान का हो गया विकास;
सोचिये!भारतीयों!चाहिए भारतियों में एकता.
त्याग,प्रेम, अनुशासन.