- धर्म से बढ़कर बड़ी संपत्ति और विशेषता प्रदान करनेवाला और कोई नहीं है,
- धर्म भालइयों की खेती है; जीवन की समृद्धि का आधार है. धर्म को भूलने से बढ़कर और कोई बुराई नहीं हैं.
- जो भी कर्म करना हैं ,उन सब को धर्म मार्ग पर ही करना है.
- मानसिक पवित्रता ही धर्म है; बिन मन की पवित्रता के जो भी करते हैं वे सब मिथ्याचरण है और बाह्याडम्बर है.
- धर्म मार्ग में ईर्ष्या ,लोभ,क्रोध और अश्लीली और चोट पहुंचनेवाले शब्द बाधाएं हैं.
- धर्म कर्म को स्थगित न करके तुरंत करना चाहिए; ऐसे धर्म कर्म मृत्यु के बाद भी यशोगान के योग्य बने अमर यश बन जाएगा.
- पालकी के अन्दर बैठने वाले और उस पालकी को ढोनेवालों से धर्म के महत्व कहने की आवश्यकता नहीं हैं . खुद समझ लेंगे.
- धर्म को लगातार सुचारू रूप से करनेवालों को पुनर्जन्म नहीं है;वह स्वर्ग में ही ठहरेगा.
- धर्म कर्म से जो कुछ मिलेगा वही सुखी हैं ;अधर्म से मिलनेवाले सब दुखी है.
- अति प्रयत्न से करने एक काम जग में है तो वह धर्म कर्म है. अपयश या निंदा का काम न करना है.
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Friday, January 22, 2016
तिरुक्कुरल धर्म पर जोर --३१ से ४० तक.
Monday, January 18, 2016
तिरुक्कुरल धर्म बड़प्पन अनासक्तियों का। २१ से ३० तक
तिरुक्कुरल धर्म
बड़प्पन अनासक्तियों का।
जहा में.
९. गुणी ,सदाचारी का क्रोध क्षण भर में मिट जाएगा।
१०. सभी लोगों से दया दिखानेवाले धार्मिक महान ही विप्र है.
Sunday, January 17, 2016
तिरुक्कुरल ---२. वान चिरप्पु ---वर्षा की विशेषता। ११से २० तक
५. बिना बरसे बिगाड़ेगी वर्षा जन जीवन को; यो ही बरसकर सुखीबनायेगी वर्षा।
६.. वर्षा की बूँदें आसमान से न गिरेंगी तो घास तक न पनपेगा ; न होगी हरियाली।
७. मेघ समुन्दर के पानी लेकर भाप बनाकर न बरसेगा तो समुद्र भी सूख जाएगा।
८. वर्षा न होगी तो ईश्वर की पूजा आराधना ,मेला उत्सव ,दैनिक पूजा पाठ सब बंद हो जाएंगे.
९. वर्षा न होगीतो संसार में दान -धर्म काम भी न चलेगा।
१०. बड़े बादशाह हो अर्थात सम्राट हो ,जितना भी महान हो ,पर वर्षा न होने पर जीना दुश्वार हो जाएगा। अनुशासन न रहेगा। सभी दुष्कर्म होने लगेगा।
५. बिना बरसे बिगाड़ेगी वर्षा जन जीवन को; यो ही बरसकर सुखीबनायेगी वर्षा।
६.. वर्षा की बूँदें आसमान से न गिरेंगी तो घास तक न पनपेगा ; न होगी हरियाली।
७. मेघ समुन्दर के पानी लेकर भाप बनाकर न बरसेगा तो समुद्र भी सूख जाएगा।
८. वर्षा न होगी तो ईश्वर की पूजा आराधना ,मेला उत्सव ,दैनिक पूजा पाठ सब बंद हो जाएंगे.
९. वर्षा न होगीतो संसार में दान -धर्म काम भी न चलेगा।
१०. बड़े बादशाह हो अर्थात सम्राट हो ,जितना भी महान हो ,पर वर्षा न होने पर जीना दुश्वार हो जाएगा। अनुशासन न रहेगा। सभी दुष्कर्म होने लगेगा।
Friday, January 15, 2016
तिरुक्कुरल --प्रार्थना ७ to १०।
रहनेवाले ही निश्चिन्त रह सकते है; उनका स्मरण न तो
पीड़ा दूर होना असंभव है.
८.
अरवाली अंदणन ताल सेरन्तारक्कल्लाल
पिरवाली नीत्तल अरितु।
वे ही सुखी और धनी हैं जो धर्माधिकारी ईश्वर के स्मरण में जीते हैं.
उनका ही जीवन बनेगा सार्थक। दूसरोंको आर्थिक और अन्य सुख नहीं मिलेगा.
९.
कोलिल पोरियिन गुणमिलवे एण गुणत्तान
तालै वनंगात तलै।
पंचेन्द्रिय काम नहीं करता तो जो बुरी दशा सिर को होगी.
वैसी ही दशा उनकी होगी जो ईश्वर का ध्यान नहीं करता।
१०.
पिरविप्पेरुंगडल निन्तुवर नींतार
इरैवण आदि सेरातार।
जो ईश्वर के चरणों में शरणार्थी बनते हैं ,उनका जन्म ही सार्थक होगा.
वे सांसारिक सागर पार करने में विजयी होंगे. अन्य नहीं पार कर सकते.
संसार की प्रमुख भाषा में हो चुका है.
अपनी अपनी शैली में
कर चुके हैं।
मैं भी अपनी शैली में
लिखने की कोशिश कर रहा हूँ.
संसार की प्रमुख भाषा में हो चुका है.
अपनी अपनी शैली में
कर चुके हैं।
मैं भी अपनी शैली में
लिखने की कोशिश कर रहा हूँ.
संसार की प्रमुख भाषा में हो चुका है.
अपनी अपनी शैली में
कर चुके हैं।
मैं भी अपनी शैली में
लिखने की कोशिश कर रहा हूँ.
Tuesday, January 12, 2016
तिरुक्कुरल --1 to 6-- praarthnaa प्रार्थना
संसार की प्रमुख भाषा में हो चुका है.
अपनी अपनी शैली में
कर चुके हैं।
मैं भी अपनी शैली में
लिखने की कोशिश कर रहा हूँ.
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अपनी अपनी शैली में
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मैं भी अपनी शैली में
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मैं भी अपनी शैली में
लिखने की कोशिश कर रहा हूँ.
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अपनी अपनी शैली में
कर चुके हैं।
मैं भी अपनी शैली में
लिखने की कोशिश कर रहा हूँ.
५. बिना बरसे बिगाड़ेगी वर्षा जन जीवन को; यो ही बरसकर सुखीबनायेगी वर्षा।
६.. वर्षा की बूँदें आसमान से न गिरेंगी तो घास तक न पनपेगा ; न होगी हरियाली।
७. मेघ समुन्दर के पानी लेकर भाप बनाकर न बरसेगा तो समुद्र भी सूख जाएगा।
८. वर्षा न होगी तो ईश्वर की पूजा आराधना ,मेला उत्सव ,दैनिक पूजा पाठ सब बंद हो जाएंगे.
९. वर्षा न होगीतो संसार में दान -धर्म काम भी न चलेगा।
१०. बड़े बादशाह हो अर्थात सम्राट हो ,जितना भी महान हो ,पर वर्षा न होने पर जीना दुश्वार हो जाएगा। अनुशासन न रहेगा। सभी दुष्कर्म होने लगेगा।
तिरुक्कुरल ---२. वान चिरप्पु ---वर्षा की विशेषता।
५. बिना बरसे बिगाड़ेगी वर्षा जन जीवन को; यो ही बरसकर सुखीबनायेगी वर्षा।
६.. वर्षा की बूँदें आसमान से न गिरेंगी तो घास तक न पनपेगा ; न होगी हरियाली।
७. मेघ समुन्दर के पानी लेकर भाप बनाकर न बरसेगा तो समुद्र भी सूख जाएगा।
८. वर्षा न होगी तो ईश्वर की पूजा आराधना ,मेला उत्सव ,दैनिक पूजा पाठ सब बंद हो जाएंगे.
९. वर्षा न होगीतो संसार में दान -धर्म काम भी न चलेगा।
१०. बड़े बादशाह हो अर्थात सम्राट हो ,जितना भी महान हो ,पर वर्षा न होने पर जीना दुश्वार हो जाएगा। अनुशासन न रहेगा। सभी दुष्कर्म होने लगेगा।
Monday, January 11, 2016
मन में कुछ नहीं
मन मानता है या नहीं
अपनों के लिए
अपने खून के रिश्तों केलिए
अपनी दोस्ती निभाने के लिए
अपने प्यार के लिए
अपने स्वार्थ साधनके लिए
मानव भले बुरे कार्य में लग जाते हैं
भले अनुयायी भले मार्ग के प्रचार में।
बुरे अनुयायी बुराई के प्रचार में
ऐसे भी है कुछ पिछलग्गु
भले बुरे के मिश्रित प्रचार में।
तीसरों के कारण बनता बिगडता संसार।
निराला
भारत निराली
भारतीय ता निराली
भारतीय भाषा भेद निराले
भारतीय आध्यात्मिक सिदःधांत निराले।
भारतीय भक्ति धारा निराली।
भारतीय पतिव्रतता निराली।
जवहर व्रत सति प्रथा निराली।
वेद गीता उपनिषद ग्रंथ निराले।
दिगंबर महावीर निराले।
राजा के मन पसंद राजकुमारी लाने
मरने वाले वीरों का त्याग निराले।
धन को तुच्छ समझने के साधु संग निराले।
आचार्यो के आश्रम में स्वरण सिंहासन निराले।
हमारी तो बातें ही निराली।
ईश्वरों के सहस्र नाम निराले।
जाति '-धर्म.संप्रदाय भेद निराले
भक्तों के विभिन्न तिलक निराले।
मंदिर निराले, मंदिरों के निर्माण निराले।
ईवशवरीय आभूषण निराले।
सभी बातें निराली।
विदेशी पूँजी भारतीयों की बाते ंनिराली।