Search This Blog

Monday, December 22, 2014

कृषक दिवस




आज  जग किसान दिवस ,
 ज़रा सोचना गहराई से,

संसार में भारत ही  प्राकृतिक
भूमि सम्पन्न.

खेती  प्रधान देश हमारा.

मौसम है खेती करने लायक.

धन के लिए खेती नष्टकर ,
कारखाना खोलना कहाँ  तक सार्थक.

समृद्ध भूमि ,खेती करने योग्य भूमि,

इसको  अयोग्य बनाकर ,
विदेशों के धंधों के लिए
देश में उनका निमंत्रण कहाँ तक
 बुद्दिमत्ता पूर्ण है.

लाल बहादुर शास्त्री  नारा देकर  गए --
जय -जवान ,जय किसान.
गरम-राज्य  का महत्ता बताकर गए मोहनदास जी.
हम भूल ,जो धंधा हम जानते हैं
उन्हें छोड़ विदेशी पेय के कारखाने ,
विदेशी को मेक इण्डिया के लिए बुला रहे हैं.
हाथ का मक्खन छोड़
घी के लिए विदेशी का मोहताज ;
भारत की समृद्ध भूमि को बंजर बनाना

नदियों का राष्ट्रीय करण करना

मोदी जी का प्रधान कर्म.
 जग में ऐसा देश नहीं ,जहां
सभी प्रकार के अन्ना -फल उगा सके.
अमेरिका में सब खेती बंद ;
न  वहां दवादारू इमली -नीम .
पेड़  तो ऊँचे -ऊँचे ,आज एक पत्ता नहीं,
भारत में तो देखिये ,हरे -भरे पेड़ ,
एक को पतझड़ है तो दूसरा हरा-भरा.
मौसमी फल,मौसमी सब्जियां ,
जडी-बूटियों की कमी नहीं.

आज मोदीजी को मेक इंडिया विदेशियों को
छोड़ ,भारतीय किसानों को प्रोत्साहित करना है;
नदियों  को मिलाकर राष्ट्रीय नदी-जल योजना सपना का
साकार बनना है; छोड़ विदेशी पूँजी,
भारतीयों को पूंजीपति बनाना है.
जय किसान के नारे को
प्राथमिकता देनी है.
कृषी प्रधान देश को औद्योगीकरण करना
सुदर्शन की कहानी
चैन नगर के चार बेकार के समान.
सोचिये भारतीयों!एक साथ मिलकर नारा लगाइए -
जय जवान -जयकिसान.
नदियोंके  राष्ट्रीयकरण पर.
जग कृषक दिवस पर भारत सरकार का ध्यान
भविष्य में भारत अकाल पीड़ित न हो.

अजीबो -गरीब

संसार है अजीबो -गरीब 
कोई भगवान के नाम लेकर 
नंगा घूमता है  तो 
कोई भगवान के नाम लेकर 
दान-धर्म -कर्म -यज्ञ-काण्ड के 
रूप में करोडपति बनता है.
कोयीभागावान के नाम केवल 
लूटने -लुटाने लेता है.
कोई देश की इज्जत केलिए 
जान न्योछावर करता है तो
कोई देश-द्रोही बन खुद नष्ट हो जाता है.
कोई देश-की सेवा के नाम  ठगकर 
सुख -भोगी मालामाल बनता है;
कोई भाषा के नाम लड़ता-लड़ाता-लडवाता है तो 
कोई धर्म -जाती के नाम .
शिक्षालय -देवालय में भी 
त्याग कम ,भोग ज्यादा दीख पड़ता है.
जो भी जैसा भी हो  मिट्ठी में मिलता है.
मिट्टी का भार बढाता है ;
अंत में मिट्टी में मिल जाता  है.
यह तो  संसार अजीबो गरीब .
अंत जानकर भी 
भव-सागर पार करने भटकता रहता है.

Sunday, December 21, 2014

दो मिनट सोचो!आगे ऐसा मत करो.


सुनो हिन्दू भाइयों बहनों 
,

यदि तू हिन्दू शक्ति चाहते हो तो 

निम्न चित्रांकित अपानित ईश्वर 

छिन्न-भिन्न अंक मत दर्शाओ.

यदि हिदू शक्ति एकता चाहते हो तो 

ईश्वर का सम्मान करो;

इन बेकार फेंके रुपयों को
दीन -दुखी गरीबों के उद्धार में 

दिल से लगाओ.

सोचो!निम्न दृश्य की दुर्दशा के लिए 

लाखों रूपये  करते हो बेकार.

यह तो दिली की बात.

समझो!वास्तव में तेरे इस 

अपमानित ईश्वर करेंगे क्या कृपा.

दो मिनट सोचो!आगे ऐसा मत करो.

दिल की बात



Discussion  -  21:27
दिल की बात कहूँ ,

सहमी सी बात ,
शर्मीली बात 
गूढ़ बात या ,
मूढ़ बात  या 
लुटी बात  या 
लूटी बात या 
छूटी बात या 
छूती बात या 
अछूती बात या 
इच्छित बात या 
अनिच्छित बात 
उडी बात या
उठी बात  या 
सही बात  या 
सजी बात .
जो भी कहूँ 
is बूढ़े की बात 
सुनता कौन.?
फिर भी सुनायी आदर्श बात 
दोहराना हो गया आवश्यक.
निर्ममता से काम मत कर.
ममता भरी मानवता भरी 
कर्म कर ;बात कर.
माया छोड़ ;
धन जोड़ ;
निर्धनी की बात 
दरबार में शोभित होती नहीं;
गुणी की बात उसके अंत के बाद.
नैतिक पथ  की बात 
मानसिक शाति देती.
दिल की बात मेरी ,
वर्षों पुरानी;
फिर भी अवाश्यक है 
जीवन निराली.

Saturday, December 13, 2014

तरंगित मन


तरंगित  मन



सुंदरता में  मन है तरंगित.


तरंगों में लय  भी हैं ,
जवार -भाटा  भी.

कोई उतरता है   तो

किनारे पर लग जाता है.

कोई -कोई  लहरों  की खींच में
एक दम  डूब  जाता है तो
कोई कहीं फेंका जाता है.
फेंके जाने  की जगह के मुताबिक़
उसका सर ऊंचा होता है  नहीं तो
झुक  जाता है.


prem. प्रेम भरी दुनिया ,


  प्रेम भरी दुनिया ,
प्रेम में प्रेरित ,
प्रेम में पुलकित 
प्रेम में प्रमाणित 
प्रेम में मिश्रित 
पल्लवित दुनिया. 
पर ये प्रेम व्यक्तिगत हो तो 
संसार है सनकी. 
सार्वजनिक हो तो मानकी /
दृष्टिगत हो तो वैयक्ति,
शारीरिक हो तो कामुकता। 
ईश्वरगत हो तो आध्यात्मिकता। 
स्वार्थ होतो  भोगी ;
परार्थ हो साधू ;

Thursday, December 11, 2014

क्या वास्तव में धर्म निरपेक्षता है भारत में ?

जन्म हुआ  मेरा आजादी के बाद.
संविधान का ज्ञात हुआ 
आजादी के चौदह साल के बाद .
नौकरी मिली ,तो क्या देखता हूँ 
पच्चीस साल की उम्र में 
अर्थात आजादी के पच्चीस साल बाद ,
हर तीन महीने छात्र सूची -अध्यापक सूची 
कितने  हरिजन ,कितने दलित ,
कितने पिछड़े ,कितने बहुत पिछड़े 
कितनी परिवर्तित ईस्सायी हरिजन 
भर्ती -नियुक्ति.
किसी की माँग  नहीं वह आमीर  या गरीब.
एक डाक्टर ,एकीन्जनीयर , सब जातियों की 
प्राथमिकता के आधार पर  पाते 
छात्रवृति-सहूलियतें.
भले ही वह पुत्र हो सांसद -विधायक का.
उच्च जातियों के गरीब 
जिनको खाना तक नसीब नहीं 
उनको नहीं सहूलियत या नौकरी की प्राथमिकता.
दुखी  है वे ,इसकी चिंता  नहीं किसीकी !
धन पर धन ,गरीबी पर गरीबी यही है 
क्या धार्मिक समानता.?
मिनोरिटी   अधिकार है ,
मेजारिटी  का  नहीं अधिकार.
कांग्रस और अन्य दल
मिलकर खाते रमजान दावत ,
हिंदू ही हिंदू का अपमान.
तमिलनाडु में गीता का विरोध.
मसलमानों  का समर्थन .
हिंदू भगवानों का जूता मार.
चौराहों  पर ये वाक्य -
नहीं भगवान ,भगवान के नाम लेनेवाला बेवकूफ .
वे  ही खाते  रमजान दावत.
क्या  यही  कांग्रस अन्य दलों का धर्म निरपेक्ष 
ज़रा सोचिये !दिल नहीं खौलता तो 
ये धर्म निरपेक्षता  है 
एक धोखे बाज.