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Monday, December 16, 2019

-सपनों से भरे नैना।


कहानी शीर्षक :--सपनों से भरे नैना।
जब राम बच्चा था ,तब से आध्यात्मिक चमत्कार की बातें सुना करता था.

उसके दिमाग में अष्टसिद्धियाँ पाने की इच्छा के अंकुर फूटने लगे.कालिदास की कहानी सुनकर काली माता का ध्यान करता था. भक्तों को सद्यः वर देने वाले शिव का भक्त बनकर ॐ नमः शिवाय की तपस्या में लगा। सपनों से भरे नैना अष्टसिद्धि की कल्पना ,लघु रू से विराट रूप इस सपने में ही आदर्श भक्त बन गया.उसके मन से लौकिक विचार हट गए, तुलसी दास की कहानी से शारीर सड़नेवाली की बात आदि सुनकर साधू सिद्धपुरुष बन गया.उसको एक दिव्य शक्ति मिल गयी.वह आरादनीय व्यक्ति बन गया.यही आत्मसंयम का हिन्दू धर्म। सपनों से भरे नैना

Sunday, December 15, 2019

ईश्वरीय कानून।

परिवार  दल - कलम की यात्रा।  குடும்பங்கள்.பேனாவின்பயணம்.
नमस्ते। वणक्कम।
வணக்கம்.
சுய சிந்தனையாளர் சுயமாக இயற்றியது.
स्वचिंतक स्वरचित स्वचिंतक यस अनंतकृष्णन।
शीर्षक: सच्चाई। தலைப்பு: உண்மை.

வரம் தா கலைமகளே!
விவாதங்களில் சத்திய த்தின்  வெற்றி.
அசத்தியத்தின் தோல்வி கிட்டட்டும்.

.உண்மையில் மனிதனுக்கு
 துன்பங்கள் ஏன்?
இன்று  உண்மை வெளிப்பட
 ஞானம் கொடு.
உன்னுடைய லீலைகள் மிக நுண்ணியமானது.
ஊழல்வாதிகளின்
செழிப்பான வாழ்க்கை.
லஞ்ச அதிகாரிகளின் 
வாழ்க்கை
ஆணவ ஆட்சியாளர்களின்
 வாழ்க்கை
அறிவுக்கண் பெற்ற மனிதன்
அறிந்து  படிப்பதில்லை.
சிந்திப்பதில்லை.
உண்மையான வாழ்க்கை
சுகமானதே.
இந்தியப் பிரதமர்கள்
அம்மாவும்  மகனும்
புகழத்தக்க ஆட்சி  நடத்தினார்கள்.
இருவரின்  முடிவும்  எதிர்பாராதது.
அவர்கள் ஆட்சியில்
மடிந்தவர்கள் எத்தனை?
தொலைபேசியில் பேசி
வங்கியில்  பணம்.
சான்றளித்து
 நகர்வாலா மரணம்.
காவல் அதிகாரிகள் மரணம்.
அமைச்சர் மிஸ்ரா மரணம்.
பலன் அம்மாவின் புத்திர சோகம்.
அம்ருதசரில் மாநிலக் கட்சி
பொற்கோவிலில் ஆயுதங்கள்.
உண்மை  தெரியவில்லை.
மெய்காப்பாளரால் அம்மாவின்
இரக்கமற்ற  கொலை. மெய்க்காப்பாளர்மரணம்.
உண்மையும்  உன் நுண்ணிய
 லீலைகளும்  புரியவில்லை .
எத்தனை  அதிகாரிகள்
முதுமையில் தன் இளமை
லஞ்சத்தால்
வஞ்சகத்தால்
அல்லல் படுகிறார்கள்.
எத்தனை அதிகாரிகளுக்கு
தசரதன் போல் புத்திர சோகம்.
முதியோர் இல்லத்தில்
துடிக்கும் வாழ்க்கை.
எத்தனை  அரச பரம்பரை
வாரிசுகள் வறுமைக் கோட்டிற்கு கீழ் .
பெற்றோர்களின் நல்ல
தீய கர்மபலன்.
எத்தனை  நடிகைகள்
இறுதி நாட்களில்
நரகவேதனை.
அக்கம் பக்கம் உற்றார் உறவினர்கள்
வாழ்க்கையைப்  படித்தால்
இன்ப- துன்பங்களில்
ஆணிவேர் தெரியும்.
ஏரிகள் மறைகின்றன.
ஆறுகள் மாசுபடுகின்றன.
ஆற்றுமணல் கொள்ளை அடிக்கப்படுகிறது.
ப்ளாஸ்டிக் குப்பை  குன்றாகிறது.
இரக்கமற்ற  பசுவதை.
நாணயமற்ற நடத்தைகள்
இதன் தீய விளைவுகள்
நரகவேதனை வேதனைகள்.
தனியான சுவர்க்கம் நகரம் இல்லை.
இந்த பூமிதான் இந்த  இரண்டுமே.
இந்த  நுண்ணிய தண்டணை
 நீதிதான்இறைவனுடையது.
நரகமும் சுவர்க்கமும்
  தவறுகளால்தான் தான்.
நிகழ் கால தலைமுறையின்
 கர்மபலன்  எதிர்கால
தலைமுறையின்
சுவர்க்க நரக வாழ்க்கை.
தீரும் நோய்கள்  தீரா நோய்கள்.
நோயின் வேதனை.
உண்மையாக யோசித்துப் பாருங்கள்.
தங்கள்  வாழ்க்கை நடைமுறையில்
வெளி ஆடம்பரத்தைத்
தவிர்த்து  விடுங்கள்.
கடவுளின் பெயரால்
நாணயமுள்ளவர்களாக
இருங்கள்.
இதுதான்  பரிசு- தண்டனை  என்ற
கடவுளின்  சட்டம். நீதி.
அனந்தகிருஷ்ணன் மொழிபெயர்ப்பு
மூலம்  ஹிந்தி  கவிஞர்  அனந்தகிருஷ்ணன்.
*************************************

 वर दे वीणा  वादिनी  वर दे।
वाद विवाद  में
 सत्य की विजय।
असत्य की असफलता
मिल जाएँ।
वास्तव  में 
मानव दुखी  क्यों?
आज सच्चाई प्रकट करने का
 ज्ञान दे।
तेरी  लीलाएँ अति सूक्ष्म।
भ्रष्टाचारियों  का संपन्न जीवन
रिश्वतखोर अफसरों का जीवन।
अहंकारी  शासकों  का जीवन।
ज्ञान चक्षु प्राप्त मनुष्य 
अध्ययन
करता ही नहीं,
सोचता भी नहीं।
सुखी जीवन सच्चाई  में।
 भारत  के प्रधानमंत्री  माँ और बेटे
दोनों  का शासन प्रशंसनीय रहा।
दोनों  का अंत  अति अप्रत्याशित।
कितने मरे उनके शासन काल में।
फोन द्वारा  बोल पैसे  लिये।
आवाज़ की मिमिक्री ,प्रमाणित किया।
वह नगरवाला, उस केस के अधिकारी
मंत्री  मिश्रा सब एक साथ  मारे गये।
नतीजा  माँ पुत्र शोक । अमृतसर में
प्रांतीय दलों के विकास,मंदिर  में
अस्त्र-शस्त्र  कैसे पहुँचे
सच्चाई का पता नहीं ।
अंग रक्षक ने प्राण  लिये।प्राण दिए।
वास्तविकता तेरे सूक्ष्मता न समझा हम।
पुत्र शोक में  दशरथ जैसे
कितने वृद्ध  अधिकारी
कितने अधिकारियों के पुत्र अल्पायु।
वृद्धाश्रम  में  तडपता जीवन।
करोडों की संपत्ति  कितने राजपरिवार
आजकल  भूखे प्यासे।
कारण
माता पिता के सतकर्म -बद्कर्म फल।
कितनी अभिनेत्रियाँ जीवन के
अंतिम काल में  नरक वेदना।
अडोस पड़ोस  अपने जीवन,
नाते रिश्ते मित्रों  के जीवन का
अध्ययन से पता चलेगा
जीवन की सच्चाइयाँ  और
 दुखों का मूल।
झील  गायब  ,नदी प्रदूषण,
रेत की चोरी ,
प्लास्टिक कूडे
गोवध निर्दय
 बेईमानदार व्यवहार
इन सब का नरक वेदना
दुष्परिणाम
यही धरती पर ।
न अलग स्वर्ग-नरक।
यही सच्चाई
सूक्ष्म दंड  नीति ईश्वर की।
नरक -स्वर्ग  भूलों में ही।
सच्चाई यही भावी पीढी  का
स्वर्ग-नरक
वर्तमान  पीढ़ी  के कर्म पर।
ईश्वरीय  दंड  से धरती  ही स्वर्ग  नरक।
साध्य रोग ,
असाध्य  रोग।
रोग की पीडा,
यकीनन सोचिए।
अपनी जीवन शैली  में
बाह्याडम्बर  को स्थान  न देना।
ईश्वर के नाम लेकर
 ईमानदारी अपनाइए।
यही है पुरस्कार-दंड  का
ईश्वरीय  कानून।
स्वरचित स्वचिंतक यस अनंतकृष्णन।

Friday, December 13, 2019

बेमौसम

नमस्कार। नमस्ते। वणक्कम।
शीर्षक: बेमौसम के ख्याल।
मौसमी फल -फूल सस्ते।

बेमौसमी में महँगे।
मौसमी सर्दी, गर्मी,
वर्षा,वसंत
आनंदप्रद।
बेमौसमी में उल्टा
परिणाम।
ठीक है,
पर बेमौसमी के ख्यालात।
बालकपन में नौकरी।
जवानी में दरिद्रता।
बुढापे में जवान
लडकी से शादी।
जवानी में कुमारी कुमार
अविवाहित ।
बलातकार,
भ्रष्टाचार,
रिश्वत।
अधिकार का दुष्प्रयोग।
ये सब बेमौसमी ख्यालात।
एक संक्रामक रोग।
मानव मन में अकाल।
स्वरचित स्वचिंतक यस अनंतकृष्णन

Thursday, December 12, 2019

आने का बंदीश

नमस्कार। नमस्ते। वणक्कम।
  आने का बंदीश।
उपदेश दिलाने
पाठ सिखाने
स्कूल में  भर्ती  कराने
माता-पिता,
अभिभावक  तैयार।
नौकरी दिलाने,
शादी कराने तक
दायित्व  माता -पिता।
माता पिता के प्रति
पुत्र पुत्रियों का दायित्व  अलग।
निभाने तैयार हो तो सपूत।
निभाने  तैयार  नहीं  तो कुपूत।
पथ दिखाने में  सनातन  धर्म  न चूका।
अंग्रेज़ी  शिक्षण-प्रशिक्षण
इस सनातन प्रवृत्ति  को
मिटाने सनूनद्ध।
स्वरचित स्वचिंतक यस अनंतकृष्णन

Tuesday, December 10, 2019

प्रयत्न/कोशिश/चेष्टा।

नमस्कार। वणक्कम।
संचालक सदस्य नमस्कार। वणक्कम।
संचालक सदस्य संयोजक चाहक
रसिक पाठक सबको नमस्कार।
कलम की यात्रा  का 11-12-19
का शीर्षक--- "कोशिश "

कोशिश  /प्रयत्न/चेष्टा।
कोशिश  करो ।
पता चलेगा  भाग्य बडा है या प्रयत्न।
बडे भाई साहब कहानी,
सदा हाथ में  ग्रंथ।
परीक्षा  में असफल।
बडे भाई साहब की हालत।
छोटा भाई सदा खेलता-कूदता।
वर्ग में अव्वल
 बडे भाई  का सहपाठी बना।।
तिलक नयी पीढी
 भूल गई होगी,
बाल गंगाधर तिलक।
लाल बाल पाल  तीनों
स्वतंत्रता संग्राम  के सेनानी।
याद  दिलाता हूँ,
तभी युवा पीढी
देश  की परतंत्रता
की यातनाएँ याद कलेगी।
याद  होगी।
यह भी एक कोशिश।
युवा  पीढी  के चरित्र गठन में।
लाल लाला लजपतिराय।
बाल गंगाधर तिलक
पाल विपिनचंद्रपाल।
तिलक वर्ग  में कुछ नहीं लिखते।
एक बार अध्यापक ने पूछा-
बिना लिखे चुपचाप बैठे हो?
तुरंत  तिलक ने कहा-लिख लिया।
कहाँ  लिखा।
तिलक ने सिर पर हाथ रख
कहाँ-यहाँ।
अध्यापक आप से बाहर आ गये।
तिलक ने  अध्यापक  ने जो कुछ
लिखाया अक्षरशः बता दिया।
 आवाक रह गये गुरु वर।
 पढने की कोशिश में
भगवान का अनुग्रह चाहिए।
औसत बुद्धिवाले
 मोहनदास करमचंद गाँधी  को
 छात्रवृत्ति मिली।
सौराष्ट्र प्रांत के आरक्षित छात्रवृत्ति।
एक ही छात्र थे गाँधी जी।
ईश्वर का महत्व
अप्रयत्न  छात्रवृत्ति।
विमान चालक राजीव,
अचानक  प्रधान मंत्री।
उनके बडे भाई  का
अकाल मृत्यु।
मानव कोशिश करता रहताहै।
सफलता  की चोटी पर
पहुँचाने वाले  सर्वेश्वर।
सुबुद्धि  कुबुद्धि देनेवाले ईश्वर।
 तमिलनाडु  के प्रसिद्ध मुख्यमंत्री
एम-जी-आर मर गये,
उनकी पत्नी जानकी,
राजनीति  ही न जानती।
घर से बाहर  कभी नहीं  निकली।
राजनीति  भाषण मंच पर न चढी।
पर मुख्य मंत्री की कुर्सी पर बैठी।
लुटेरा वाल्मीकि आदी कवि बना।
पत्नी  के साथ सदा चिपककर रहनेवाले
तुलसीदास हिंदी साहित्य
गगन के चांद बने।
 इन सब को याद दिलाने की कोशिश में
भक्ति धारा संयम सिखाने
ईश्वर ने लिखने की प्रेरणा दी।
कोशिश करना मानव धर्म।
कोशिश  करना  एक राजा ने
मकडी के जाल बुनने से सीखा।
हार कर निराश  बैठे राजा को
आशा बंदी।
कोशिश और सफलता में
ईश्वरानुग्रह  चाहिए।
भक्ति भाव जगाने  की कोशिश में
आज कोशिश की कविता।
भक्ति  चंचलता मिटाती।
भक्ति एकाग्रता देती।
शांत संतोष चित्त
सत्य-अहिंसा-दान-धर्म ,
ईमानदारी  पुण्य के विचार  देता।
 पराजय में  विजय की आशा।
चिकित्सक ऊपर हाथ दिखाकर
अपना हाथ  छोड़  देता।
तब भक्ति ही आशा का मूल।
बचाने की कोशिश में  ध्यान।
सबहिं नचावत राम गोसाई।
स्वरचित स्वचिंतक यस अनंतकृष्णन।शिश "

कोशिश  /प्रयत्न/चेष्टा।
कोशिश  करो ।
पता चलेगा  भाग्य बडा है या प्रयत्न।
बडे भाई साहब कहानी,
सदा हाथ में  ग्रंथ।
परीक्षा  में असफल।
बडे भाई साहब की हालत।
छोटा भाई सदा खेलता-कूदता।
वर्ग में अव्वल
 बडे भाई  का सहपाठी बना।।
तिलक नयी पीढी
 भूल गई होगी,
बाल गंगाधर तिलक।
लाल बाल पाल  तीनों
स्वतंत्रता संग्राम  के सेनानी।
याद  दिलाता हूँ,
तभी युवा पीढी
देश  की परतंत्रता
की यातनाएँ याद कलेगी।
याद  होगी।
यह भी एक कोशिश।
युवा  पीढी  के चरित्र गठन में।
लाल लाला लजपतिराय।
बाल गंगाधर तिलक
पाल विपिनचंद्रपाल।
तिलक वर्ग  में कुछ नहीं लिखते।
एक बार अध्यापक ने पूछा-
बिना लिखे चुपचाप बैठे हो?
तुरंत  तिलक ने कहा-लिख लिया।
कहाँ  लिखा।
तिलक ने सिर पर हाथ रख
कहाँ-यहाँ।
अध्यापक आप से बाहर आ गये।
तिलक ने  अध्यापक  ने जो कुछ
लिखाया अक्षरशः बता दिया।
 आवाक रह गये गुरु वर।
 पढने की कोशिश में
भगवान का अनुग्रह चाहिए।
औसत बुद्धिवाले
 मोहनदास करमचंद गाँधी  को
 छात्रवृत्ति मिली।
सौराष्ट्र प्रांत के आरक्षित छात्रवृत्ति।
एक ही छात्र थे गाँधी जी।
ईश्वर का महत्व
अप्रयत्न  छात्रवृत्ति।
विमान चालक राजीव,
अचानक  प्रधान मंत्री।
उनके बडे भाई  का
अकाल मृत्यु।
मानव कोशिश करता रहताहै।
सफलता  की चोटी पर
पहुँचाने वाले  सर्वेश्वर।
सुबुद्धि  कुबुद्धि देनेवाले ईश्वर।
 तमिलनाडु  के प्रसिद्ध मुख्यमंत्री
एम-जी-आर मर गये,
उनकी पत्नी जानकी,
राजनीति  ही न जानती।
घर से बाहर  कभी नहीं  निकली।
राजनीति  भाषण मंच पर न चढी।
पर मुख्य मंत्री की कुर्सी पर बैठी।
लुटेरा वाल्मीकि आदी कवि बना।
पत्नी  के साथ सदा चिपककर रहनेवाले
तुलसीदास हिंदी साहित्य
गगन के चांद बने।
 इन सब को याद दिलाने की कोशिश में
भक्ति धारा संयम सिखाने
ईश्वर ने लिखने की प्रेरणा दी।
कोशिश करना मानव धर्म।
कोशिश  करना  एक राजा ने
मकडी के जाल बुनने से सीखा।
हार कर निराश  बैठे राजा को
आशा बंदी।
कोशिश और सफलता में
ईश्वरानुग्रह  चाहिए।
भक्ति भाव जगाने  की कोशिश में
आज कोशिश की कविता।
भक्ति  चंचलता मिटाती।
भक्ति एकाग्रता देती।
शांत संतोष चित्त
सत्य-अहिंसा-दान-धर्म ,
ईमानदारी  पुण्य के विचार  देता।
 पराजय में  विजय की आशा।
चिकित्सक ऊपर हाथ दिखाकर
अपना हाथ  छोड़  देता।
तब भक्ति ही आशा का मूल।
बचाने की कोशिश में  ध्यान।
सबहिं नचावत राम गोसाई।
स्वरचित स्वचिंतक यस अनंतकृष्णन।

Sunday, December 8, 2019

निशाचर

नमस्कार  परिवार दल के मित्रों।
नमस्कार।
शीर्षक  रात -रजनी।
निम्न  पर्यायवाची  शब्द।

रजनी  रात | निशा | निशि | तमा | रात्रि | अमाँ | अमावस्या | कादंबरी | क्षपा | क्षणदा | तमस्विनी | तमिस्रा | त्रियामा | दोषा | निशीथ | निशीथिनी | यामिनी | राका | रैन | विभावरी | शर्वरी |
  2,30 बजे सबेरे सोमवार।
  नींद टूटी। वणक्कम।
शीर्षक  देखा-- रात रजनी।
समानार्थी दो शब्द।
रात सोने का समय।
तमा अंधकार।
नवदंपतियों को नींद कहाँ ?!
वंश वृद्धि  का ईश्वरीय देन।
कामेच्छा। कामाक्षी।
कामेश्वर।कामेश्वरी।
रात आधी रात  भारत का
भाग्य  खुला।
न जाने कितने
आजादी  का आनंद  मनाया।
कितने जागे, कितने उछले।
कितने स्वार्थ  में  सोये।
करोडों  सत्याग्रहियों के
कठोर परिश्रम।
कारावास  का कठोरतम दंड।
कइयों ने प्राण त्यागे।
कइयों ने तन सुख त्यागा।
पद त्यागा।धन त्यागा।
मन में भावी भारत वासियों की चिंता।
गुलामी-बेगारी भगाने  की चिंता।
उनका सपना आधी रात में साकार।
पर जो स्वार्थ थे:कामांध थे।
अपने  अपने सुख में  भग्न नग्न  नींद में।
दिन में जागे पद अधिकार में
ये ही शासक बने।भ्रष्टाचार  बढा।
आदर्श त्यागी दिन में  सो गये।
स्वार्थ   जाग गये।खान वंशज बनिया बना।
ठेकेदार बने। आधी रात जो  जाग
आनंद  मना रहे थे, सो गये।
 वतन की तरक्की  में  कुछ लोग,
अपनी तरक्की  में  कुछ लोग।
भारतीय  भाषा भूल गये।
भारतीय कला भूल गये।
जितेंद्रियता भूल गये।
 बिना अंग्रेज़ के दिवा नहीं
 के प्रचार में लगे।
परिणाम  तमा।तम छा गये।
बलातकार प्यार मनमाना।
बदमाश  नायक बन जाता  है।
शासक पुलिस अधिकारी खलनायक।
यही माया छायापट चित्र कथा।
न्यायधीश  अवकाश के बाद
खुल्लम-खुल्ला ऐलान  करता है
न्यायालय के  न्यायधीश को
 स्वतंत्रता नहीं ।
 पता नहीं,आजादी के बाद
हम रात में  है या दिन  में।
रात के पर्यायवाची शब्द  में
निशा में  चर जोड़  देखा तो
देश में  निशाचर नशाचर चोर डाकू
बलातकारी बढ  रहे हैं।
फिर भी देश तरक्की  के शिखर पर।
सबहिं नचावत राम गोसाई।
स्वरचित स्वचिंतक यस अनंतकृष्णन

Saturday, December 7, 2019

दुष्कर्म का अंत

मंच को प्रणाम।
वणक्कम।
 दुष्कर्मियों को  वध ही प्रधान।
शिव का काम वर देना।
विष्णु  का काम वध करना।
वध करने का काम ही
अत्याचार कर्मियों  का अंत।
भस्मासुर  को शिव ने वर दिया।
कौन सा वर अतिकर्ण कठोर।
निर्यात की चरम सीमा पर।
जिसके सिर पर वह हाथ रखता।
उसके सिर फट बिखर जाना।
भगवान ने वर दिया।
लोक संचारी नारद ने
विश्व कल्याण  के लिए
भस्मासुर  से कहा-
वर के सत्यापन  की जाँच
शिव के सिर पर हाथ  रख देख।
भस्मासुर शिव के सर पर हाथ रखने
शिव डरकर भागने लगा तो
वह असुर छोडने तैयार  नहीं ।
विष्णु  ने  लिया मोहिनी अवतार।
असुर ने शादी की इच्छा प्रकट की।
विष्णु  ने कहा मेरे जैसे नाचो।
तुरत करूँगी शादी।
नाचते-गाते नाचते-गाते सर पर हाथ रखा
तो असुर  ने  भी हाथ रखा।
असुर का सर चकनाचूर।
अत्याचार  बलात्कारी वर लेकर  आते हैं
अतः भ्रष्टाचार  ही बनजाते
सांसद। वैधानिक ।
वर देते जनता।
उनके अत्याचार अंत करने
 युगावतार का अंत चाहिए।
वध ही सही अतः
 मुगल दंड नीति बेहतर।
आँख तक मारने न होगा साहस।

स्वरचित स्वचिंतक यस अनंतकृष्णन।