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Wednesday, December 24, 2025

आधुनिक नारी

 आपकी कविता से

‌प्रेरित यथार्थता।

गलत न समझना

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आधुनिक नारी पुरुष 

++++++++++++


स्त्री और देह

जवानी में भी 

 मैंने नहीं सोचा।

बेचारी मेरी पत्नी,

 भारतीय संस्कार की रानी

मेरे बारे में क्या सोचती होगी।

 फिर भी मेरी भला चाहती।

  ममता भरी , सेवा भरी

 त्याग भरी नारियाँ।

 आज देखना दुर्बल।

 उर्मिला नलायिनि दमयंती

की कहानियां नारियों की वेदनाएँ,

 खुद दंड देने लगी है

 आधुनिक युवकों को।

 वह अब कठपुतली बन गया,

नारियों का।

  पंद्रह साल की उम्र में 

 शादी 

वह पौरुष आनंद 

 हमारे पूर्वजों का ज्ञान।

 जीवन पर्यन्त दांपत्य 

 त्याग मय सुखी जीवन।

 संतानोत्पत्ति का यंत्र।

 हर साल एक बच्चा।

 फिर भी प्रसव वैराग्य भूल जाती।

 कम से कम पाँच पुत्र।

 गांधारी के सौ पुत्र।

 आधुनिक शिक्षित

 स्नातक स्नातकोत्तर में जमाना।

विवाह के तीन चार महीने में तलाक।

 नारी को तो जल्दी शादी हो जाती।

 पुरुष बेचारा, 

 अकेला , गुमसुम।

 पाश्चात्य संस्कृति 

 संयम खोना,

 ऋष्यश्रुंग  जैसा

 ब्रह्मचर्य की सीख नहीं।

 कमज़ोरी अवस्था में 

 पच्चीस तीस साल में 

 शादी। असंतोषी जीवन।

 भारतीय  धर्म की

 शादी व्यवस्था।

 पच्चीस साल में  पंद्रह बच्चे।

 अब  निःसंतान दंपति

  तीस साल की उम्र में 

‌डाक्टर के द्वारा संतान प्राप्त करने

‌विचित्रवीर्य सा

 पांडु सा  शुक्ल दान की प्रतीक्षा में।

 आधुनिक नारी सबला,

 आधुनिक पुरुष अबल।

अवैध संबंध की ताज़ी कहानियां, खून कत्ल तलाक।

 अब सोचता हूँ,

प्रेम की ताकत।

 औरत की चंचलता 

 रहीम का दोहा

 पर प्रसिद्ध दोहा है: "कमला थिर न रहीम कहि, यह जानत सब कोय। पुरूष पुरातन की वधू, क्यों न चंचला होय।"

अरावली

 अरावली की गूँज।

एस.अनंत कृष्णन चेन्नई 

++++++++++++++

 मैं हूं अरावली पर्वतमाला,

अति प्राचीन,

 हिमालय से प्राचीन।

गंगा के पूर्व  की नदियों 

 को उत्पन्न करनेवाली।

 जीवोत्पत्ति का पहाड़।

 स्वार्थ मानव की कुदृष्टि  पड़ी।

परिणाम दिल्ली तक मेरी

 मालाओं का अधिक अंश

चूर्ण, जलस्रोत मैं 

 अति मेधावी मानव 

 प्रलाप कर रहा है

 धूल धूसरित  उष्णता भरी दिल्ली और मेरे 

 आस पास के क्षेत्र।

प्रकृति संतुलन बिगाड़नेवाला 

 मनुष्य दुख ही दुख झेलेगा जरूर।

 मरुभूमि को 

समृद्ध बनानेवाले 

 जमाने में 

जीवनदियों को 

 मरुस्थल बनानेवाले 

प्रदूषित करनेवाले 

 मानव की बुद्धि धिक्कार।

मैं हूँ अरावली पर्वत माला।

 मेरी आवाज़ गूँजेंगी

 प्राकृतिक क्रोध देखकर।


एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

Monday, December 22, 2025

सुकून / मन।

 तमिल हिंदी सेवा 

தமிழ் ஹிந்தி பணி

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सुकून की तलाश में  அமைதியைத் தேடி.

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 

22-12-25.

 सुकून की तलाश में  = அமைதியைத் தேடி

 शांति की खोज में  --சாந்தியைத் தேடி 

 ऋषि-मुनियों ने जंगल में  ரிஷி முனிவர்கள் 

गुफाओं में एकांत में  குகைகளில் தனிமையில் 

तपस्या की, தவம் செய்தனர்.

 ज्ञान की बातें सिखाई।

ஞானம் பொருள்களைப் பேசினர்.

 वेद, उपनिषद की रचना की।

வேதங்கள் உபநிடதங்கள் படைத்தனர்.

 लोगों को सत्य मार्ग दिखाया।

மக்களுக்கு மெய்வழி காட்டினர்.

 संयम सिखाया। புலனடக்கம் கற்பித்தனர்

ध्यान सिखाया , தியானம்  கற்பித்தனர்.

 योग सिखाया। யோகம் கற்பித்தார்.

धर्म सिखाया। அறம் கற்பித்தனர்.

 मानवता सिखायी। மனித நேயம் கற்பித்தனர்.

 अद्वैत, द्वैत, विशिष्टाद्वैत

அத்வைதம் த்வைத்வம் விசிஷ்டாத்வைதம்  

 के मार्ग दिखाये। வழிகாட்டினர்.

 बगैर एक पैसे के खर्च के

ஒரு நயாபைசா செலவின்றி

 दिव्य शक्ति पाने का मार्ग दिखाया।

தெய்வ சக்தி பெறும் வழி காட்டினர்.

 सिद्धार्थ राजकुमार,

சித்தார்த்தர் அரசகுமாரர்

 राज सुख तजकर,

அரசாங்க சுகம் விட்டு 

 ज्ञान प्राप्त कर एशिया का ज्योति बना।

ஞானம் பெற்று ஆசியஜ்யோதிஆனார்.

 सत्य अहिंसा का मार्ग दिखाया।

சத்தியஅஹிம்சை வழிகாட்டினர்

 महावीर बड़े त्यागी 

மாவீரர் பெரிய தியாகி

 वस्त्र तक तजकर‌

ஆடையும் துறந்த

 जीवकारुण्य का मार्ग

ஜீவகாருண்ய வழி 

 दिखाकर காட்டி 

 जिओ और जीने दो का मार्ग दिखाया।

வாழ்க வாழவிடுஎன்ற வழிகாட்டினார்.

हज़रत मुहम्मद ने एकांत 

ஹஜ்ரத் முகம்மது தனிமையில் 

 हीरा गुफा  में 

 ஹீரா குகையில் 

 खुदा का पैगाम।

 கடவுளின் செய்தி

 लड़ाई झगडे खून बहाये

 சண்டை சச்சரவு கொலை

 समाज में शांति की स्थापना की।

சமுதாயத்தில் அமைதி நிலை நாட்டினார்.

 बिना बाह्याडंबर, बिना खर्च किये।

 வெளி ஆடம்பரம்

செலவு இன்றி.

 आधुनिक पाश्चात्य सभ्यता ने

நவீன மேற்கத்திய நாகரீகம்

 मधुशाला वह खोलकर 

மதுக்கடை திறந்து 

 परिवार की शांति भंग किया।

குடும்ப அமைதியைக் கெடுத்தது‌

आमदनी को मधुशाला में खोकर 

வருமானத்திற்காக மதுக்கடை திறந்து 

 मानव को ग़रीबी के गड्ढे में 

மனிதனை ஏழ்மை பள்ளத்தில்

 गिरा दिया है।

 வீழ வைத்தது.

ज़रा सोचिए ,

சற்றே சிந்தியுங்கள்.

 सुकून का मार्ग 

அமைதியின் வழி

 मधुशाला, वेश्यागमन नहीं, 

மதுக்கடை தாசிவீடு செல்வதல்ல.

जिनके कारण आर्थिक घाटा,

அதன் காரணமாக பொருளாதார பட்டம்.

 बेचैनी। அமைதியின்மை

 सोचिए  சிந்தியுங்கள் 

शांति का मार्ग है क्या है?

அமைதி வழி என்ன?

आध्यात्मिक भूमि ही शांति/चैन/ सुकून का मार्ग हैं।

ஆன்மீக பூமி தான் அமைதி/அமைதி/அமைதி.

 या அல்லது 

 मधुशाला, अश्लील गाने नाच अस्थाई ,

மதுக்கடை ஆபாச பாட்டு நடனம்.

தற்காலிகமே.

ज्ञान चक्षु प्राप्त मानव 

அறிவுக்கண் பெற்ற மனிதனே!

 सोचो, विचारो,

சிந்திக்க. எண்ணி.

 अपनाओ।

தனதாக்கிக் கொள்க.



 शांति की तलाश का मार्ग 

அமைதியைத் தேடும் வழி

 जप-तप -ध्यान प्राणायाम आदि।

ஜபம் தவம் தியானம் முதலியவை.

स्वास्थ्य रक्षक, धन रक्षक, शांति प्रद जान।

ஆரோக்ய பாதுகாவலன் 

செல்வ பாதுகாவலன்

அமைதி கொடுப்பவை தெரிந்து கொள்ள.


 आधुनिक शांति का मार्ग मिथ्या , खर्चीला ।

நவீன அமைதி வழி பொய்யானது 

செலவு மிக்கது.

 अस्थाई ,सुध बुध खोकर 

தற்காலிகமானது

 தன் அறிவை இழக்கச் செய்வது

 सड़क पर गिरानेवाली।

சாலையில் விழவைப்பது 

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

 இனிய காலை

 வணக்கம்.

मधुर सुप्रभात।

வழி பட வழிபட

प्रार्थना करते करते 

 வலி போய்

दुख मिटकर 

உலகியல்

लौकिकता 

 மறந்து 

भूलकर 

 உண்மை

सच्चाई 

 அறிந்து 

जानकर 

 உலகம் பொய்.

जगतमिथ्या

 உலகநாதன்

जगन्नाथ 

 மெய்.

सत्य 

ஞானம்

ज्ञान का

 பிறந்தது.

जन्म हुआ।

 சாந்தி शांति தவழ்ந்தது 

घुटने के बल  आयी।

இருப்பினும்

फिर भी

 மனித மனம்

मनुष्य मन 

 முற்றிலும்

बिल्कुल 

 வெற்றிடமாக रिक्त

 வில்லை. नहीं।

Sunday, December 21, 2025

शांति की खोज

 सुकून की तलाश में 

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 

22-12-25.

 सुकून की तलाश में 

 शांति की खोज में 

 ऋषि-मुनियों ने जंगल में 

गुफाओं में एकांत में 

तपस्या की,

 ज्ञान की बातें सिखाई।

 वेद, उपनिषद की रचना की।

 लोगों को सत्य मार्ग दिखाया।

 संयम सिखाया।

ध्यान सिखाया ,

 योग सिखाया।

धर्म सिखाया।

 मानवता सिखायी।

 अद्वैत, द्वैत, विशिष्टाद्वैत 

 के मार्ग दिखाये।

 बगैर एक पैसे के खर्च के

 दिव्य शक्ति पाने का मार्ग दिखाया।

 सिद्धार्थ राजकुमार,

 राज सुख तजकर,

 ज्ञान प्राप्त कर एशिया का ज्योति बना।

 सत्य अहिंसा का मार्ग दिखाया।

 महावीर बड़े त्यागी 

 वस्त्र तक तजकर‌

 जीवकारुण्य का मार्ग

 दिखाकर जिओ और जीने दो का मार्ग दिखाया।

हज़रत मुहम्मद ने एकांत 

 हीरा गुफा  में 

 खुदा का पैगाम।

 लड़ाई झगडे खून बहाये

 समाज में शांति की स्थापना की।

 बिना बाह्याडंबर, बिना खर्च किये।

 आधुनिक पाश्चात्य सभ्यता ने

 मधुशाला वह खोलकर 

 परिवार की शांति भंग किया।

आमदनी को मधुशाला में खोकर 

 मानव को ग़रीबी के गड्ढे में  गिरा दिया है।

ज़रा सोचिए ,

 सुकून का मार्ग 

 मधुशाला, वेश्यागमन नहीं, जिनके कारण आर्थिक घाटा,

 बेचैनी।

 सोचिए 

शांति का मार्ग है क्या है?

आध्यात्मिक भूमि ही शांति/चैन/ सुकून का मार्ग हैं।

 या मधुशाला, अश्लील गाने नाच अस्थाई ,

ज्ञान चक्षु प्राप्त मानव 

 सोचो, विचारो,

 अपनाओ।

 शांति की तलाश का मार्ग 

 जप-तप-ध्यान प्राणायाम आदि।

स्वास्थ्य रक्षक, धन रक्षक, शांति प्रद जान।

 आधुनिक शांति का मार्ग मिथ्या , खर्चीला ।

 अस्थाई ,सुध बुध खोकर 

 सड़क पर गिरानेवाली।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

Thursday, December 18, 2025

परोपकार

 परोपकार 

एस., अनंत कृष्णन, चेन्नई 

19-12-25.

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बार बार एक ही शीर्षक

 परोपकार।

 प्रकृति ही निस्वार्थ 

 परोपफारी,

 ईश्वर की सृष्टि।

 नदी,सागर, पृथ्वी,

पंचतत्व 

 हवा, पानी, अग्नि, पृथ्वी, आकाश।

ये अपना कर्तव्य

निस्वार्थ रूप में करते हैं।

मानव ज्ञानी पर

 स्वार्थ हेतु

 इन सबको प्रदूषित कर रहा है।

मनुष्य में निस्वार्थ कोई नहीं।

  उसमें संयम् नहीं,

भगवान के नाम लेकर 

ठगता है मानव।

 रामावतार में 

 कृष्णावतार में 

आधुनिक वैज्ञानिक युग में 

नश्वर संसार जानकर भी

अहंकार वश अन्याय करता है मानव।

 शिक्षा उच्च शिक्षा ज्ञान।

 क्या प्रयोजन।

 भ्रष्टाचार शासक

 धन के बल पर,

 दंड से बच जाता है।

चार्टर्ड एकाउंटेंट 

 धन के लिए 

 कर से बचने,

 आय कर विभाग को 

 ठगनै झूठा हिसाब 

किताब लिखने 

अमीरों को देता हे शिक्षा।

भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी 

रोकने के विभाग 

 बिल्कुल बेकार।

चुनाव आयोग,

न्यायालय,

जानता है

काले धन का महत्व।

वोट के लिए नोट,

 बदमाशी,

 अल्पसंख्यकों के विजेता 

45%वोट से शासक दल।

वह भी गठबंधन के कारण।

 मतदाता30% वोट नहीं देते।

 विपक्षी दल पाते 25%वोट।

 बैंक में करोड़ों रूपए 

 कर्जा,

 आयकर देने वाले 

अपराधियों को

 जेल में सुविधाएँ,

जेल में अपराधियों को

 नशीली वस्तुएँ।

मंदिर का बाह्याडंबर

 भक्ति नहीं व्यापार।

नकली संन्यासी,

नकली भिखारी 

नकली वस्तुएँ

 मंदिरों के बाहर

भिखारी बनावटी वेश में 

तिरुपति गया तो

जवान स्त्रियाँ

 नन्हें शिशुओं को लेकर भीख।

 ऐसे लोगों को 

भीख देना 

परोपकार नहीं।

तटस्थ जिला देशों का

 तबादला,

दंड।

अंक, उम्र में 

शिथिलता।

आरक्षण नीति।

 इन सबको न रोककर

 अर्थ प्रधान वकील,प्रशासक।

भगवान की सृष्टि में 

 सत्यवान, भक्त संकट मैं।

धनी भ्रष्टाचारी रिश्वतखोरी 

 सुविधा में।

लेखक कवि दरिद्र।

 प्रकाशक धनी ।

ये सब रहित समाज,राष्ट्र

 शासक, प्रशासक

 ही परोपकार।

  बाघ की सृष्टि 

 हिरण की सृष्टि 

 मकड़ी की सृष्टि 

उसके जाल में फँसकर

आहार बननेलाले कीड़े

बिल्ली चूहा।

जिसकी लाठी उसकी भैंस।

 परोपकारी बाघ का आहार  बननेलाले हिरण परोपकारी।

  तटस्थ परोपकारी 

 दधिची ।

 दानवीर कर्ण 

 ये प्राण त्यागी परोपकारी।

परोपकारी वृक्ष,

 उन्हें काटकर 

 बेचनेवाला धनी।

बेरहमी धन प्रधान

 जगत में प्राण रक्षक से

वही मनुष्य है,

जो दूसरों के लिए जिए और मरे।

मरनेवाले दानी। परोपकारी।

Wednesday, December 17, 2025

नदी का यह दुख

 नदी का दुख

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 

17-12-25.

++++++++++++

नदी न संचै नीर।

नदी हूँ मैं,

 अपने लिए कोई बचत नहीं करती।

मेरे बिना जीना दुश्वार।

पशु-पक्षी, वनस्पति जगत 

 मानव समाज का प्यास बुझाती हूँ ,


 मेरे रूप विविध।

 शांत कल कल  बहती हूँ,

 वर्षा काल में बाढ तेज।

 बर्फ़ से पिघलकर जीव नदी के रूप में बहती हूँ।

 फिर भी मानव,

 अति स्वार्थ 

 मेरी स्वतंत्रता में बाधा डालते हैं।

 बाँध बाँधकर रोक देते हैं।

बिजली की उत्पत्ति करते हैं 

हरे भरे खेत, घने जंगल 

  जंगल के बरसाती बाढ़।

 अति खतरा ,निर्दयी बनती हूँ।

 नंदी के किनारे,

सभ्यता का विकास।

 आज मानव 

कारखाना बनाकर 

 उसके अवशेष पानी को

 विषैले पानी को 

 मुझ पर छोड़ देते हैं।

 परिणाम  विविध 

 रोगों के कारण बन जाती हूँ।

 यह मेरे लिए अत्यंत सदमा है।

 इतने पानी प्रदूषित है,

 गंगा का पानी कलंकित।

 खेद की बातें वर्णनातीत हैं,

 पानी के बहने पर भी

 गंगा के किनारे,

 प्यासा आदमी,

मिनरल वाटर बोतल 

खरीदकर पीता है।

कहीं कहीं मेरी चौड़ाई 

 कम कर इमारतें बनाते हैं।

  मैं नदी हूँ, मैं दुखी हूँ

 मानव की स्वार्थता से

 प्रदूषित हूँ,

रेत के लूट के कारण,

 कीचड से भरी बहती हूँ।

 पशू पक्षी भी बीमारी में 

तड़पते हैं।

दुखी हूँ ,

 मेरे प्रकोप  के कारण 

 बाढ के कारण  किसानों के मेहनत कभी कभी 

 नष्ट हो जाती है।

ज्ञान चक्षु प्राप्त मानव के

 धन लोभ, नगर विस्तार,

 नदी  मैं परोपकारी 

 दुखी हूँ,

 परिणाम  दुष्परिणाम।

 दुख झेलना ही पड़ेगा।



 

 


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Sunday, December 14, 2025

आत्मसंतोषी

 आत्मसंतोष 

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई।

15-12-25.

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आत्म संतोष, 

आत्मसुख,

आत्मानंद, 

आत्मज्ञान 

 ये हैं आध्यात्मिक चिंतन।

 लौकिक चिंतन में,

 सत्य का साथ नहीं,

 भक्ति के क्षेत्र में बाह्याडंबर अधिक।

 राजनैतिक क्षेत्र में 

 भ्रष्टाचारी।

 प्रशासनिक और

 न्याय के क्षेत्र में 

लक्ष्मी की चंचलता।

 आत्म संतोष कैसे?

 नश्वर जगत में 

 अनश्वर सत्य,

 अधर्म प्रशासन,

   आतंकवाद 

 ठग, चोर,डाकू,

 पढ़ें लिखे वकील,

 चार्टर्ड एकाउंटेंट 

  व्यापारी,

 सब तटस्थ है तो

 आत्मसंतोष।

 स्वार्थ राजनैतिक 

 हमेशा अपने  असंतोषी,

 विरोधी विचार गठबंधन।

 आत्मसंतोष कैसे?

 रामावतार में राम दुखी।

 कृष्णावतार में कृष्ण दुखी।

  शासक अपने पद,

   अपनी तरक्की,

    षडयंत्र आत्मसंतोष कैसे?

 संसार में अनेक वस्तुएँ,

   जगत मिथ्या, 

   ब्रह्म सत्यं।

परिणाम जगत में 

 आत्म संतोष कैसे?

 चोरी का माल,

  रिश्वत का मार्ग,

 एकांत में नहीं देता,

 आत्मसंतोष।

 बुढापा ही  स्वर्ग- नरक का केंद्र।

 भूलोक में कितने लोग

 शांति पाते हैं, 

संतैषी है? पता नहीं!

   सुपुत्र कुपुत्र की बात।

 व्यापार में लाभ नष्ट।

 भिखारी भी रिश्वत देकर 

 बैठता है मंदिर के सामने।

 मंदिर के इर्द-गिर्द 

 ठगों की दूकानें

 मनमाना दाम।

 दर्शन दो क्षण,

 पेसैवालों के घंटों के दर्शन। 

 रिश्तेदारों की उन्नति,

 ईर्ष्या, क्रोध, लोभ,

 मेरी दृष्टि में आत्मसंतोषी कौन?

 शीरडी साईं चरित्र,

 समाज के दुख दूर करने,

 स्वयं कितने दुखी,

 शारीरिक कष्ट,

 भक्ति के क्षेत्र में 

 भिन्न भगवान,भिन्न सिद्धांत।

 मामा के आराध्य देव अलग।

 दादा,दादी  के आराध्य देव अलग-अलग।

 ज्योतिषी एक ही जन्म कुंडली, प्रायश्चित्त अलग अलग।

  वही आत्मसंतोषी, 

   जिसका मन चंचल नहीं।

 एक ही सिद्धांत,

 धर्माचरण,

 सत्या चरण 

 वैसा कोई दीख न पड़ा।। इतिहास में,पुराण में।

हिरण्यकश्यप, प्रह्लाद,

 दक्ष,शिव ,कंस कृष्णन 

 मंथरा कैकेई राम

 ईश्वर तुल्य लोगों की कथा भी

 राम कहानी अपनी अपनी।

आत्म संतोष नश्वर ब्रह्मांड की खोज में कोई नहीं।।ईसा का शूली पर  चढ़ना,

मुहम्मद का मक्का मदिरा भागना।

आध्यात्मिक क्षेत्र में भी 

 असंतोषी ही ज़्यादा है।