गणतंत्र दिवस
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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई
तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।
26-1-2026
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नाचेंगे
आनंद नर्तन करके,
शहर शहर गाँव-गाँव
मेरा जुलूस मनाएँगे।
हर एक भारतीय का
अपना एक महत्व है,
हर्षोल्लास कोलाहाल से
इस अद्भुत पर्व दिन,
विभिन्न मज़हबी,
त्योहार
अलग -अलग भक्ति,
पर सब मिल जुलकर
सहोदर भाव से
मनाने का राष्ट्रीय त्योहार
यह गणतंत्र दिवस।
विश्व भर के भारतीयों के,
हर्षोल्लास के अपूर्व दिन।
एक स्वर में नारा लगाएँगे,
देश प्रेम, देश भक्ति श्रद्धा से
जय भारत!
जय हिन्द!
वंदे मातरम्!
सारे जग में
यह आनंद नारा
विश्व भर में गूँज उठें।
76 साल बीत गये,
धर्म निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक देश में,
सब को समान अधिकार,
पर यही
खेद की बात है
व्यवहार में,
अल्पसंख्यकों का अत्यधिक सुविधाएँ,
भारत देश में
मजहबी स्वतंत्र,
अल्प संख्यकों को
सब प्रकार की आर्थिक सहायता,
अब 76साल हो गये
अल्पसंख्यकों के
अधिकार को मिटाकर
सब के लिए
समान अधिकार
चाहिए,
कम अंक अधिक आयु
आदि सहूलियतें मिटानी चाहिए।
एक ही परिवार,
सब को छात्रवृत्ति
गरीब उच्च जाति
प्रतिभाशाली होने पर भी
जाति के आधार पर,
छात्रवृत्ति, नियुक्ति
संविधान के समान अधिकार का शाश्वत दाग।
सरकारी दफ्तरों के भ्रष्टाचार
चुनाव में धन का मनमाना प्रयोग।
जिसकी लाठी उसकी भैंस।
न्यायालय के फैसला फैसला है,
लागू में लाना
न्यायाधीश पर कलंक लगाना,
ये जनतंत्र देश में
न्याय नहीं,
धन और बल का अधिकार।
ज़रा खुशी के अवसर पर
संविधान के लिखित रूप
व्यवहार में नहीं।
इसे बदलना होगा।
तभी गणतंत्र का महत्व।
ओट देने में नोट का महत्व
नाश होना चाहिए।
तभी 100% जनतंत्र की
सफलता होगी।
आनंदोल्लास सभी भारतीयों को आनंद देगा।
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