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Wednesday, January 28, 2026

कल्पनाएँ

 कोमल कल्पनाएँ

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

29-1-26

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कोमल कल्पनाएँ,

परिस्थितिवश

 कठोर भी हो जाती है।

सर्वे जना सुखिनो भवन्तु 

 जय जगत

 वसुधैव कुटुंबकम् 

 ये कोमल कल्पनाएँ।

 मंडन मिश्र का तोता

 वेद मंत्र सुनाता।

 डाकू का तोता 

विपरीत।

 भद्रकुल की कलपनाएँ कोमल,

विश्वकल्याण के लिए।

खलनायक, चुनाव लड़नेवालों की कल्पना 

 विपरीत।

करोड़ों के खर्च 

कैसे पाँच साल में 

कमाना शत्रु पक्ष

 को हराने के षडयंत्र 

 कल्पनाएँ।

 साहित्यकार की कल्पना 

 जगतोद्धार के लिए 

उनमें धन लोभी स्वार्थी 

 साहित्यकार समाज बिगाड़ने अश्लील कल्पनाएँ।

 ईमानदारी अधिकारियों की कलपनाएं कोमल

 जनकल्याणकारी।

पर भ्रष्टाचार रिश्वतखोरों की कल्पनाएँ न्याय विरुद्ध।

 रत्नाकर कीकल्पना 

  चोरी डाकू,

वाल्मीकि ने कल्पना 

दिव्य शक्ति भक्ति।

राष्ट्र प्रेमियों की कल्पना 

 आंबी जैसे देश द्रोही की कल्पना कठोर।

 तटस्थ परोपकारी लोगों की कल्पना अलग।

 कर्ण के जैसे।

 दुर्योधन के संग

 कृतज्ञतावश अलग।

 पाश्चात्य देशवासियों की कल्पना जन हित 

आविष्कार। पर

 भारतीय कल्पना 

 जगत मिथ्या,

ब्रह्म सत्यं 

 ईश्वर भक्ति।

 भारतीय सुखी वातावरण 

 भोजन पदार्थ के

 हजारों किस्म।

शांति अहिंसा प्रिय देश।

 अतः कल्पनाएँ कोमल 

 मानव कल्याणकारी।

 सोचिए विचारिए 

 देश कल्याण की कल्पनाएँ।

समाज कल्याण की कल्पनाएँ 

 मातृभाषा रक्षा की कल्पना।

विश्व हित की कल्पनाएँ।

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