नागरी लिपि की कमियों
पर जितना भी ध्यान दें
कमी रहित कहना
नामुमकिन है।
हर भाषा की अपनी ध्वनियाँ हैं,
ज, ज़
तमिल में तीन न है
ண.ந.ன.
ந ன दोनों के लिए
तमिल में न का ही प्रयोग है।
ण --ண.
ट वर्ग का अंतिम अक्षर।
त वर्ग न। ந.
ன र के बाद यह नागरी लिपि में नहीं है।
वैसे ही ल के तीन रूप
ல/ழ/ள.
इसको ल,ऴ,ळ का रूप दिया गया है।
कुछ लोग ऴ ழ को
ष़ लिखते हैं।
इसमें मत भेद है।
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में பழைய தும் புதியதும் को
पष़ैयतुम ही लिखते हैं।
इनका मानक रूप चाहिए।
एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा संदैह निवारण के लिए
लिखित विचार।
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