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Saturday, January 31, 2026

मजदूर

 मजदूर के हाथ।

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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1-2-26

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मैं करोड़ पति हूँ।

 कारखाना खोलना है,

 घर बनवाना है।

 पूँजी मेरे हाथ में।

 मैं इंजीनियर हूँ,

 योजना है

 मैं उद्योग पति हूँ

 मैं सिनेमा निर्देशक हूँ।

पर उपर्युक्त लोगों की योजना लागू करने

 चाहिए मजदूर के हाथ।

 स्वर्ण और हीरे का खान।

 कोयले के खानों का पता लगा है।

 पर इन सब को निकालने

 मजदूर के हाथ।

शहर भर कूड़ा कचरा है

 निकालने  चाहिए 

 मज़दूर के साथ।

 नल की व्यवस्था 

 बिजली की सुविधा 

 सब के लिए चाहिए 

मजदूर के हाथ।

 खेत में बीज बोने

 फसल काटने

 बोरे में बाँधने 

चाहिए 

मजदूर के हाथ।।

 मजदूर नहीं तो

  गड्ढे खोदकर

 बिजली स्तंभ का

 स्थापित करना असंभव।

माली न तो बाग नहीं।

 हर हाल, अस्पताल मंदिर साफ रहना है तो

 चाउ मजदूर के हाथ।

शौचालय सार्वजनिक 

स्थान में 

 साफ़ करने मज़दूर के हाथ।,

 पैसे, बड़े पद, रईश आदि  मजदूर साथ हाथ न देगा तो 

 कुछ न होगा जान।

मजदूर के हाथ मजबूत।

 हर क्षेत्र में मजदूर 

 के साथ न लगने पर

 सारे काम चौपट जान।।












 


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