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Tuesday, January 27, 2026

 आत्मकथा हिंदी सेवा का मूल्य । 

एस. अनंत कृष्णन चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

 

आपके भाव, अनुभव और गर्व को केंद्र में रखकर—सरल, स्पष्ट और सच्चे स्वर में:

मैंने हिंदी को कभी आजीविका का साधन नहीं बनाया, फिर भी हिंदी ने मुझे जीवन में गौरव दिया। धन की दौड़ में जब चारों ओर लोग अंग्रेज़ी को सफलता की कुंजी मान बैठे, तब भी मैंने भारतीय भाषाओं का साथ नहीं छोड़ा। हिंदी के प्रचार के लिए मुझे विरोध सहना पड़ा, अपमान झेलना पड़ा, यहाँ तक कि अपने ही प्रदेश में “द्रोही” कहे जाने का कष्ट भी उठा। परंतु इन सबके बीच मेरा आत्मसम्मान कभी डगमगाया नहीं, क्योंकि मुझे यह विश्वास रहा कि मैं गलत नहीं, अपने दायरे में सही कर रहा हूँ। साहित्य से मिलने वाला पारिश्रमिक भले ही कम रहा हो, पर हिंदी के कारण जो आत्मिक संतोष और पहचान मुझे मिली, वह किसी धनराशि से बड़ी है। आज भी मैं यही मानता हूँ कि हिंदी की सेवा करना मेरे लिए घाटे का सौदा नहीं, बल्कि जीवन का सौभाग्य है—और यही मेरा गर्व है।

[27/01, 9:18 pm] sanantha.50@gmail.com: आप तो गलत समझा रहे हैं।

आपने पहले ही कह दिया 3500/रूपये दूँगी।


मैं तो मान लिया और लिख दिया।

 आपने पैसे भी भेज दिये।

धन्यवाद जी 

++++++++++++

 मुझे मालूम है कि प्रकाशन करना  

 मुश्किल है।

 मैंने लेखकों की बुरी    दशा लिखा है।

 बस इतना ही।

 आप प्रकाशित करेंगे तो

 दो तीन प्रतियाँ भेजिए।

 आपने कहा मेरा नाम भी लिखा जाएगा।

धन्यवाद।

संक्षिप्त रामायण लिखी अनुवाद किया।

 रामायण प्रचार परिशोधन प्रतिष्ठान ने प्रकाशित किया।

 उसमें मूल लेखक डा.विशाल भरद्वाज ट

का नाम 

 और अनुवादक मेरा नाम लिखा है।

 अंतिम पृष्ठ में मेरा परिचय भी।

 वह आध्यात्मिक सेवा बिल्कुल मुफ़्त।

 भगवान देगा तो छप्पर तोड़कर देगा। लेगा तो छप्पर उड़ाकर लेगा।

जय श्रीराम।

 हिंदी विरोध प्रांत में 

 सर्वत्र हिंदी विरोध।

 तमिलनाडु सरकारी स्कूल में स्नातकोत्तर अध्यापक।

 ईश्वरीय देन।

[मैं पंद्रह  हजार की प्रतीक्षा में था।

 कम से कम दस हजार।

 एक मज़दूर  भी दो घंटे काम के लिए ढाई हज़ार माँगता है।  

 एक भिखारी भी अधिक कमाता है।

 3500/तो अधिक कम है।

 

पर साहित्यकार सब की स्थिति है ऐसी ही है।

 दिमाग से लड़ते हैं,

 प्रकाशन खर्च अलग।

 रामशंकर  झांसा के प्रसिद्ध कवि, 

वे अपनी पुस्तकों  की ताँता लगाकर  अपनी राम कहानी लिखते हैं।

 हिंदी किताबें किलो 

 15रूपये।

 अतः पता चलता है कि भारतीय भाषाओं का महत्व धीरे धीरे  युवकों के मन से मिट रहा है।

 इसलिए मैं धन को प्रधानता न देकर  हिंदी की सेवा  कर रहा हूँ।

 भारतीय भाषाएँ  देवभाषा  संस्कृत भी मृत्यु दशा में।

 125 वर्ष की खड़ी बोली

 व्रज माधुरी , मैथिली, अवधि आदि से नौ दो ग्यारह हो रहे हैं।

 हिंदी के विकास को रोकने तमिलनाडु कटिबद्ध है।

 अर्थ को छोड़कर 

 भारतीय भाषाओं की रक्षा करने हिंदी विरोध आंदोलन के समय मैं मार खाकर अपमान सहकर 

 तमिल द्रोही की उपाधि पाकर देश की एकता के लिए हिंदी का प्रचार कर रहा हूँ। सब ने कहा, हिंदी छोड़ो, गणित सीखो। मालामाल बन जाओगे।पर सच्चे सेवकों के साथ भगवान रहता है।

 आगे अंग्रेज़ी मोह से भारतीय युवक युवती सांसद विधायक सरकारी अधिकारी जिला देश,शिक्षा विभाग  के अधिकारी एंटी कंपनियां, निजी उद्योग जीविकोपार्जन के साधन के इस जमाने में 

 भारतीय भाषाओं की रक्षा सिवा  मानवेत्तर शक्ति ही कर सकती है।

 अनेक प्रांत  महाराष्ट्र   तक हिंदी   के विरोध में 

 कर्नाटक भी।

 भारत भर में  अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूल  बढ़ रहे हैं। वहाँ नाम मात्र के लिए भारतीय भाषाएँ

 दसवीं कक्षा तक।

 उसके बाद अंग्रेज़ी माध्यम  अंग्रेज़ी मिश्रित 

संवाद में कितने गौरव 

 युवक युवतियाँ

 अनुभव करती हैं,

 भारतीय भाषाओं के पतन युवकों की अंग्रेज़ी प्रियता विज्ञापनों में 

 मोटे अक्षरों में अंग्रेज़ी 

  भारतीय भाषाएँ

 सिगरेट बाक्स में 

 धूम्रपान  फेफड़ों के लिए बरा है लिखने के समान है।

 शराब बोतल में 

शराब पीना घर और देश के लिए खराब लिखने के समान है।

 केंद्र सरकार और प्रांतीय सरकार दोनों दिल से अंग्रेज़ी स्कूल खोलने की अनुमति ।

 अनुमति लेने अब पचास लाख तक भ्रष्टाचार  ।

जय हिन्दी बाहर

व्यवहार में जीविकोपार्जन की भाषा 

धन कमाने की भाषा

उच्च शिक्षा की भाषा 

सर्वव्यापी अंग्रेज़ी राज।।

 एक पृष्ठ टंकण के लिए 

 सौ रूपये।

डाक्टर दस मिनट कंसल्ट के लिए हज़ार रूपये।

सद्यःफल जनता देने तैयार।

 एक कविता के अनुवाद 

  यों ही नाड़ी देख कर नहीं,

 चिंतन चिंतन उचित शब्द का प्रयोग फिर टंकण।

 हृदय से साहित्यकार को 

 पैसे दे नहीं सकते।

 क्योंकि एक किताब को प्रकाशित करके जन जन तक पहुंचाना आसान नहीं।

हो सकता है हिंदी प्रांत की सरकार पैसे दे सकती है।

पर उनके अपने नियम हैं।

मेरे दोस्त एक लाख तक खर्च करके बिक्री के अभाव में रो रहा है।

 संस्कृत के महान ब्राह्मण 

धन या संस्कृत के सामने धन को अपना लिया।

 विदेश में भारतीय वेद उपनिषद  अंग्रेज़ी माध्यम के कारण नित्यानंद जो भारतीय  अधिकारियों के सामने  अपराधी है,

वह अरबपति एक अलग देश के निर्माण।

 भारतीय भाषाओं के कारण नहीं अंग्रेज़ी के कारण।

 कोई भी राजभाषा अधिकारी,

 हिंदी प्राध्यापक 

 सांसद विधायक 

 अपनी संतानों को भारतीय भाषा माध्यम के द्वारा शिक्षा देना अमर्यादित अपमानित मानता है।

संस्कृत के प्रकांड विद्वान अंग्रेज़ी शासन काल में 

तुरंत अंग्रेज़ी के सिलवर  टंक  नाम पाने,

अंग्रेज गुमास्ता बनने,

 उनके खुशामद करने में अपनी दिव्य भाषा

 यहाँ तक गायत्री मंत्र भी भूल गये।

 अर्थ प्रधान ब्रह्मांड में 

 चांदी सोने के सिंहासन हीरे के मुकुट के आश्रम आचार्यो को मालामाल बनाने में लोग तैयार।

 अपनी भाषा की बरबादी पर विचार देने न तैयार।

  अंग्रेज़ी के डाकमेट के टंकण में एक दिन हजारों की आमदनी।

 अनुवादक अपने 

समय  को  एक मजदूर में लगने पर हजार रुपए।

 सोचिए उपन्यास सम्राट भी ग़रीबी में।

  अतःआज की परिस्थिति में आम विद्वत जनता हिंदी के लिए खर्च करने तैयार नहीं।

हर गाँव में अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल।

 हर गाँव में विदेश में नौकरी।

 मेरे शहर पवनी में 

 हर घर मे विदेशी नौकरी।

 उनके लिए रूपये हाथ का मैल।

अड़ोस पड़ोस देखने पर कर्जा लेकर अंग्रेज़ी माध्यम पढ़ाने तैयार।

आ सेतु हिमाचल में यही स्थिति है।

 मातृभाषा के पंडितों के घर में पैसों की तंगी।

 मनःसाक्षी से बोलिए 

 दिव्य भाषा संस्कृत से अधोगति की हालत में 

 भारतीय भाषाएँ।


एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

Monday, January 26, 2026

राष्ट्रीय बालिका दिवस एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 27-1-26 +++++++++++++++ नमस्ते वणक्कम्। ++++++-++++++ बालिका बालांबिका देवी स्वरुपा उनकी रक्षा के लिए उनको शक्ति स्वरूपा ज्ञान स्वरुपा, तन स्वरूपा त्रिदेवियों का स्वरूपा सप्त कन्या सप्त माता स्वरूपा की आराधना देवियाँ रामायण, महाभारत काल से अपमानित स्त्रियाँ काली का भयंकर स्वरूप, मीनाक्षी देवी का शांत स्वरूप, हमारे मुनि ऋषियों ने सम्मानित बालिकाएँ फिर भी समाज में वह भोग की वस्तु बनी। छः साल की बच्ची से बलात्कार, लड़कियों की सुरक्षा नहीं, इससे बड़ी निर्दयता गर्भ में लड़की है के जानते ही भ्रूण हत्याएँ। इन सबके कारण अबला को सबला बनाने, राष्ट्रीय बालिका दिवस नारी जागरण के लिए नारी की अपनी शक्ति समझने समझाने के लिए नर तुल्य बनाने के लिए बालिका दिवस। सती प्रथा, जवाहर व्रत विधवा का अपमान, किसी पुरूष से बोलने पर वारांगना के अपशब्द विधवा स्त्री को आम मंगल कार्य करने से रोकना। भरी सभा में अपमानितकरना नारी को रखकर जुआ खेलना धंधा करना, इन सब से बालिका राष्ट्रीय दिवस। नारी जागरण नारी का संपत्ति अधिकार अराजकल की नारियाँ शिक्षित हैं। ये सब सुथार और भी सुदृढ करने राष्ट्रीय बालिका दिवस।

 राष्ट्रीय बालिका दिवस 

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

27-1-26

+++++++++++++++

नमस्ते वणक्कम्।

 ++++++-++++++

बालिका 

बालांबिका

देवी स्वरुपा

 उनकी रक्षा के लिए 

 उनको शक्ति स्वरूपा 

 ज्ञान स्वरुपा,

 तन स्वरूपा

 त्रिदेवियों का स्वरूपा

सप्त कन्या

 सप्त माता

स्वरूपा 

की आराधना देवियाँ

 रामायण, महाभारत काल से  अपमानित स्त्रियाँ

काली का भयंकर स्वरूप,

 मीनाक्षी देवी का शांत स्वरूप,

हमारे मुनि ऋषियों ने 

सम्मानित बालिकाएँ

फिर भी समाज में 

वह भोग की वस्तु बनी।

छः साल की बच्ची से बलात्कार,

लड़कियों की सुरक्षा नहीं,

 इससे बड़ी निर्दयता 

 गर्भ में लड़की है के

जानते ही भ्रूण हत्याएँ।

इन सबके कारण 

 अबला को  सबला बनाने,

  राष्ट्रीय बालिका दिवस 

 नारी जागरण के लिए 

 नारी की अपनी शक्ति 

 समझने समझाने के लिए 

 नर तुल्य बनाने के लिए 

बालिका दिवस।

 सती प्रथा,

 जवाहर व्रत 

 विधवा का अपमान,

 किसी पुरूष से बोलने पर

वारांगना के अपशब्द 

 विधवा स्त्री को आम मंगल कार्य करने से रोकना।

भरी सभा में अपमानितकरना

 नारी को रखकर

जुआ खेलना

 धंधा करना,

 इन सब से बालिका

 राष्ट्रीय दिवस।

नारी जागरण 

 नारी का संपत्ति अधिकार 

 अराजकल की नारियाँ

 शिक्षित हैं।

ये सब  सुथार और भी

 सुदृढ करने

 राष्ट्रीय बालिका दिवस।

Sunday, January 25, 2026

गणतंत्र दिवस

 गणतंत्र दिवस 

++++++++++++++

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 

तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

26-1-2026

+++++++++++++++

नाचेंगे 

आनंद नर्तन करके,

शहर शहर गाँव-गाँव 

 मेरा जुलूस मनाएँगे।

हर एक भारतीय का

 अपना एक महत्व है,

हर्षोल्लास कोलाहाल से

इस अद्भुत पर्व दिन,

विभिन्न मज़हबी,

त्योहार

 अलग -अलग भक्ति,

 पर  सब मिल जुलकर 

 सहोदर भाव से

 मनाने का राष्ट्रीय त्योहार 

 यह गणतंत्र दिवस।

विश्व भर के भारतीयों के,

हर्षोल्लास के अपूर्व दिन।

एक स्वर में  नारा लगाएँगे,

 देश प्रेम, देश भक्ति श्रद्धा से

जय भारत!

जय हिन्द!

 वंदे मातरम्!

 सारे जग में 

 यह आनंद नारा

 विश्व भर में गूँज उठें।

76 साल बीत गये,

धर्म निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक देश में,

 सब को समान अधिकार,

पर यही

 खेद की बात है 

 व्यवहार में, 

अल्पसंख्यकों का अत्यधिक सुविधाएँ,

  भारत देश में 

 मजहबी स्वतंत्र,

 अल्प संख्यकों को

 सब प्रकार  की आर्थिक सहायता,

 अब 76साल हो गये

 अल्पसंख्यकों के 

अधिकार को मिटाकर 

 सब के लिए 

समान अधिकार 

 चाहिए,

कम अंक अधिक आयु 

आदि सहूलियतें मिटानी चाहिए।

 एक ही परिवार,

 सब को छात्रवृत्ति 

  गरीब उच्च जाति 

 प्रतिभाशाली होने पर भी

 जाति के आधार पर,

छात्रवृत्ति, नियुक्ति 

 संविधान के समान अधिकार का शाश्वत दाग।

 सरकारी दफ्तरों के भ्रष्टाचार 

 चुनाव में  धन का मनमाना प्रयोग।

 जिसकी लाठी उसकी भैंस।

 न्यायालय के फैसला फैसला है,

 लागू में लाना 

 न्यायाधीश पर कलंक लगाना,

 ये जनतंत्र देश में 

 न्याय नहीं,

धन और बल का अधिकार।

ज़रा खुशी के अवसर पर 

  संविधान के  लिखित रूप

 व्यवहार में नहीं।

 इसे बदलना होगा।

 तभी गणतंत्र का महत्व।

ओट देने में नोट का महत्व 

 नाश होना चाहिए।

तभी 100% जनतंत्र की

 सफलता होगी।

आनंदोल्लास सभी भारतीयों को आनंद देगा।





 



 


 



 



 

 


 


 


 



 


 


 


 

 

 










 

 

 

 
















नागरी लिपि दिवस

 नागरी लिपि की कमियों 

 पर जितना भी ध्यान दें

‌कमी रहित कहना    

 नामुमकिन है।

 हर भाषा की अपनी ध्वनियाँ हैं, 

 ज, ज़ 

तमिल में तीन न है

 ண.ந.ன.

ந ன दोनों के लिए 

तमिल में न का ही प्रयोग है।

 ण --ண. 

ट वर्ग का अंतिम अक्षर।

त वर्ग न। ந.

ன र के बाद यह  नागरी लिपि में नहीं है।

वैसे ही ल के तीन रूप

ல/ழ/ள.

इसको ल,ऴ,ळ का रूप दिया गया है।

 कुछ लोग ऴ ழ को 

ष़  लिखते हैं। 

 इसमें मत भेद है।

  दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा  में பழைய தும் புதியதும் को 

पष़ैयतुम  ही लिखते हैं।

 इनका मानक रूप चाहिए।

 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा  संदैह निवारण के लिए 

 लिखित विचार।

Thursday, January 22, 2026

छत्रपति शिवाजी

 छत्रपति शिवाजी 

एस. अनंतकृष्णन चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

23-1-26

+++++++++++

भारत भूमि ज्ञान भूमि

 आध्यात्मिक पक्ष भूमि 

 वीर धीर गंभीर भूमि

  अहिंसा परमो धर्मप्पः 

त्याग की शांत भूमि।

 अतिथि देवो भव

 के उद्देश्य लेकर 

 सबका स्वागत किया 

 लुटेरे विदेशी 

 त्यागमय भारत को 

 द्रोहियों को प्रलोभन देकर 

 भारत के शासक बने।

 ऐसे समय पर  

 भारत में युग पुरुष और

 युग वीर देशभक्त का 

होता है जन्म।

क्रांति वीर,।मुगलौं का सिंह स्वप्न थै  

छत्रपति शिवाजी।

 आध्यात्मिक गुरु 

 रामदास के मार्गदर्शन

 पर वे आदर्श गुरु भक्त बने।

 अपनी छोटी सेना में 

‌जाति मजहब के भेद 

बिना  सबको अपनाया।

  माता की  सीख उनको

 वीर धीर चतुर  देश भक्त

 हिंदू भक्त बनाया।

 उनकी युद्ध नीति  अपूर्व थी।

 शत्रुओं को अडघनै देना,

उनका मार्ग रोकना,

 खाद्य-पदार्थों को 

  मिलने न देना,

 अफजल खां का षडयंत्र 

 जानकर दोस्ती के नाम से

 गले लगाकर बघनखे द्वारा मारना,

औरंगजेब के कारावास से मिठाई कै झांसे में 

 छिपकर बचना

 मुगलों के लिए 

 उनका छापामार 

 अति खतरा बना।

 अंग्रेज़ी के प्रति उन्होंने 

 खतरे का सावधान था।

 वीर छत्रपति शिवाजी

 भारतीय युवकों के लिए 

 अनुकरणीय देश भक्त ,

वीर, साहसी शासक।

उनकी घोषणा थी,

 देश के लिए 

 जिनमें ज्ञान है

 ज्ञान से देश भक्ति 

और देश की सेवा करना।

जिनमें बल है,

देश की सुरक्षा और 

 अमन चमन पर सतर्क रहना।

जिनके पास धन है

आर्थिक सहायता करना।

 जो न

दुर्बल है,

सच्चे मन से

 प्रार्थना करना।

आज भी चेन्नई तमिलनाडु में 

 कालिकांबाल मंदिर प्रसिद्ध है, 

जहाँ शिवाजी आकर 

 देवी से प्रार्थना की।

 भवानी माँ के भक्त 

 वीर शिवाजी 

 मराठा राज्य की स्थापना करके 

 भारतीयों में 

 सनातन धर्म और हिन्दू राष्ट्र स्थापित करने का संदेश दिया।

 जय जय 

छत्रपति शिवाजी।

 उनकी जीवनी पढ़ना

अनुकरण करना

 हर भारतवासी के लिए 

 प्रेरणादायक है।

 देश भक्त वीर कुशल शासक,

शिवाजी महाराज की जय।



  









 



 


 


 

 


 

 


मधुर स्मृति

 मधुर स्मृति

+++++++++++

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु 

22-1-25

++++++++++++

मानव जीवन में,

 बचपन से बुढ़ापे तक की

 मधुर स्मृतियाँ अनेक।

 मेरे जीवन की मधुर स्मृतियाँ उनमें  एक है

 तमिलनाडु के हिंदी विरोध आंदोलन।

1967की बात।

 तभी मैं और मेरी माँ

श्रीमती गोमती जी 

हिंदी विश्वविद्यालय 

आरंभ करके 

 हिंदी के प्रचार में लगे।

 मेरी माँ 1957से अंतिम साँस तक हिंदी वर्ग चलिती रही। 

मेरी हिंदी अभिमन्यु समान माँ के गर्भ से मिली।

 माँ के सामने बैठकर

 न सीखी हिंदी।

कितने दोहे पद याद है

 मैं बैठकर न रटा।


तब हिंदी  विरोध का बड़ी जुलूस निकला।

 वे मेरे घर के सामने 

 खड़े होकर 

नारा लगाने लगे।

मूडु मूडु हिंदी विश्वविद्यालय नटत्ताते।

अर्थात 

बंद करो,बंद करो,

 हिंदी विद्यालय बंद करो।

 मत चलाओ, मत चलाओ हिंदी विश्वविद्यालय मत चलाओ।

 जुलूस से कुछ लोग 

 पत्थर भी फेंकने लगे।

 तब मैं बाहर गया तो

 उन से कहा विदेशी भाषा गुलाम बनाती भाषा,

 अंग्रेज़ी सीखने से ही

 तमिल का नाश होगा।

 क्रिया आगे कर्म पीछे।

 हमारी भाषाएँ

 कर्म आगे, क्रिया पीछे।

पढ़ता हूँ पुस्तक नहीं,

 बोलता हूँ हिंदी नहीं,

पुस्तक पढ़ता हूँ,

 करने का पता आगे

 अंग्रेज़ी में पता नहीं,

 क्रिया आगे पता नहीं 

 कर्म क्या है।

जीविकोपार्जन करने

 अंग्रेज़ी सीखना सही है तो

 हिंदी सीखने बहुत गुना सही है।

 पुलिस के आने से सब चले गये।

 देखता हूँ हिंदी विरोध 

 पुरुषों के घर की महिलाएँ  हिंदी सीखने आयीं।

 आजकल जैसे मंदिर विरोध मुख्यमंत्री स्टालिन की पत्नी  दुर्गा स्टालिन 

 मंदिर मंदिर जाती हैं।

 हिंदी वर्ग में छोड़ने

 ले जाने हिंदी विरोध पुरुष बाहर खड़े रहते।

 वह मधुर स्मृति 

भूल नहीं सकता।

 आज भी तमिलनाडु में 

 महिला   प्रचारिका 

 और छात्राएंँ अधिक।

 सत्रह साल के वह हिंदी प्रचार, 76 साल की उम्र 

 हरी भरी से।

 दुरंगी राजनीति 

 भक्ति में

 और हिंदी प्रचार में 

स्वार्थ की चरम सीमा पर

 तमिलनाडु में।

 दोनों में भीड़ अधिक।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

 


 


  





 

 

 

 

 




 


Sunday, January 18, 2026

ஃआशीर्वाद

 आशीर्वाद 

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई 

19-1-26.

--++++++++++

भारतीय शास्त्रों में 

 वेद उपदेशों में 

 आशीर्वाद का अपना महत्व है।

 भारतीय संस्कृति का अविभाज्य अंग है

‌आशीषें और नमस्कार।

 संध्या वंदन में 

 गोत्र , ऋषियों के नाम पिता के नाम और अपने नाम कहकर 

 नमस्कार करके आशीषें

 प्राप्त करना,

 गुरु का नमस्कार करके आशीषें पाना,

 जीवन में अमन चमन शांति संतोष प्रगति के लिए

 आवश्यक है।

 आशीर्वाद 

में सकारात्मक उर्जा।

आशीषें  

  दीर्घायुष भव।

‌सौभाग्यवती भव।

 विधवा ब्राह्मणी को

 आशीर्वाद दिया

पुत्रवती भव।

 कबीर का जन्म हुआ।

 पुत्र वाणी का डिक्टेटर बना।

परशुराम ने कर्ण को शाप दिया।

 भीष्म ने कुंती को

 सौभाग्यवती भव का आशीर्वाद दिया ।

जन कल्याण के लिए 

 समाज कल्याण के लिए 

 सकारात्मक मंगल शब्द 

 आशीर्वाद।

 भगवान भला करे।

आयुष्मान भव 

 विजयी बनो

  सदा खुशी रहो।

 फूलों फलों

 ये आशीष वचन 

 ही सनातन धर्म का 

‌संदेश है।

 माता पिता दादा दादी 

 और बुजुर्गों से

‌आशीषें  पाने का रिवाज़ 

 धीरे धीरे लुप्त हो रहा है।

 परिणाम आज कल के

 युवक युवतियों के जीवन में 

 शांति संतोष चैन नहीं है।

 तलाक चाय पीने के समान 

 माता पिता के क्रोध 

 दुख के भागी बनकर शादी

 बगैर शुभाशीष के

 जीवन में

 न प्रेरणा

न प्रोत्साहन 

 न सुख चैन।

सदा मंगल शब्द 

सुनने   नमस्कार करके

 आशीर्वाद की शुभकामनाएँ

 जीवन में देगी  आनंद।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना