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Monday, July 6, 2026

विश्व ग्रामीण विकास दिवस

 विश्व ग्रामीण विकास दिवस।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

7-7-26.++++

++++++++++

नगर नगरीकरण, नगर विस्तार  

प्रकृति का विनाश।

 केवल धन का उद्देश्य।

 परिणाम ग्राम काली होना।

 धन से तन का स्वास्थ्य 

पौष्टिक आहार,

अन्न, धान,सब्जियाँ

खरीद सकते हैं।

 और ग्रामीण लोग

 खेती न करते तो

धनी शहरी लोग भूखों मर जाते।

 ग्राम शहर के सुखी जीवन जीने रीढ़ की हड्डियाँ हैं।

स्वस्थ शरीर,रक्त संचार 

 ग्रामीण लोग 

कृषी न करते तो बेकार।

अतः ग्राम राज्य की स्थापना,

विश्व ग्रामीण दिवस 

मनाकर ,

ग्रामोत्थान के लिए 

 लोगों को जगाना है।

ग्रामों में स्वच्छ वातावरण।

 साफ हवा,

न वायु,जल,भूमि

 प्रदूषण।

 न विचार प्रदूषण।

हर साल जुलाई में तारीख को मनाने वाले 

 ग्रामोत्थान दिवस

 ग्रामीण लोगों की शिक्षा,

 पानी की व्यवस्था,

 आवागमन की सुविधाएँ,

स्वास्थ्य केंद्र,

भोजन आदि

बुनियादी सुविधाएँ,

देना,

 खेती के विकास योग्य 

 बीज,  खाद,  आर्थिक सुविधाएँ,

गाय,बैल,बकरी, मुर्गा 

पालने की व्यवस्था,

सहकारी समिति की स्थापना।

सरकारी सहायता की जानकारी आदि।

 जय किसान का नारा

यही ग्रामीण विकास दिवस का लक्ष्य।

संत तिरुवल्लुवर ने कहा

சுழன்றும்ஏர்ப் பின்னது உலகம் அதனால் உழந்தும் உழவே தலை".

संसार उद्योग,धंधा, शिक्षा आदि की तरक्की करने पर भी  

कृषी पर ही आधारित है।

अतः ग्रामीण विकास को ही प्राथमिकता देनी है।

एस.अनंतकृष्णन।

विश्व ग्रामीण विकास दिवस


एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडुहिंदी प्रेमी प्रचारकदिनांक: 7-7-2026


विश्व ग्रामीण विकास दिवस


नगरों का विस्तार,नगरीकरण की अंधी दौड़,प्रकृति का होता विनाश—केवल धन कमानाजब जीवन का उद्देश्य बन जाए,तब गाँव उजड़ने लगते हैं।


धन से पौष्टिक आहार,अन्न, धान और सब्जियाँखरीदी तो जा सकती हैं,पर यदि ग्रामीण किसानखेती करना छोड़ दें,तो धनवान नगरवासी भीभूखे रह जाएँगे।


गाँव ही हैंशहरों के सुखी जीवन कीरीढ़ की हड्डी।किसानों के श्रम से हीस्वस्थ शरीर,रक्त का संचारऔर जीवन का आधारबना रहता है।


अतः ग्रामोत्थान का संकल्प लेकरविश्व ग्रामीण विकास दिवस मनाएँ,और जन-जन कोग्रामीण विकास के लिए जागरूक बनाएँ।


गाँवों में होस्वच्छ वातावरण,शुद्ध वायु, निर्मल जल,उपजाऊ भूमि,और प्रदूषण-मुक्त विचार।


ग्रामीणों को मिले—उत्तम शिक्षा,स्वच्छ पेयजल,सुगम आवागमन,स्वास्थ्य केंद्र,पौष्टिक भोजनतथा सभी बुनियादी सुविधाएँ।


कृषि के लिएउन्नत बीज, खाद,आर्थिक सहायता,पशुपालन की सुविधाएँ,सहकारी समितियों की स्थापनाऔर सरकारी योजनाओं की सही जानकारीहर किसान तक पहुँचे।


"जय किसान" का नारातभी सार्थक होगा,जब हर गाँवसमृद्ध और आत्मनिर्भर बनेगा।


महान संत तिरुवल्लुवर ने कहा है—


"சுழன்றும் ஏர்ப் பின்னது உலகம்; அதனால் உழந்தும் உழவே தலை."


अर्थात—संसार चाहे उद्योग, व्यापार और शिक्षा मेंकितनी भी उन्नति कर ले,उसका आधार अंततः कृषि ही है।इसीलिए ग्रामीण विकास कोसर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।


— एस. अनंत कृष्णन

Sunday, July 5, 2026

इंसाफ़ की ताकत

 इंसाफ़ की ताकत।

 एस. अनन्तकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

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इंसाफ़  की ताकत 

अत्यंत महत्वपूर्ण।

पर इंसाफ़ देनेवाले 

 ज्ञानी होना चाहिए।

 धनलोलुपता वकील 

 अपने तर्क चातुर्य से

 अपराधी और खूनी को 

छुड़ा देता है।

 झूठे गवाह देना एक धंधा बन गया है।

 भ्रष्टाचारी मंत्री,

 हत्यारे अमीर

 अमीर कार चालक 

 सबको दंड देने बारह वर्ष।

 तब फ़ाइल गायब

‌गवाह गायब

 इंसाफ़ कमजोर।

 मुख्यमंत्री जयललिता 

अपराधिन

 शादी प्रतिवादी तर्क 

 खत्म, पर फैसला 

 उसकी मृत्यु के बाद।

 वह अब निरपराधिन नेत्री।

 उसकी सखी शशिकला

 चार वर्ष की ही सजा ।

 भारतीय न्यायालय धनियों के लिए।

एक गरीब चालक 

  ग़लती से टकराने पर तुरंत दंड।

एक प्रसिद्ध  अभिनेता पियक्कड़, कार चलाते 

 अनेकों की मृत्यु।

 बारह साल तक के मुकद्दमे में,

 फाइल, गवाह सब नदारद।

 अभिनेता के समर्थन में 

 सब ।

 वह साफ़ साफ़ दंड से बचा।

 मंदिर के पर्वत पर  दीप जलाने का फैसला,

पर शासक दल दीप जलाने नहीं दिया।

 हिंदू मंदिर अति प्राचीन।

 पर बीच में दर्गाह

 एक मुगल कब्र 

 न्याय का ताकत कमज़ोर।

 अदालत में धन की महिमा

 सत्य का हार, अधर्म की जीत।

 प्रेमचंद की कहानी 

 नमक का दारोगा।

 सत्य के पक्ष में न गवाह

न वकील।

  अपराधी काले धनी

 उसको बचाने

 वकीलों का तांता।

स्वतंत्रता संग्राम में 

 इंसाफ़ अति कमजोर।

  राजीव गांधी के मुकद्दमे  में न  सच्चाई का पता।

सिविल केस चलाते चलाते अमीर बन गया गरीब।

 न इंसाफ़।

 इंसाफ़ की देरी

 सत्य हरिश्चन्द्र की परेशानियाँ,

 लेखकों की ग़रीबी,

 प्रकाशकों की अमीरी।

 भारत के सड़कों के फुटपाथ चलने के लिए नहीं,

फुट पाथ की दूकानों के लिए।

 मंदिर भक्ति के लिए नहीं 

 व्यापारियों का केंद्र 

 मनमाना दाम धोखा।

ट्राफिक पुलिस का रिश्वत।

जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र में 

 रिश्वत।

 थोड़े में कहें तो

 देवदर्शन में धन प्रधान।

 श्मशान में भी।

 इंसाफ़ की ताकत 

 दुर्बल ही लगता है,

 धन,पद, अधिकार, सिफारिश दोस्ती के कारण।

 तटस्थ इंसाफ 

यम के दरबार में,

पंचतत्व के चलन में।

जहाँ न अपील न उच्च उच्चतम न्यायालय।

Saturday, July 4, 2026

समय और कर्म

 

समय और कर्म

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
दिनांक: 06-07-2026

समय और कर्म

ईश्वर की इस सृष्टि में
सबके कर्म एक समान नहीं।
आहार में भिन्नता,
आकार में विविधता,
स्वास्थ्य, बुद्धि और क्षमता में
सबका स्वरूप अलग-अलग है।

धन, तन और मन में भी
प्रकृति ने विविध रंग भरे हैं।
जल का स्वाद भी बदलता है,
धरती का रूप भी बदलता है।

सभ्यता और असभ्यता के कर्म,
कृषि, पोशाक और खाद्यान्न में भी
स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
सद्कर्म और दुष्कर्म,
सत्संग और कुसंग—
यही जीवन का फल निर्धारित करते हैं।

अनपढ़ कबीर का अमूल्य ज्ञान
सत्संग की ही देन था।
उनकी वाणी आज भी
मानवता का मार्गदर्शन करती है।

मंगत मिश्र के तोते ने
वेद-मंत्रों का उच्चारण सीखा,
और डाकू के तोते ने
"पकड़ो, मारो, लूटो" कहना।
संगति का प्रभाव ही
कर्म का स्वरूप गढ़ता है।

समय सबके लिए समान है—
चाहे राजा हो या रंक।
समय किसी का पक्ष नहीं लेता,
वह निरंतर आगे बढ़ता रहता है।

संत कबीर का अमर संदेश—

"काल करे सो आज कर,
आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी,
बहुरि करेगा कब।।"

समय को खोना
मानो जीवन को खोना है।
जो कर्म समय पर नहीं होता,
वह जीवन भर पछतावा बन जाता है।

समय की हानि की भरपाई
ईश्वर भी नहीं कर सकते।

"आछे दिन पाछे गए,
हरि से किया न हेत।
अब पछताए होत क्या,
जब चिड़िया चुग गई खेत।।"

आइए, समय का सम्मान करें,
सद्कर्म को जीवन का आधार बनाएँ,
क्योंकि समय और कर्म ही
मनुष्य के सच्चे भाग्य-विधाता हैं।

— एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
सौहार्द सम्मान प्राप्त हिंदी प्रेमी, सेवक एवं अनुवादक

समय और कर्म

 समय और कर्म

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

6-7-26

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कर्म ईश्वरीय सृष्टियों में 

 एक समान नहीं।

 आहार विषय में,

 आकार विषय में 

 स्वास्थ्य विचार में 

 बुद्धि लब्धि में 

 अलग अलग।

धन ,तन,मन

में भी भिन्न-भिन्न।

 पानी में भी भिन्नता।

 अतः सभ्यता असभ्यता के कर्म  ,कृषि में पोशाक में, खाद्यान्न में भी फर्क।

अतः सद्कर्म बद्कर्म  सत्संग बद्संग का फल।

अनपढ़ कबीर का ज्ञान 

वाणी का डिक्टेटर बनना

 सत्संग का फल।

 मंगत मिश्र के तोते का

 वेद मंत्र बोलना,

 डाकू के तोते का 

 पकड़ो,मारो,लूटो कहना

 सत्संग और बदचलन का संग।

 अतः कर्म में फ़र्क।

 समय 

 समय तो सब के लिए बराबर।

 राजा हो या रंक

 समय तो किसी की परवाह नहीं करता।

 

संत कबीर का यह प्रसिद्ध दोहा 

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।पल में प्रलय होएगी,

 बहुरि करेगा कब।।

 समय को खोना,

मरण समान।

  कर्म  समय पर न 

करने पर 

पछताना पड़ेगा।

 समय का घाटा भरना

ईश्वर से भी असंभव।

 

आछे दिन पाछे गए, हरि से किया न हेत।

अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु 

 सौहार्द सम्मान प्राप्त हिंदी प्रेमी सेवक अनुवादक 

 



 

 

 


 

 



 


 




अंग्रेज़ी

 अंग्रेज़ी स्कूल न तो हम कमा नहीं सकते।

 हिंदी  या तमिल दरिद्रता है, भाषा माधुर्य  ही  प्रधानता हो तो संस्कृत क्यों मृत भाषा।

 अंग्रेज़ी क्यों जन प्रिय भाषा।

 धन धन धन

 बाद में ही धर्म।

‌धन न तो मंदिर नहीं,

 ईश्वर के सिर पर हीरे का मुकुट नहीं।

 ऊँचे ऊँचे गोपुरम नहीं,

 धन के सामने धर्म नहीं।

सत्य नहीं, अहिंसा नहीं 

 शिक्षितों में ईमानदारी नहीं। 

 न्यायाधीश में न्याय नहीं,

  ऐसी हालत में भाषा किस खेत की मूली।

 हजारों भाषाओं का लापता। 

 अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूल और जीविकोपार्जन न तो  भारतीय भाषाओं का अंत ज़रूर।

भक्ति

 भक्ति भारतीय भक्ति,

 याद रखिए,

 समझिए 

 समझाइए

 सनातन धर्म है,

 मजहब नहीं।

 मत-मतांतर 

अद्वैत द्वैत 

विशिष्टाद्वैत नहीं,

वह हवा है, तटस्थ हैं

 मानवता के आधार पर है।समदर्शी है,

व ओवर चढ़

Friday, July 3, 2026




 नव नारी कुंजर

பாரத நாட்டு சனாதன தர்மம்

மனித வாழ்க்கையின் துன்பங்கள் இன்பங்கள்

ஆகியவற்றை

சிற்பங்கள் மூலம் கதைகளாக விளக்கி

மனதை ஆன்மாவில் ஒன்று படுத்தி

ஆனந்தமாக வாழ வழிகாட்டுகிறது.

அவ்வாறு சிற்பக்கலையில் பல கதைகள்

வழிகாட்டி மனதை அடக்கி

ஆன்மீக வழியில் எடுத்துச் செல்கிறது.

அவ்வாறான ஒரு சிற்பமே

நவநாரி குஞ்சரம்.

நலம் என்றால் ஒன்பது.

ஒன்பது பெண் களைக் கொண்ட யானை சிற்பம்.

சிவனின் மாயா தேவி வடிவம் பெண்கள்.

மனித வாழ்வின் இன்பங்கள் துன்பங்கள்

அனைத்து மாயா தேவி பெண் உருவமாக படைத்துள்ளார்.

அதனால் ஆன்மீக வழி காட்டுவோர்

பெண்ணாசை மின்னி ஆன்மீக பக்தி வழியில் செல்ல வேண்டும்.

அதற்கு பாரத சனாதன தர்ம

ஆசாரியர்கள்

பிரம்மச்சாரிகளாக வாழ்ந்தனர்.

புத்தர் மகாவீரர்

ஆதி சங்கரர்

விவேகானந்தர்

அனைவரும் துறவிகள்.

ஆனால் அனைவரும் துறவிகள் ஸ்ல ஆக வேண்டும் என எந்த மதமும் கூறவில்லை.

கிறிஸ்தவ மதத்தில் பாதரியார்

கன்னியாஸ்திரிகள் திருமணவாழ்க்கை ஏற்பதில்லை.

மக்களை நல்வழிப்படுத்த

பெண் மண் பொன் ஆசையில் இருந்து

மனதைக் கட்டுப்படுத்த

புலனடக்கம் தேவை என்பதை வலியுறுத்தினர்.

இப்பொழுது நவநாரி குஞ்சரம்

என்றால்

வாழ்க்கை நவரச மனோபாவங்களால் ஆனது.

இதில் சிருங்கார ரசம் என்பது ஆண் பெண் காதலுக்கு முக்கியத்துவம் அளிப்பது.

இதில் கட்டுப்பாடு தேவை.

இது தான் பூலோக வாழ்க்கை யின்

இன்றைய துன்பங்கள் போட்டி பொறாமை பேராசை காமம்

ஆகியவை உள்ளடக்கியது.

இதனால் ஏற்படும் ரசங்கள் தான் கருணை

பயம்

வீரம்

குரோதம் ஆச்சரியம்

வெறுப்பு

இன்னல்.

இந்த நவரசங்களுக்கு

ஆதாரமாக இருப்பது பெண்கள்.

இந்த நவநாரிகள் கொண்ட யானை சிற்பம் ஏன் என்றால் யானை நிதானத்துடன் செயல் படும் குணம் கொண்டது.

அதிக நினைவாற்றல் அறிவு மிக்கது.

கூட்டமாக வாழும் சமூக உணர்வு.

வலிமை.

தன் மாவுத்தனுக்கு கட்டுப்பட்டது.

வளர்ப்பு மிருகம்..

இந்த அனைத்து குணங்கள் கொண்டவர்கள்

பெண்கள்.

ஆவதும் பெண்ணாலே அழிவதும் பெண்ணாலே.

ஆகையால் நவரசங்கள் தரும் பெண்கள்

அந்த சிற்பம் காணும் ஆண்கள்

யானை போல்

நிதானமாக செயல் படவேண்டும்.


பழநி சே.அனந்தகிருஷ்ணன்,ஓய்வு பெற்ற தலைமை ஆசிரியர், ஹிந்து மேல் நிலைப் பள்ளி,திருவல்லிக்கேணி,சென்னை