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Sunday, January 4, 2026

साहसिक विजय

 साहस की जीत

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

5-1-26.

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 साहस  

 मानव को प्रोत्साहित 

 करता रहता है।

 सत्य के आधार पर का साहस,

 सीना तानकर खड़ा करता है।

 मूर्खता पुर्ण दुस्साहस 

 अधोगति पहुँचाता है।

 साहस पूर्ण कार्य के लिए 

 चाहिए बल।

 शारीरिक बल,।

मानसिक बल।

 आर्थिक बल।

मित्र बल

 समर्थक बल।

 प्रशंसक बल।

 प्रेरित प्रैत्साहित

 करनेवालों का बल।

 इन सब से श्रेष्ठ फल

आत्मबल।

आत्मज्ञान बल।

 अहं ब्रह्मास्मी के

 सोच समझ का बल।

 उन सब से बड़ा है

 कर्म फल।

 सर्वश्रेष्ठ बल है

 सर्वेश्वर का असीमित अनुग्रह।

 सिरों रेखा और 

 भाग्य बल।

 साहसी तो प्रयत्न करके 

 विजयी बन सकता है।

 विजयी होकर राम सा दुखी।

 युधिष्ठिर और पांडव सा दुखी।

अभिमन्यु का वध।

कर्ण का त्याग 

 साहस पूर्ण होकर 

 अपूर्ण विजय।

बुद्ध, महावीर, 

 शंकराचार्य,

 रामानुजाचार्य 

 शीरडी बाबा

 स्वामी विवेकानंद 

 आध्यात्मिक विजय।

Saturday, January 3, 2026

धन संस्कारवान

 आप के विचार के लिए।

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पैसे 

 मैं घंटों बैठकर लिखा करता हूँ,

निजी, अनूदित 

तमिल हिंदी सिखाना

पर आर्थिक लाभ नहीं।

अब है मेरी उम्र 76.

  दुनिया देखी।

  जवानी का जोश 

 आत्मसंतोष के लिए 

 आत्मानंद के लिए 

 अर्थ न कमाया।

 अब   बुढ़ापा है।

 मंदिर जाने पर 

 पैसे हैं तो तुरंत दर्शन।। अस्पताल गया तो

 पैसे के बिना चपरासी भी नहीं बोलता।

सेवा मुफ्त,

 मानव दिल्लगी का पात्र बनता।


 बेचारा भला आदमी।

 मेरे तमिल हिंदी संपर्क 

 75000 दर्शक।

 यहाँ प्रकाशक की किताबों का सम्मान।

सौ किताब, एक सभा में प्रकाशन , सम्मिलित।

 मेरे चार ब्लाग 

 2,00,000/  से ज़्यादा दर्शक।

 न कोई सम्मान।

 न साहित्य अकादमी का ध्यान।

 आत्म संतोष से कोई

 लाभ   ,

बुढ़ापे में अर्थ न तो

 जीवन व्यर्थ।

 अब पछताने से हो क्या,

जब चिड़िया चुग गई खेत।

आँखें अंधे होने के बाद 

 सूर्य नमस्कार से क्या लाभ।

   


 


 


 


 

 

 

 

 

 

 



 


 

 

 

 

 


 

 

 


 


 

 



 


 


 



 

 



 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 



 

हर स्थान में पैसे।

[04/01, 9:48 am] sanantha.50@gmail.com: संस्कारवान।

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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संस्कार  का मतलब है

 सही आकार देना।

 मानसिक  शुद्धिकरण।

 चरित्र निर्माण, 

 मानवता का विकास।

भारतीय धर्म बचपन से

 स्वास्थ्य, ज्ञान, अहिंसा,    त्याग , प्रेम, दान-धर्म,

 चरित्र निर्माण , अच्छी चाल-चलन, धर्म मार्ग

 सकारात्मक सोच,

 इन गुणों से युक्त मनुष्य 

 संस्कारवान।

  ऐसे संस्कारवान व्यक्ति 

 अति दुर्लभ।

 राम के चरित्र में कलंक,

 कृष्ण के चरित्र में कलंक।

 दधिचि   ही महान तपस्वी।

 हरिश्चंद्र का आदर्श,

 भक्त रैदास, भक्त त्याग राज जैसे संस्कारवान 

नहीं जगत में।

Friday, January 2, 2026

जीवन आनंद

 जीवन का आनंद 

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

3-1-26

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जीवन का आनंद,

 विविध मानव 

प्रकृति के अनुसार।

ऋषि मुनियों का आनंद 

 मन मिटाकर आत्मा परमात्मा एक करके 

 आत्मज्ञान पाना, ब्रह्म ज्ञान पाना।

  शासकों के आनंद धन कमाना।

 अधिकारियों का आनंद वेतन नहीं, रिश्वत पाने में।

 धन के आनंद समझने वाले,,

 नये नये घर लेने में 

 आनंद  लेनेवाले,

  संतानोत्पत्ति में आनंद लेनेवाले,

 वैवाहिक जीवन में 

 पत्नी के होते रखैल में 

 जीवन आनंद लेने वाले,

   तीन चार शादी करके

 जीवन का आनंद 

 समझने वाले,

  ईमानदारी जीवन में 

 आनंद समझनेवाले,

 कर्तव्य पालन में 

 जीवन का आनंद     समझनेवाले,

 जी चुराने बहाना बनाने में जीवन का आनंद समझनेवाले,

 राम जैसे एक पत्नी व्रत‌ में

 जीवन का आनंद 

 समझनेवाले।

कृष्ण सा द्विपत्नीवाले,

पतिव्रता धर्म को आनंद समझनेवाली,

वेश्यावृत्ति वेश्यागमन में 

 जीवन का आनंद समझनेवाले।

 जीवन तो मानव जीवन 

 पर चाह और आनंद भिन्न भिन्न।

चोरी डकैती में आनंद ,

 चोर को पकड़ने में आनंद।

जीव रक्षक का आनंद अलग।

जीव भक्षक का आनंद अलग-अलग।

 मधुशाला में आनंद।

स्वार्थता अहंकार में आनंद।

 निस्वार्थता त्याग में आनंद।

 यात्रा में आनंद,

गपशप में आनंद 

  संगीतकार को, 

लेखक कवि 

कलाकार 

 बागवान 

 किसान 

अनेक पेशेवर,

 अनेक प्रकार का आनंद।

 अपना अपना डफ़ली 

 अपना अपना राग।

सब के जीवन का आनंद 

 सुख मय जीवन बिताने में।

 ईश्वर दर्शन ब्रह्मानंद में।

नौकरी में व्यापार में 

 चालक बनने में,

चालाक बनने में 

 ठगने ठगाने में 

 आनंद अनेक जीवन में।

 आम आनंद सत्य में 

 परोपकार में, धर्म रक्षक में देश प्रेम में।

Sunday, December 28, 2025

असली नकली

 असली नकली

 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 

2912-25

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असली पौरुष

 नकली पौरुष 

 गोली खाकर पौरुष 

 असली सोना

 नकली सोना

असली चांदनी 

 नकली चांदनी

 असली मोती

नकली मोती

नकली हस्ताक्षर 

 असली हस्ताक्षर।

 असली प्रति

 नकली प्रति

 प्राकृतिक खुशबू

 कृत्रिम खुशबू

  प्राकृतिक हवा

 वातानुकूलित वायु

 पंखे की  हवा

 प्राकृतिक शोभा,

 बनावटी श्रृंगार।

फूल असली,

 प्लास्टिक नकली।

गुलाबी गाल,

 नकली गुलाबी गाल।

सोचिए ,परखिए

 असली नकली।

लंबा असली ऊँचा आदमी 

 नकली लंबा आदमी।

 कथानायक रजनी कांत


 असली रूप  का रजनीकांत।

 सोचिए परखिए 

 असली नकली।

पहाड़ी ठंड,

 वातानुकूलित ठंड

 नकली असली में 

 असली स्थाई अनश्वर।

 नकली अस्थाई नश्वर।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

Saturday, December 27, 2025

सहयोग

 नमस्ते। वणक्कम्। 🙏

कविता: सहयोग — अर्थ और लाभ

सहयोग वह सेतु है, जो दिलों को जोड़ता है।

एक-दूसरे का हाथ थाम, जीवन को मोड़ता है।

जहाँ मैं नहीं, वहाँ हम का भाव जन्म लेता है,

कठिन से कठिन पथ भी सरल बन जाता है।

सहयोग से दुख आधा, सुख दुगुना हो जाता है,

थके कदमों में फिर से साहस भर जाता है।

ज्ञान, श्रम और समय जब साथ बँटते हैं,

असंभव से सपने भी सच बनते हैं।

यह विश्वास की नींव पर खड़ा एक दीप है,

अंधकार में जो सबको दिशा देता है।

समाज, परिवार, राष्ट्र सब मजबूत होते हैं,

जब सहयोग के संस्कार जीवित रहते हैं।

सहयोग ही मानवता का सच्चा लाभ है।

यदि चाहें, मैं इसे सरल भाषा, बाल कविता, या तमिल–हिंदी मिश्रित रूप में भी लिख सकता हूँ।

Friday, December 26, 2025

भारतीय क़ृषि खेती

 किसान का जीवन 

एस. अनंत कृष्णन।

चेन्नई।

27-12-25.


भारत जीव नदियों का 

 सर्वसंपन्न देश है।

 अतः कृषि प्रधान देश है।

 यहाँ सभी प्रकार के अन्न

 तरकारियाँ, फल फूल 

 पैदा कर सकते हैं।

 पर आज़ादी के बाद 

 पाश्चात्य उद्योग धंधों को

 प्रधानता देकर 

 देश के खेतों में को

 झीलों को 

 नदारद करके‌

 अन्नदाता किसान की हालत  आत्महत्या तक।

 प्रदूषित पानी 

 पीने का पानी 

पैसे देकर 

 विदेशी कारखाने 

 के विकास,

 परिणाम चैन नगर के 

 चार बेकार कहानी के

जैसे मेहनती किसान 

 भूखा प्यासा।

 किसान को

 अपने धंधा छोड़कर 

 खेत बेचकर शहर में 

 छोटे मोटे काम में 

 लग जाते हैं।

 किसान के जीवन 

 अत्यंत दुख प्रद है।

 स्नातक स्नातकोत्तर डाक्टरेट की माया

 सब  के सब नौकरी में।

 मेहनत करने कोई तैयार नहीं।

गरीब किसान के बच्चे 

 अन्य कार्यों में लग जाते हैं।

 खेत के काम करने मज़दूर नहीं मिलते।

 मधुशाला खोलकर 

 किसान के जीवन को 

ग़रीबी के गड्ढे में डालने 

 सरकार तैयार।

 किसानों की गरीबी,

कर्ज का बोझ

 नौकरी छोड़ अन्य काम।

 हमारे नेता सब अंग्रेज़ों के पिछलग्गू,

 देश की आध्यात्मिकता शांति को नष्ट करके

 भारतीय प्रधान धंधा खेती  को लापरवाही 

 करके 

 विजयमल्लय्या,

 नीरव मोडी को कर्जा देकर

 प्रवासी भारतीय बना दिया।

उनका ऋण  मिटा दिया 

बिना वसूल किए।

 विदेशी खून मिश्रित नेता।

स्वार्थ पूर्ण धन लोभ।


 किसान को ऋण देने में 

 लापरवाही।

 उनकी माँग पूरी करने

 तैयार नहीं।

आधुनिक आविष्कार के मोह माया,

 किसान के जीवन पर

 ध्यान देने कोई नहीं।

इन शासकों के कारण 

 किसान असह्य कष्ट सह रहे हैं।

 भावी पीढ़ी एक एक दाने के लिए तड़पेगा।

 ऊंची इमारतें, ऊँची मूर्तियों से देश

 बाह्य सुंदरता से गौरवान्वित।। 

पर  असली विकास 

 नदियों का राष्ट्रीयकरण 

 किसान को प्रधानता न देना।

 भावी धनी नागरिक 

 अंग्रेज़ी देश का रूखा सूखा भोजन में।

 किसान है के बच्चे उद्योग धंधों में 

 सोचिए देश के विकास 

 बाह्य सुख,महँगाई।

 मानसिक शांति ,

  स्वच्छ वायु ,पानी 

 खोकर साँस लेने में मुश्किल।

 किसान के जीवन का कष्ट 

संपूर्ण देश धनी,

 धन रहेगा, मरेंगे लोग 

 भूखा प्यासा।

  किसान का जीवन 

 अति अशांति।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 


 

 





Wednesday, December 24, 2025

आधुनिक नारी

 आपकी कविता से

‌प्रेरित यथार्थता।

गलत न समझना

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आधुनिक नारी पुरुष 

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स्त्री और देह

जवानी में भी 

 मैंने नहीं सोचा।

बेचारी मेरी पत्नी,

 भारतीय संस्कार की रानी

मेरे बारे में क्या सोचती होगी।

 फिर भी मेरी भला चाहती।

  ममता भरी , सेवा भरी

 त्याग भरी नारियाँ।

 आज देखना दुर्बल।

 उर्मिला नलायिनि दमयंती

की कहानियां नारियों की वेदनाएँ,

 खुद दंड देने लगी है

 आधुनिक युवकों को।

 वह अब कठपुतली बन गया,

नारियों का।

  पंद्रह साल की उम्र में 

 शादी 

वह पौरुष आनंद 

 हमारे पूर्वजों का ज्ञान।

 जीवन पर्यन्त दांपत्य 

 त्याग मय सुखी जीवन।

 संतानोत्पत्ति का यंत्र।

 हर साल एक बच्चा।

 फिर भी प्रसव वैराग्य भूल जाती।

 कम से कम पाँच पुत्र।

 गांधारी के सौ पुत्र।

 आधुनिक शिक्षित

 स्नातक स्नातकोत्तर में जमाना।

विवाह के तीन चार महीने में तलाक।

 नारी को तो जल्दी शादी हो जाती।

 पुरुष बेचारा, 

 अकेला , गुमसुम।

 पाश्चात्य संस्कृति 

 संयम खोना,

 ऋष्यश्रुंग  जैसा

 ब्रह्मचर्य की सीख नहीं।

 कमज़ोरी अवस्था में 

 पच्चीस तीस साल में 

 शादी। असंतोषी जीवन।

 भारतीय  धर्म की

 शादी व्यवस्था।

 पच्चीस साल में  पंद्रह बच्चे।

 अब  निःसंतान दंपति

  तीस साल की उम्र में 

‌डाक्टर के द्वारा संतान प्राप्त करने

‌विचित्रवीर्य सा

 पांडु सा  शुक्ल दान की प्रतीक्षा में।

 आधुनिक नारी सबला,

 आधुनिक पुरुष अबल।

अवैध संबंध की ताज़ी कहानियां, खून कत्ल तलाक।

 अब सोचता हूँ,

प्रेम की ताकत।

 औरत की चंचलता 

 रहीम का दोहा

 पर प्रसिद्ध दोहा है: "कमला थिर न रहीम कहि, यह जानत सब कोय। पुरूष पुरातन की वधू, क्यों न चंचला होय।"