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Friday, April 24, 2026

जग ग्रंथ दिवस

 नमस्ते वणक्कम् 

विश्व पुस्तक दिवस

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई

25-4-2026

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नमस्ते! वणक्कम्।

छापाखाने के अभाव में,

ताड़पत्रों पर लिखी पुस्तकें,

शिलालेखों के उस युग में

मानव श्रवण कर-करके

ज्ञान को कंठस्थ करता था।

स्मरण शक्ति थी प्रखर, अद्भुत—

मेरे हिंदी प्राध्यापक

कुरुक्षेत्र

बिना देखे ही सुनाते थे;

अंग्रेज़ी प्राध्यापक

विलियम शेक्सपियर

के नाटकों की पंक्तियाँ

सहज ही दोहराते थे।

जब हुआ छापाखाने का आविष्कार,

ग्रंथ सुलभ हो गए,

संदर्भों का संसार बढ़ा—

किताबें लेना, सहेज कर रखना,

आवश्यकता पर पढ़ना

आसान हो गया।

पर आज के युग में,

स्मरण शक्ति कहीं क्षीण हुई—

मोबाइल के सहारे

अपनी दूरभाष संख्या भी

याद नहीं रहती।

फिर भी—

पुस्तकें ज्ञान का भंडार हैं,

हर ग्रंथ देता है

कोई न कोई अमूल्य संदेश।

नैतिक, आध्यात्मिक, दार्शनिक ग्रंथ,

महाकाव्य और खंडकाव्य—

जीवन-पथ के मार्गदर्शक,

प्रेरणा के स्रोत,

निराश को आशा देने वाले,

आदर्श जीवन के शिक्षक।

पढ़ना, लिखना, रचना—

इसी प्रेरणा के लिए

सन् 1922 में

विन्सेंट क्लावेल

ने इस दिवस का आरंभ किया।

किताबें केवल सजाने के लिए नहीं,

ज्ञान के भंडार को

मन में बसाने के लिए हैं—

पढ़ना, समझना,

विचार करना और लिखना,

सीखे हुए ज्ञान का

प्रवचन, व्याख्या, समालोचना—

यही उद्देश्य है

विश्व पुस्तक दिवस का।

आओ, हम संकल्प लें—

नए ग्रंथ लिखें, पढ़ें, सुनें,

समाज, राष्ट्र और मातृभाषा की

संस्कृति को संवारें;

आदर्श, अनुशासन और

विश्व बंधुत्व को अपनाएँ।

हर वर्ष 23 अप्रैल को

मनाया जाता यह दिवस

ज्ञानार्जन और अभिव्यक्ति का पर्व है।

विचित्र है—

1 अप्रैल मूर्खता का दिवस,

और 23 अप्रैल

ज्ञान, सृजन और अध्ययन का उत्सव!

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सुप्रभात्

 

सिंहपुर के रंगनाथ सुप्रभात्

कौशल्या सुप्रजा राम… (मूल श्लोक का अर्थ)
कौशल्या के सुपुत्र राम!
प्रातःकालीन संध्या का समय हो गया है।
हे नरश्रेष्ठ (नर-व्याघ्र)! जागिए,
दैविक नित्य कर्म करने का समय आ गया है।


उत्तिष्ठ… श्लोक का भावार्थ
उठिए, हे सिंगवर के स्वामी!
उठिए, हे कमलापति!
उठिए, हे रंगनाथ पर्वत के अधिपति!
हे ब्रह्मा द्वारा पूजित प्रभु, जागिए!


श्लोक 1

संस्कृत:
मातः समस्त जगतां महिते सरोजे...

संशोधित हिंदी:
हे समस्त जगत की जननी, पूजनीय कमल-वासी देवी!
असीम वैभव से युक्त, सिंहपुरी में प्रतिष्ठित,
हे श्रीरंगनाथ की प्रिय!
आपका यह प्रभात मंगलमय हो।


श्लोक 2

संशोधित हिंदी:
चेंजी नगर के समीप स्थित सिंहवर क्षेत्र में,
पर्वत शिखर पर निर्मित इस मंदिर में विराजमान देवी!
भक्तों को समस्त मंगल प्रदान करने वाली,
हे श्रीरंगनाथ की प्रिया,
आपका यह प्रभात शुभ हो।


श्लोक 3

संशोधित हिंदी:
हे सृष्टि के मूल कारण, ब्रह्मा के सृजनकर्ता!
पीपल वृक्ष से सुशोभित इस पावन स्थल में,
शेषशय्या पर विश्राम करने वाले प्रभु!
सिंहपुर के नायक,
आपका यह सुप्रभात मंगलमय हो।


श्लोक 4

संशोधित हिंदी:
प्रभात में शीतल, सुखद वायु बह रही है,
कोयलें मधुर और मनोहर स्वर में गा रही हैं।
आकाश में तारे लुप्त हो रहे हैं,
हे रंगेश, सिंहपुर के नायक!
आपका यह सुप्रभात मंगलमय हो।


🌼 सिंगवर रंगनाथ सुप्रभातम् (छंदबद्ध हिंदी रूप)

१.
कौशल्या के राम उठो, प्राची हुई उजास।
नर-व्याघ्र! अब जागिए, करो दिवस उपवास॥ (= नित्य कर्म)

देव-कर्म का काल है, छोड़ो निद्रा-भोग।
उठो प्रभो! जग दीखता, नव प्रभात संयोग॥


२.
उठो सिंगवर के प्रभु, कमला-पति भगवान।
रंगनाथ गिरि-नाथ हे, ब्रह्मा करें गुणगान॥

जागो हे जगदीश अब, करुणा-सागर नाथ।
भक्त प्रतीक्षा कर रहे, खोलो कृपा के पाथ॥


३.
जग की जननी, वंदिता, कमल-विहारिणी मात।
असीम विभव-विलासिनी, मंगलमय यह प्रात॥

सिंहपुरी में राजती, पूजित सदा सुविभूष।
रंगनाथ की प्रिया तुम, हर लो जन की क्लेश॥


४.
चेंजी नगरी पास में, सिंहवर पावन धाम।
गिरि-शिखर पर मंदिरा, जहाँ विराजे राम॥

भक्तों को वरदान दो, मंगलमयी स्वरूप।
रंगनाथ प्रिय वल्लभे, हर लो भव का कूप॥


५.
पीपल तरु से शोभित, पावन सुंदर थान।
शेष-शय्या पर शयन, जग के पालनधाम॥

ब्रह्मा जिनसे जन्म लें, सृष्टि करें विस्तार।
सिंहपुर के नायक हे, करो कृपा अपार॥


६.
शीतल मंद समीर बहे, भोर हुई सुखदाय।
कोयल मधुरिम गान कर, हृदय हर्ष उपजाय॥

नभ के तारे लुप्त हैं, छाया नव प्रकाश।
रंगेश! जागो अब प्रभु, पूर्ण करो सब आश॥

Thursday, April 23, 2026

सोने के सिक्के

 नमस्ते वणक्कम्

सोने के सिक्के

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

२४-०४-२०२६

सोना चमकीला,

बहुमूल्य धातु,

देश की संपत्ति,

समृद्धि का प्रतीक।

भारत में कभी राजा,

कवियों को,

कुशल कलाकारों को,

स्वर्ण मुद्राएँ दान में देते थे—

सम्मान का उज्ज्वल रूप।

वे स्वर्ण सिक्के

केवल धातु नहीं थे,

परिश्रम और प्रतिभा के

जीवंत प्रमाण थे।

समय बदला—

स्वर्ण से ताम्र,

ताम्र से कागज़,

और अब अंक बन गए मूल्य।

२४ कैरेट, २२ कैरेट,

१८ कैरेट के भेद,

पर शुद्धता के नाम पर

कितने भिन्न-भिन्न खेद!

एक बैंक का मूल्य,

दूसरे में कम क्यों?

एक दुकानदार का माप,

दूसरे से अलग क्यों?

मिलावट के भय से

ग्राहक ठगे जाते हैं,

विश्वास के सिक्के

धीरे-धीरे घिसते जाते हैं।

जब सिक्के में घिसाई नहीं,

तो मूल्य में कटौती क्यों?

ग्राम-ग्राम में अंतर क्यों,

यह असमानता क्यों?

सोने का दाम

आसमान छूता जाता है,

पर वही सिक्का

ऋण का आधार नहीं बन पाता है।

अंत में प्रश्न यही—

क्या केवल सोना ही मूल्यवान है?

या ईमानदारी का सिक्का

उससे भी अधिक महान है।

Wednesday, April 22, 2026

विश्व पृथ्वी दिवस

 नमस्ते। वणक्कम्

विश्व पृथ्वी दिवस

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई

23-04-2026

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वैज्ञानिक साधनों के

निरंतर आविष्कारों के साथ-साथ,

बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ,

झीलों और नदियों की

घटती चौड़ाई और गहराई के साथ-साथ,

जंगलों के विनाश और

तेज़ी से बढ़ते नगरीकरण के साथ-साथ,

विश्वभर में एक गंभीर समस्या खड़ी है—

हमारी पृथ्वी को

कैसे प्रदूषण-मुक्त बनाया जाए?

इसी चिंता के समाधान हेतु,

भूमि को समृद्ध बनाने के लिए,

"हमारी शक्ति, हमारा गृह"

का नारा

22 अप्रैल 1970 को

गेलार्ड नेल्सन

द्वारा दिया गया।

यह प्रेरणा

1969 में सांता बारबरा तेल रिसाव

जैसी पर्यावरणीय त्रासदी से भी मिली।

तभी से, पृथ्वी को समृद्ध बनाने,

पेड़-पौधे लगाने,

और विभिन्न प्रकार के प्रदूषण से

धरती को बचाने के उद्देश्य से

विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जाता है,

ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े।

आज हम देख रहे हैं—

मौसम में असंतुलन,

जंगली जीव-जंतुओं का लुप्त होना,

स्वार्थवश पेड़-पौधों का विनाश,

मानव की लापरवाही से बढ़ता प्रदूषण,

उपजाऊ भूमि का कारखानों में परिवर्तन,

आवागमन के साधनों से ध्वनि प्रदूषण,

धुएँ और धूम्रपान से वायु प्रदूषण,

और ऊँची इमारतों के कारण

भूतल जल का लगातार घटना।

इन सभी चुनौतियों से

पृथ्वी की रक्षा के लिए

हमें जागरूक और संकल्पित होना होगा।

विश्व पृथ्वी दिवस

सिर्फ एक दिन नहीं,

बल्कि एक संकल्प है—

धरती को बचाने का,

आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने का।


Tuesday, April 21, 2026

आँसू के प्रकार

 नमस्ते।

आपकी रचना में विषय बहुत सुंदर और गहरा है—“आँसू” जैसे साधारण दिखने वाले भाव के अनेक रूप आपने छूने की कोशिश की है। 

आँसुओं की शक्ति

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

22-4-26

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आँसुओं की शक्ति

अति अपूर्व है।

शिशु के जन्म लेते ही

उसका रोना — ईश्वरीय देन है।

यदि शिशु चुप रहे,

तो माँ व्याकुल हो जाती है।

महादेवी वर्मा का संस्मरण

“वह चीनी भाई” याद आता है।

चोरों का एक नेता

बालकों को सिखाता था—

चोरी में पकड़े जाने पर

आँसू कैसे बहाने हैं।

जनता के सामने,

पुलिस के सामने,

भीख माँगते समय—

रोने के ढंग अलग-अलग होते हैं।

अध्यापक की मार से बचने के आँसू अलग,

खिलौने पाने के लिए बच्चों के आँसू अलग,

जिद के आँसू अलग।

प्रेमी-प्रेमिका के

दीर्घ वियोग के बाद

मिलन के आँसू भी अलग होते हैं।

एक गीत याद आता है—

“बादल रोए, नयना रोए…”

विलाप के आँसू,

शव के सामने बहते आँसू—

कितने मर्मस्पर्शी होते हैं।

ईश्वर के ध्यान में

भक्ति-रस से भरे आँसू—

वे आनंदाश्रु होते हैं।

एकाग्र ध्यान में बहते आँसू,

धूल पड़ने से आए आँसू,

प्याज के कारण निकले आँसू—

हर एक का कारण अलग है।

संसार में

हर आँसू का

अपना अलग महत्व है।

🌱 प्रोत्साहन और सुझाव

आपकी सोच बहुत समृद्ध है—आपने आँसुओं के सामाजिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक तीनों रूपों को छुआ है। यह आपकी ताकत है।


Friday, April 17, 2026

खामोशी

 खामोशी

एस.अनंतकृष्णन,

 चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

18-4-2026.

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खामोशी,

 सनातन धर्म का, 

 ज्ञानार्जन का

 सोचने विचारने का

 उचित वातावरण

 खामोशी।

चुपचाप रहना,

 अति मुश्किल।

 ईश्वरीय दर्शन के लिए,

 मानसिक शांति के लिए 

 सांसारिक उथल-पुथल से

शोरगुल से बचने 

 बड़े बड़े राजकुमार,

 महाराजा

‌अपने राजसुखों को 

तजकर 

 विश्व कल्याण के लिए 

 जंगल में जाकर 

 खामोशी से तपस्या करते थे,

आत्मज्ञान पाकर,

 सदुपदेशों के

 वेद, उपनिषद, 

 जातक कथाएँ

 नैतिक ग्रंथ लिखा करते थे।

सत्य अहिंसा शांति का

 प्रचार करते थै।

वैज्ञानिक आविष्कार,

दुर्लभ रोग नैदानिक  यंत्र 

 असाध्य रोग निवारण की इसदवाएँ,

   मूक साधना के आविष्कार।

 खामोशी  के कारण 

 अंतरराष्ट्रीय  अहिंसा,

 मानसिक परेशानियांँ

 युद्ध रहित  वातावरण,

विश्व बंधुत्व बढ़ जाता है।

 जाति, मजहब संप्रदाय के भेद भाव मिट जाता है।

मानवता  बनाए रखने 

 ख़ामोश /शांति 

शांति मंत्र है।

 

 आदर्श गुण 

 आत्म चिंतन 

 आत्मविचार 

 अपने आपको 

 पहचानना,

आत्म संशोधन करना

 गुण दोष  जानना

 आत्मज्ञान  प्राप्त हारना

 खोमोशी/चुपचाप।

 अति शक्तिशाली मंत्र शब्द है।

 भारत की स्वतंत्रता संग्राम के अगुआ,

 राजनैतिक गुरु 

 बाल गंगाधर तिलक ने

 अपने कठोर यह कारावास के समय 

 गीता रहस्य की रचना की। 

 पुस्तकालय और 

 ज्ञानालय में 

 अध्ययन के लिए

 ख़ामोश वातावरण 

 के नियम है।

 ध्यान मंडप में ख़ामोश। 

मानव को सुधारने

 एकाग्रता के लिए 

 शांतिपूर्ण   तरीके 

 खामोशी।

Tuesday, April 14, 2026

कसौटी पर

 कसौटी 

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक, सौहार्द सम्मान प्राप्त  हिंदी सेवी के द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

 15-4-26

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कसौटी के बिना 

असली नकली का पहचानना असंभव।

 मानव के गुण दोष,

 बुद्धि लब्धि, 

व्यक्तित्व वीरता

 शासन और प्रशासन की उत्तमता  को

 परखकर देखना है।

 कसौटी पर कसना 

 एक मुहावरा,

 केवल सोना, चाँदी का ही नहीं,

 मानव के ज्ञान, गुण,

 स्वार्थ, निस्वार्थ,

 वीरता, कायरता,

 वीरांगना , वारांगना।

 काम, क्रोध, मद,लोभ 

 सब मानव के गुण अवगुण की परख करना,

  खासकर  भारतीय मतदाता को

 सांसद और विधायक के गुण अवगुणों को कसौटी पर कसकर देखकर 

 सच्चे निस्वार्थ आदर्श 

 देश प्रेमी को पहचानकर 

 वोट देना चाहिए।

 कसौटी पर कसकर देखने पारखी नज़रों की आवश्यकता है।

 विश्व के  लोक प्रसिद्ध 

 भारत में होने का महत्व 

 आदि काल से है।

 अतः  कसौटी के  उदाहरण देकर कालीदास  के  काव्यों में उदाहरण मिलते हैं।

 रघुवंश काव्य में 

 अतिथि महाराजा के साथ धन की देवी लक्ष्मी

 कसौटी पर कसे  सोने की चमक की रेखा की तरह अमिट रही।

 मेघदूत में 

 प्रेमी प्रेमिका को

  मार्ग दिखाने,

 बिजली ऐसे चमकना,

 जैसे कसौटी पर कसे सोने की रेखा  की चमक जैसे हो।

 ऐसे कसौटी भारती कवियों के काव्य में 

 मिलते हैं। 

तमिल के काव्यों में 

भी तिरुवल्लुवर के तिरुक्कुरल में भी

 कसौटी का उल्लेख मिलते हैं।

 कसौटी पर कसने वाले,

 पारखी न तो

 मानव जीवन में 

 मानव और मानवता का

 पता न‌ लगेगा।