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Friday, August 28, 2026

भारत आध्यात्मिक भूमि

 नमस्ते वणक्कम्।

राम नाम जपना 

 राग-द्वेष भूलना 

 भेदभाव रहित 

 चंचल मन को

 आत्मा में विलीन करना

 आत्म चिंतन करना

 अनेक विचारों का समन्वय 

 राम नाम जपने का परिणाम।।

 राम नाम 

 शिवनाम 

 आध्यात्मिक भूमि में 

 आसुरी शक्तियों का षडयंत्र,

फिर भी भारत 

 जगत मार्ग दर्शक।

 कारण भारत है 

 त्याग की भूमि,

समरस सन्मार्ग की भूमि,

 सनातन धर्म सागर।

 सभ्यता का शिरमौर।

  सनातन धर्म  ही

 सर्व जन कल्याणकारी।

 वसुधैव कुटुंबकम्,

वैश्वमैत्री का बुनियाद।

 शिवराम आसेतुहिमाचल  के

 विचारों की एकता।

 जय भारत।

 जय राम। राम राम।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक


आज की चुनौती

राम नाम जपना

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी-प्रेमी प्रचारक

राम-नाम जपना,
राग-द्वेष भूलना,
भेदभाव मिटाना,
चंचल मन को
आत्मा में विलीन करना,
आत्मचिंतन करना।

अनेक विचारों का
समन्वय करना—
यही है
राम-नाम जपने का परिणाम।

राम-नाम हो या शिव-नाम,
आध्यात्मिक भूमि भारत में
आसुरी शक्तियों का षड्यंत्र
चाहे कितना भी हो,
फिर भी भारत
जगत का मार्गदर्शक है।

कारण—भारत है
त्याग की भूमि,
समरसता और सन्मार्ग की भूमि,
सनातन धर्म का सागर।

सनातन संस्कृति
सभ्यता की शिरमौर है।
सनातन धर्म ही
सर्वजन-कल्याणकारी है।

“वसुधैव कुटुम्बकम्”
विश्व-मैत्री की बुनियाद है।

शिव और राम—
आसेतु-हिमाचल तक
विचारों की एकता के प्रतीक हैं।

जय भारत!
जय राम!
राम राम!

Thursday, August 27, 2026

रक्षाबंधन

 

आज की चुनौती

रक्षाबंधन

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

बहन के हाथों भाई की कलाई पर
राखी बाँधना—
यही है रक्षाबंधन।

यह त्योहार
परंपरागत रूप से उत्तर भारत में
विशेष रूप से मनाया जाता रहा है।
पर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते
और प्रेम का यह पर्व
अब उत्तर-दक्षिण का भेद मिटाकर
दक्षिण भारत में भी
उत्साह से मनाया जाने लगा है।

आज राखी के पर्व में
मजहब और जाति का भेद नहीं।
यह प्रेम, भाईचारे और एकता का
सुंदर संदेश देता है।

प्रचलित ऐतिहासिक कथा के अनुसार,
मेवाड़ की रानी कर्णावती ने
हुमायूँ को राखी भेजकर
भाई का रिश्ता बनाया था।
हुमायूँ ने भी
रानी को अपनी बहन मानकर
उनकी सहायता करने का प्रयास किया।

पौराणिक कथा में कहा जाता है कि
जब श्रीकृष्ण की उँगली से रक्त निकला,
तब द्रौपदी ने
अपने आँचल का कपड़ा फाड़कर
उनकी उँगली पर बाँध दिया।
कृष्ण ने द्रौपदी को
अपनी बहन के समान माना।

बाद में जब भरी सभा में
दुःशासन ने द्रौपदी का चीरहरण करने का प्रयास किया,
तब श्रीकृष्ण ने
उनकी लाज की रक्षा की।
इसी कथा को भी
रक्षाबंधन के पवित्र भाव से जोड़ा जाता है।

एक अन्य प्रचलित कथा
राजा महाबली और माता लक्ष्मी से जुड़ी है।

वामन अवतार में
भगवान विष्णु ने महाबली से
तीन पग भूमि माँगी।
महाबली की दानशीलता से प्रसन्न होकर
विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया
और स्वयं उनके द्वारपाल बनकर
वहीं रहने लगे।

भगवान विष्णु के वापस न लौटने पर
माता लक्ष्मी पाताल लोक पहुँचीं।
उन्होंने महाबली की कलाई पर
रक्षा-सूत्र बाँधकर
उन्हें अपना भाई बनाया।

महाबली ने बहन लक्ष्मी की इच्छा का सम्मान करते हुए
भगवान विष्णु को
उनके साथ जाने की अनुमति दी।

रक्षाबंधन केवल
कलाई पर धागा बाँधने का पर्व नहीं है।
यह भाई-बहन के बीच
पवित्र प्रेम, विश्वास, स्नेह
और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है।

आज बहनें केवल अपने सगे भाई की ही नहीं,
बल्कि अनेक लोगों की कलाई पर
राखी बाँधकर
भाईचारे का संदेश देती हैं।

प्रधानमंत्री सहित अनेक सार्वजनिक व्यक्तियों को भी
राखी बाँधने की परंपरा दिखाई देती है।

रक्षाबंधन—
भाई-बहन के पवित्र प्रेम,
अटूट विश्वास
और परस्पर सुरक्षा के संकल्प का
एक सुंदर भारतीय पर्व है।

भारतीय भक्ति साहित्य।

 प्राचीन भारत ज्ञान परंपरा ही

 विश्व को सही मार्ग पर ले चलेगा।

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एस . अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

++++++



जितनी बातें आजकल 

 हो रही है, उनकेहै कारण तुलसी के दोहों में है,

 कबीर के दोहों में हैं।

 काम क्रोध मद लोभ

 जब मन में लगे खान,

 पंडित मूर्खो एक समान,तुलसी कहत विवेक।

 कबीर आत्म चिंतन करने की सीख देते हैं --

बुरा जो देखन मैं गया,बुरा न तिलिया कोय।

 जो दिल खोजा आपना मुझसे बुरा न कोय।।

 जाति भेद के खंडण 

 में  

जाति न पूछो साधु की पूंछ लीजिए ज्ञान।

 मोल करो तलवार का,

पड़ा रहने दो म्यान।।

 पानी के अर्थ है -जल, इज्ज़त,चमक।

 पानी की रक्षा कीजिए।

 पानी बचाइए ।

रहीम का दोहा --

 रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून।

 पानी गये न ऊभरे,

 मोती मानुष सून।

 शिक्षा का महत्व-

स्वदेशे पूज्यंते राजा,

विद्वान सर्वत्र पूज्यंते।।

विश्व में शांति के लिए 

वसुधैव कुटुंबकम्।

 सर्वे जना सुखिनो भवन्तु।।

ईश्वर महिमा--

 कबीर --

जाको राखे साइयां,मारी न सकै कोय।

 बाल न बांका करि सकै,जो जग वैरी होय।

 गुरु महिमा-

गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पाय।

बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताया।।

  संत तिरुवल्लुवर 

 संपत्तियों में बड़ी सौपत्ति सुनना।

 श्रवण संपत्ति।

वही सभी संपत्तियों का सिरमौर।।

 दो हजार की किताबें लेना आसान है।

पर उस महान ग्रंथ ज्ञान को प्रवचन में सुनने से 

ज्ञान जल्दी मिल जाता है।

  ईश्वर ध्यान 

 माला तो कर में फिरै जीभ फिरै मुख माहीं।

मनुवा तो दस दिशै फिरै यह तो सुमिरन नाहीं। दल

  सत्यं वद।

 जय जगत।

 स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार।

 ये सब प्राचीन ज्ञान परंपरा की देन है।

अपने दोष निवारण के लिए -

निंदक नियारे राखिये, आंगन कुटी समाय।।

 जय भारत की ज्ञान परंपरा।

त्यागमय जीवन भारतीय परंपरा।

पाश्चात्य परंपरा भोग मय।

जगत मिथ्या, ब्रह्म सत्यं।।

नश्वर जगत।

Wednesday, August 26, 2026

महिला समाज दिवस।

 [26/08, 2:55 pm] sanantha.50@gmail.com: महिला समानता दिवस।

 एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई।

महिलाएँ कितने प्रकार के हैं?

 सीता जैसे,

 द्रौपदी जैसे

 रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाएँ,

  लाल दीप क्षेत्र की वारांगनाएँ,

 राजा भर्तृहरि की रानी की तरह रखैला रखनेवाली,

 धन के लालच में 

 पति बदलनेवाली,

 ईश्वर की सृष्टि में 

 समानता कहाँ?

त्यागी भी भोगी भी।

 ज्ञानी भी अज्ञानी भी।

अति रूपवती,

 काली कलूटी कुरूप।

 कंजूसी, उदार,

 न जाने समानता कैसे?

 सब समान डाक्टर बन जाते तो नाम कौन बनती।

 सर्वशिक्षा अभियान में 

 क्या सब के सब प्रतिभाशाली हैं क्या?

मंद बुद्धिवाली भी है न?

 समान अधिकार,

 समान दहेज़ 

 फिजूलखर्ची महिला 

 फिर भी आएगी पैसे माँगने!

 मितव्यई तो संतुष्ट।

समानता कहीं भी कैसी भी लाना असंभव।

 मोटी,दुबली पतली

 शूर्पणखा जैसी कामुक्ता।

 समानता का अधिकार तो दे सकते हैं।

 संविधान में समानता कहाँ?

 अल्पसंख्यकों का अधिकार अलग।

 सूचित अनुसूचित जाति के अधिकार अलग।

 कानून तो समान अधिकार,

 सहूलियतें दे सकता है।

पर व्यवहार भिन्न।

 बास्मति चावल चावलों की राजा।

 वह और साधारण चावल में बराबरी कैसे?

 समान अधिकार देने तैयार।

 महिलाओं को ईश्वर ने कोमल बनाया है।

 गर्भधारण  उसी को करना है, न पुरुष।

ईश्वर  ईश्वरीय में 

अर्धांगिनी तो है

पर पति बराबर पत्नी नहीं।

 ईश्वर की रचना में 

 गुण में भिन्नता,

 आकार में भिन्नता।चालचलन में भिन्नता।

इन भेदों में समानता लाना  असंभव ही।

[26/08, 2:59 pm] sanantha.50@gmail.com: आज की चुनौती


महिला समानता दिवस


एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई


महिलाएँ अनेक रूपों में हैं—

सीता जैसी त्यागमयी,

द्रौपदी जैसी स्वाभिमानी,

रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगना,

और अपने-अपने जीवन-संघर्ष में

अनेक प्रकार की महिलाएँ।


ईश्वर की सृष्टि में

क्या सभी मनुष्य एक जैसे हैं?


कोई ज्ञानी है,

कोई अल्पज्ञानी।

कोई अत्यंत प्रतिभाशाली,

कोई सामान्य क्षमता वाला।

किसी का शरीर बलवान,

किसी का कमजोर।

किसी का स्वभाव उदार,

किसी का मितव्ययी।


फिर समानता का अर्थ क्या है?


समानता का अर्थ

यह नहीं कि सभी डॉक्टर बन जाएँ,

सभी प्रतिभाशाली बन जाएँ

या सभी का रूप और स्वभाव एक जैसा हो जाए।


समानता का वास्तविक अर्थ है—

समान सम्मान,

समान अधिकार,

समान अवसर और

समान न्याय।


संविधान हमें

कानून के सामने समानता का अधिकार देता है।

महिला हो या पुरुष,

हर व्यक्ति को

सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है।


महिलाओं को शिक्षा मिले,

रोजगार के अवसर मिलें,

निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिले,

और उनके साथ

भेदभाव न हो—

यही सच्ची समानता है।


प्रकृति ने स्त्री और पुरुष को

हर दृष्टि से एक जैसा नहीं बनाया।

स्त्री को मातृत्व की विशेष जिम्मेदारी मिली है।

पुरुष और स्त्री के शरीर,

भूमिकाओं और क्षमताओं में

प्राकृतिक भिन्नताएँ हो सकती हैं।


लेकिन प्राकृतिक भिन्नता

अधिकारों में असमानता का कारण नहीं बननी चाहिए।


चावल अनेक प्रकार के होते हैं—

बासमती की अपनी विशेषता है,

साधारण चावल की अपनी उपयोगिता।

दोनों एक जैसे नहीं,

पर दोनों का अपना मूल्य है।


इसी प्रकार

स्त्री और पुरुष एक जैसे नहीं,

लेकिन दोनों का मानव-मूल्य समान है।


इसलिए हमें

समानता का अर्थ

“एक जैसा बनाना” नहीं,

बल्कि

“भिन्नताओं का सम्मान करते हुए

समान अधिकार देना” समझना चाहिए।


यही सच्ची महिला समानता है।

Saturday, August 22, 2026

विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस

 वह वरिष्ठ नागरिक दिवस 

आज की चुनौती
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
23-8-26

+++++++++++++

भारतीय सनातन धर्म में
वृद्धावस्था को
संन्यासी जीवन की ओर
बढ़ने का समय माना गया है।

सांसारिक मोह से दूर होकर,
केवल ईश्वर का ध्यान करते हुए,
पुत्र-पुत्री, नाते-रिश्तेदारों की
चिंताओं से मुक्त होकर,
एकांत में
मन को आत्मा में विलीन करते हुए
जीवन बिताने की कल्पना की गई है।

पर आज की लौकिक जीवन-व्यवस्था में
वृद्धावस्था की अपनी ही चिंताएँ हैं—
वृद्धाश्रम की चिंता,
भोजन की चिंता,
स्वास्थ्य और दवाइयों की चिंता।

आज अनेक वृद्ध
वृद्धाश्रमों में रहने को विवश हैं।
कहीं संतान की लापरवाही,
कहीं पुत्रों और बहुओं का उपेक्षापूर्ण व्यवहार।

माता-पिता की संपत्ति चाहिए,
लेकिन माता-पिता की
देखभाल करने की जिम्मेदारी
नहीं चाहिए!

बढ़िया भोजन तो दूर,
कभी-कभी रूखी-सूखी रोटी भी
सम्मान के साथ नहीं मिलती।

दवा लेनी है या नहीं,
चश्मा बनवाना है या नहीं,
बाल कटवाने हैं या नहीं—
इन छोटी-छोटी आवश्यकताओं पर भी
ध्यान नहीं दिया जाता।

ऐसे बेसहारे,
संतान द्वारा त्यागे गए वरिष्ठ नागरिक,
निस्संतान वृद्ध
और आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ लोग—
इन सभी के संरक्षण और सम्मान के लिए
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस
एक महत्वपूर्ण अवसर है।

वरिष्ठ नागरिक
परिवार और समाज पर बोझ नहीं हैं।
उन्होंने अपने जीवन के वर्षों में
परिवार, समाज और देश के निर्माण में
अपना योगदान दिया है।

उनके पास
जीवन का अनुभव है,
ज्ञान है,
संघर्षों की कहानी है,
और आने वाली पीढ़ियों के लिए
बहुमूल्य मार्गदर्शन है।

इसलिए इस दिवस का उद्देश्य केवल
एक दिन वरिष्ठ नागरिकों को याद करना नहीं,
बल्कि उनके आजीवन योगदान,
अनुभव और ज्ञान का सम्मान करना है।

वृद्ध नागरिकों की सेवा करें,
उनका सम्मान करें,
उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखें,
और उन्हें प्रेम तथा आत्मसम्मान के साथ
जीवन जीने का अवसर दें।

वरिष्ठ नागरिकों की सेवा
केवल हमारा कर्तव्य नहीं,
हमारी संस्कृति और मानवता की पहचान है।

एक दिन हम भी वृद्ध होंगे—
आज उन्हें जो सम्मान देंगे,
कल वही सम्मान
हमें भी मिलेगा।

नोट: विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस प्रत्येक वर्ष 21 अगस्त को मनाया जाता है।

Thursday, August 20, 2026

सद्भावना दिवस


आज की चुनौती

सद्भावना दिवस

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

21-8-26

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भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य है।

यहाँ प्रत्यक्ष रूप में

विविधता दिखाई देती है—

प्राकृतिक विविधता,

मजहबी विविधता,

भाषाई विविधता,

सांस्कृतिक विविधता।

इन विविधताओं के बावजूद

विचारों की एकता,

राष्ट्रीय भावना,

भाईचारा और राष्ट्रप्रेम

भारत को एक सूत्र में बाँधते हैं।

आसेतु हिमाचल तक

एकता और सद्भावना को मजबूत करने के लिए

हर वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री

स्वर्गीय राजीव गांधीजी के जन्मदिन

“सद्भावना दिवस” के रूप में

मनाया जाता है।

भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराएँ

और सनातन चिंतन

आसेतु हिमाचल

एकता और सह-अस्तित्व की भावना को

मजबूत करने में अपना योगदान देते आए हैं।

भारत की संस्कृति की विशेषता है—

अनेक धर्म, अनेक भाषाएँ,

अनेक परंपराएँ होते हुए भी

एक-दूसरे के प्रति सम्मान और

सह-अस्तित्व की भावना।

तमिलनाडु में भी

विभिन्न धार्मिक परंपराओं में

स्थानीय सांस्कृतिक प्रभाव दिखाई देते हैं।

कई गिरिजाघरों में

रथयात्रा जैसी स्थानीय परंपराएँ

और चर्चों में ध्वजस्तंभ

भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की

सुंदर झलक प्रस्तुत करते हैं।

सद्भावना दिवस के अवसर पर

सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में

राष्ट्रीय एकता और सद्भावना की

शपथ दिलाई जाती है।

आज के समय में

क्षेत्रीय राजनीति और

विभिन्न राजनीतिक मतभेदों के कारण

नीट, नवोदय विद्यालय और

राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे विषयों पर

विभिन्न राज्यों में अलग-अलग विचार

सामने आते हैं।

मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं,

लेकिन मतभेदों के कारण

मनभेद नहीं होना चाहिए।

राष्ट्रीय एकता,

भाईचारा,

राष्ट्रप्रेम और सद्भावना को बढ़ाना

आज समय की माँग है।

आइए, सद्भावना दिवस पर

हम केवल शपथ ही न लें,

बल्कि अपने व्यवहार में भी

सद्भावना को अपनाएँ।

विविधता हमारी शक्ति है,

एकता हमारी पहचान है,

और सद्भावना हमारे राष्ट्र की

सबसे बड़ी आवश्यकता है।

Wednesday, August 19, 2026

नेकी की छाँव

 नेकी की छाँव।

 एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु 

20-8-26

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नेक रहना श्रेष्ठ है।

 नेकी की छाँव में 

 रहना हिफाजत है।

 संगति का फल

 भलाई में है।

 

 हमें ज़रूरत के समय मदद करनेवाले हमारे लिए सज्जन हैं।

सज्जनता में धर्म है, 

परोपकार है,सत्य है।


भलाई करने पर

 हमारे दायरे में नाम मिलेगा।

 दोस्ती मिलेगी।

हम समाज के 

विश्वास पात्र बनेंगे।

बुराई करने पर

 हमारा मन  बेचैन होगा।

 भलाई करने पर चैन की नींद सोएँगे।

मानसिक हलचल न होगा।

 शांति मिलेगी।

 ईश्वर का अनुग्रह मिलेगा।

 नेकी की छाया 

 संतोष देगी।

बद विचार 

सद विचार में बदलेगा।

 सदाबहार है 

नेकी की छाँव में।