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Wednesday, March 18, 2026

ममता की बारिश

 ममता की बारिश।

 एस.अनंतकृष्णन , चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

19-3-26

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ममता क्या है?

जानने के पहले ममता  बारिश हुईकी प्रतीक्षा कितने  उत्साह वर्धन है,

कर्ण को मालूम है,

 भरत को मालूम है

कबीर को मालूम है 

ममता की बारिश कैसी है?

माँ की ममता की बारिश 

 अनुपम और अतुलनीय।

  सम्राट शिवाजी जानता है,

माँ की ममता की बारिश।

 ध्रुव जानता है,

सौतेली माँ की निर्ममता।

 प्रह्लाद की कहानी हिरण्य कश्यप की निर्ममता का प्रमाण।

 हर कोई जानता है 

 माँ की ममता की बारिश की शीतलता।

ममता की बारिश नहीं तो

मानव जीवन में समृद्धि नहीं।

देशप्रेम की बारिश न तो

 देश की प्रगति नहीं।

 भाषा प्रेम की वर्षा न तो 

‌भाषा का विकास नहीं।

देश भक्त शासक के प्रेम की वर्षा न तो देश में 

 अमन चैन नहीं।

ममता की बारिश 

 सर्वे संपन्न और सर्वांगीण विकास के‌विलक्षण प्रतिभा।


 


Tuesday, March 17, 2026

बेटियाँ

 बिटिया की किलकारी


एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

18-3-26.

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बिटिया महालक्ष्मी की देन।

 भारतीय रूढ़िवादी 

 देवी स्वरूपा की प्रशंसा 

 करते करते

 उनकी आराधना के साथ साथ,

बेगार भी बनाती थी।

 भ्रूण हत्या करने में 

 ज़रा भी हिचकती नहीं।

 पति के मरते ही जिंदा जलाना।

 बालविवाह शादी क्या है

 जानने के पहले ही शादी।

 विधि की विडंबना से

 पति मर जाएगा,तो

 असीमित वेदनाएँ,

 अमंगल रूप,

 अपशकुन का पात्र।

 जवाहर व्रत न जाने 

 कितनी परेशानियां।

 आज भी शिक्षित युवतियाँ,

 ससुराल में किलकारियां न कर सकती।

 किलकारी मायके के साथ नौ दो ग्यारह हो जाती।

सीता से लेकर मीरा लक्ष्मीबाई तक 

 उर्मिला  तक

 मंदोदरी तक शादी के बाद किलकारी नहीं।

 दमयंती शकुंतला चंद्रमणि तक कितने संकट

 मानसिक पीडाएँ।

 मुमताज के पति को 

 मारकर शाहजहां के अपहरण और  प्रेम महल का नाटक ताजमहल।

 शेरखाँ की हत्या

  बुढ़ापे में शाहजहाँ ने ताजमहल को छेद के द्वारा  देखा।

 आधुनिक 

काल में  बेटियों का 

 समान अधिकार,

  भ्रूण हत्या को दंड

 पोक्सो कानून ,

 जो भी हो 

बेटियों की ‌किलकारियाँ

 अब तक  अंतर्मन में नहीं।

 अधिकांश बेटियाँ,

 छे साल की उम्र में भी

 डर की संभावनाएँ

 पाठशालाओ में 

 अच्छा स्पर्श बुरा स्पर्श 

 की सीख,

 अब शिक्षा, नौकरी।

 पर पुरुष सत्तात्मक 

 दमन नीति कम नहीं हुई।

 नौकरी करके 

घर आते ही

 सब काम,

 दफ़्तर  जाने के पहले

 रसोई, पति की सेवा,

 सास ससुर का डर,

 सामाजिक अफ़वाहें 

 बेटियों की किलकारी 

 अंतर्मन से नहीं,

 दिल में रोती हुई बाहर की किलकारी।

  बेटियाँ बहुएँ बनते ही

  मायके के प्रेम दिखाने में भी पूरी स्वतंत्रता नहीं।


 


 

 




 


 

Monday, March 16, 2026

 देव और दानव 

ऍस. अनंतकृष्णन, चेन्नै
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देव तो सर्वशक्तिमान है, 
सर्वज्ञ है,
फ़िर भी पुरानों में  
दानवों से डरते थे।
दानव देवों को कारावास की सजा देते थे।
कठोर तपस्या मनमाना वर पाकर
असुरों के अत्याचार चरमसीमा पार हो जाते।
हिरण्य कश्यप असुर राजा, अहंकारी,
ब्रह्मा से अजेय होने का वरदान पाया। 
वह खुद अपने को भगवान घोषित किया।
जनता को आज्ञा दी कि हिरण्याय नमः का ही जप करना है। 
नारद के उपदेश के कारण हिरण्यकश्यप् का बेटा प्रह्लाद
भगवान का अटल भक्त बना।
यह भी दानव और देव का संघर्ष। 
हिरण्य का वध करने विष्णु को नरसिंह का अवतार लेना पडा।
भस्मासुर ने शिव से वर पाया कि
जिसके सिर पर वह हाथ रखता, वह सिर चूर्ण चूर्ण हो जाय।
तब विष्णु को मोहिनि अवतार लेना पडा। 
देव असुरों को हरा न सकें तो
तपस्विनि महर्षि मानव दधिची के सामने 
अनुनय विनय करके उनकी रीढ की हड्डि दान लेकर
असुरों को हराना पडा। 
महिषासुर को वध करके देवी महिषासुर वर्द्धिनि बनी।
समुद्र मंथन में शिव को विष पीना पडा।
अत्याचारी दानव और सद्गुणी देव का संबंध
साँप-छछुंदर की गति होती है।













समय का पर्दा

 समय का पर्दा

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३-१२-२५.

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एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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 समय का पर्दा डालकर 

 हर पल को व्यर्थ करनेवाले 

 अलसी/सुस्ती/निष्क्रिय 

 अज्ञानी जीव/

 यों ही जुआ, संगणिक खेल, गपशप,  

विलासिता,ऐश आराम में 

 बिताता रहता है।

 वही समय का पर्दा

 मानव डाल रखा है।

 तड़के उठना वैज्ञानिक धर्म, 

पर समय पर पर्दा डालकर मीठी नींद सोना, 

पर्दा तो है ही,पर

सम पर्दे के पीछे बंधे नहीं,

समय को नकेल से सीधे जाओ, 

नहीं बता सकते।

रुको का पर्दा नहीं डाल सकते।


 अनमोल समय,

पर्दा मानव डाल अपने

 समय गँवाकर बुढ़ापे में 

 तड़पते पछताते रहते हैं।

 समय की परवाह न करने पर

 वह किसी की परवाह नहीं करता।

 रात दिन का चक्र रोक नही़ं सकता।

कल करै तो आज कर,

 आज करै़ तो अभी।

पल में होगा प्रलय।।

 अच्छे दिन पाछे गये

 अब पछताने से होता क्या,

जब चिड़िया चुग गई खेत।

समय का पर्दा हटता नहीं 

 वह तो चलन शील।



 




अजब दौर

 अजीब दौर 

 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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17-3-26

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सर्वेश्वर की सृष्टि में अजीब दौर अनुदिन देखते रहते हैं।

 शबनम दीखन ओझल होना,

 सूर्योदय और सूर्यास्त 

 रात -दिन का

 आना जाना।

  पक्षियों का कलरव।

 मौसमी परिवर्तन,

 वर्षा में मेंढक का टरटराना।

 मोर का नाच।

  पतझड़ में ठूँठ।

 वसंत में पनपना।

 वर्षा में बाढ।

 गर्मी में  चिलचिलाती धूप।

  ग्रीष्म वासस्थल में  बादलों के कोहरा।

 सूर्योदय सूर्यास्त की लालिमा।

 नक्षत्रों का जगमगाना।

 समुद्र की लहरों का शोर।

 मध्य सागर में शांति 

 समुद्र की विचित्र मछलियाँ।

रंग बिरंगे सीपियाँ,

 सीपी मे मोती।

 मौसमी फलों के

 विभिन्न स्वभाव, सुगंध।

 मौसमी फूलों का सौंदर्य

 बड़े आकार के छोटे आकार के

 विभिन्न रंगों के सुगंध के फूल 

 अजीब दौर प्रकृति का।

 तितलियों के विभिन्न आकार 

 कीड़ों का घृणित रूप।

तितलियों का लुभावना रूप।

 अति आकर्षक अजीब दौर 

 प्रकृति का।

 कण कण में अजीब दौर।

 मकड़ी के जाल,

 उस में फँसकर तड़पते जीव।

 भ्रूण अवस्था से बुढ़ापे तक का

 मानव जीवन के अजीब दौर।

 ज्ञान चक्षु प्राप्त मनुष्य की तुलना जानवरों है,

 चींटियों के कतार,

 दीमक के बिल 

 बयां के मजबूत घोंसले।

 रात के अंधेरे में 

 उल्लू बिल्लियों की देखने की शक्ति।

 अति अद्भुत चमत्कार सृष्टियाँ

 अजीबोगरीब दौर भूमंडल का।

 



 

 




 

 


Saturday, March 14, 2026

मौसम मानव

 मौसम और  मनुष्य।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई

सौहार्द  सम्मान प्राप्त तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक  द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

15-3-26

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मौसम एक साल में 

 छे ऋतुएँ।

 मानव जीवन में 

 छे अवस्थाएँ,

 भ्रूण, बचपन, किशोरावस्था,

जापानी, प्रौढ़ावस्था 

 बुढापा।

 हर ऋतु  एक ऋतु से  विपरीत।

 यों ही मानवीय अवस्था भी।

 ऋतु में गुण सहज कृत्रिम नहीं,

 वह प्राकृतिक देन।

 मानव गुण परिवर्तन शील।

 संगति के अनुसार,

 मानव गुण में परिवर्तन।

शिक्षित मानव गुण।

  अनपढ़ मानव गुण,

 आदिवासी मानव गुण 

 स्वार्थ निस्वार्थ गुण

 लोभ के गुरु ईर्ष्यालु गुण

 अहंकारी गुण।

 नायक गुण, खलनायक गुण, विदूषक गुण 

 पतिव्रता के गुण 

 लंबी के गुण

 वीरांगना के गुण 

 विषकन्या वारांगना गुण

 वैसे ही वर्षा की बूंदों में 

 गुण परिवर्तन।

 एक बूंद मोती तो एक बूंद मोरे में मिलर बदबू।

स्वाती नक्षत्र वर्षा के गुण 

 सर्प में विष् कदली में स्वाद, सीपी में मोती।

  मौसम और मनुष्य में 

 मनुष्य में इन्सानियत,

 प्रकृति में भी शांत प्रकृति, हिंसात्मक प्रकृति।

 वसंतकाल पतझड़।

 मलय पवन,

 आंधी तूफ़ान

दावानल

मोसम और मानव 

 दोनों दयालू और निर्दयी।

मानव प्रदूषण प्रकृति को बिगाड़ता तो

 प्रकृति मौसम दुख प्रद ही।



 







 

 

 

 

 




 



 

 

Thursday, March 12, 2026

व्यथा

 मन की व्यथा

ऍस. अनंतकृष्णन, चेन्नै, तिलनाडु 13-3-26.

मानव जीवन में मन की व्यथा,

जन्म से लेकर जीवन पर्यंत।

मनुष्य का जन्म अंधकारमय गर्भ से,

उजाले की ओर रोते हुए होता है।

भूख लगने पर रोना,

पेट भरते ही हँसना यही शैशवावस्था।

आधुनिक शिशु की व्यथा,

तीन साल की उम्र से प्रारंभ।

तभी वह प्रि के.जी।

शिशु को हरफनमौला बनाने

तकाजा, पाठशाला से आते ही

ट्यूशन का तकाजा,

सोलह साल की उम्र तक 

परीक्षा और अंक की चिंता।

तब शारीरिक परिवर्तन,

स्वर परिवर्तन,

काम वासनाएँ,

अश्लील चित्रपट के चित्र,नाचगान।

जितेंद्र रहना अति मुश्किल।

लडके -लडकियों के संयमित जीवन की चिंता।

उच्च शिक्षा और अच्छी नौकरी की चिंता।

योग्य पात्र से विवाह की चिंता।

संतान की चिंता,

संतान न होने की चिंता।

आर्थिक अभाव की चिंता.

पदोन्नति की चिंता।

ईर्ष्या के कारण चिंता,

लोभ के कारण चिंता।

काम की चिंता,

तलाक की चिंता।

महँगाई की चिंता,

भ्रष्टाचार की चिंता

मन में व्यथा की लहरें।

ज्वारभाटा कभी शांत नहीं होता।

पल पल में नयी नयी व्यथाएँ।

प्राकृतिक प्रकोप की चिंताएँ।

कुशासन के कारण चिंता।

मच्छरों के कारण.

पत्नी और माँ के बीच

साँप छचूंदर की गति होना।

कौन सी भगवान श्रेष्ठ है की व्यथा।

मन की व्यथा का अंत नहीं।