विश्व ग्रामीण विकास दिवस।
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
7-7-26.++++
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नगर नगरीकरण, नगर विस्तार
प्रकृति का विनाश।
केवल धन का उद्देश्य।
परिणाम ग्राम काली होना।
धन से तन का स्वास्थ्य
पौष्टिक आहार,
अन्न, धान,सब्जियाँ
खरीद सकते हैं।
और ग्रामीण लोग
खेती न करते तो
धनी शहरी लोग भूखों मर जाते।
ग्राम शहर के सुखी जीवन जीने रीढ़ की हड्डियाँ हैं।
स्वस्थ शरीर,रक्त संचार
ग्रामीण लोग
कृषी न करते तो बेकार।
अतः ग्राम राज्य की स्थापना,
विश्व ग्रामीण दिवस
मनाकर ,
ग्रामोत्थान के लिए
लोगों को जगाना है।
ग्रामों में स्वच्छ वातावरण।
साफ हवा,
न वायु,जल,भूमि
प्रदूषण।
न विचार प्रदूषण।
हर साल जुलाई में तारीख को मनाने वाले
ग्रामोत्थान दिवस
ग्रामीण लोगों की शिक्षा,
पानी की व्यवस्था,
आवागमन की सुविधाएँ,
स्वास्थ्य केंद्र,
भोजन आदि
बुनियादी सुविधाएँ,
देना,
खेती के विकास योग्य
बीज, खाद, आर्थिक सुविधाएँ,
गाय,बैल,बकरी, मुर्गा
पालने की व्यवस्था,
सहकारी समिति की स्थापना।
सरकारी सहायता की जानकारी आदि।
जय किसान का नारा
यही ग्रामीण विकास दिवस का लक्ष्य।
संत तिरुवल्लुवर ने कहा
சுழன்றும்ஏர்ப் பின்னது உலகம் அதனால் உழந்தும் உழவே தலை".
संसार उद्योग,धंधा, शिक्षा आदि की तरक्की करने पर भी
कृषी पर ही आधारित है।
अतः ग्रामीण विकास को ही प्राथमिकता देनी है।
एस.अनंतकृष्णन।
विश्व ग्रामीण विकास दिवस
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडुहिंदी प्रेमी प्रचारकदिनांक: 7-7-2026
विश्व ग्रामीण विकास दिवस
नगरों का विस्तार,नगरीकरण की अंधी दौड़,प्रकृति का होता विनाश—केवल धन कमानाजब जीवन का उद्देश्य बन जाए,तब गाँव उजड़ने लगते हैं।
धन से पौष्टिक आहार,अन्न, धान और सब्जियाँखरीदी तो जा सकती हैं,पर यदि ग्रामीण किसानखेती करना छोड़ दें,तो धनवान नगरवासी भीभूखे रह जाएँगे।
गाँव ही हैंशहरों के सुखी जीवन कीरीढ़ की हड्डी।किसानों के श्रम से हीस्वस्थ शरीर,रक्त का संचारऔर जीवन का आधारबना रहता है।
अतः ग्रामोत्थान का संकल्प लेकरविश्व ग्रामीण विकास दिवस मनाएँ,और जन-जन कोग्रामीण विकास के लिए जागरूक बनाएँ।
गाँवों में होस्वच्छ वातावरण,शुद्ध वायु, निर्मल जल,उपजाऊ भूमि,और प्रदूषण-मुक्त विचार।
ग्रामीणों को मिले—उत्तम शिक्षा,स्वच्छ पेयजल,सुगम आवागमन,स्वास्थ्य केंद्र,पौष्टिक भोजनतथा सभी बुनियादी सुविधाएँ।
कृषि के लिएउन्नत बीज, खाद,आर्थिक सहायता,पशुपालन की सुविधाएँ,सहकारी समितियों की स्थापनाऔर सरकारी योजनाओं की सही जानकारीहर किसान तक पहुँचे।
"जय किसान" का नारातभी सार्थक होगा,जब हर गाँवसमृद्ध और आत्मनिर्भर बनेगा।
महान संत तिरुवल्लुवर ने कहा है—
"சுழன்றும் ஏர்ப் பின்னது உலகம்; அதனால் உழந்தும் உழவே தலை."
अर्थात—संसार चाहे उद्योग, व्यापार और शिक्षा मेंकितनी भी उन्नति कर ले,उसका आधार अंततः कृषि ही है।इसीलिए ग्रामीण विकास कोसर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
— एस. अनंत कृष्णन
