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Saturday, January 31, 2026

मजदूर

 मजदूर के हाथ।

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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1-2-26

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मैं करोड़ पति हूँ।

 कारखाना खोलना है,

 घर बनवाना है।

 पूँजी मेरे हाथ में।

 मैं इंजीनियर हूँ,

 योजना है

 मैं उद्योग पति हूँ

 मैं सिनेमा निर्देशक हूँ।

पर उपर्युक्त लोगों की योजना लागू करने

 चाहिए मजदूर के हाथ।

 स्वर्ण और हीरे का खान।

 कोयले के खानों का पता लगा है।

 पर इन सब को निकालने

 मजदूर के हाथ।

शहर भर कूड़ा कचरा है

 निकालने  चाहिए 

 मज़दूर के साथ।

 नल की व्यवस्था 

 बिजली की सुविधा 

 सब के लिए चाहिए 

मजदूर के हाथ।

 खेत में बीज बोने

 फसल काटने

 बोरे में बाँधने 

चाहिए 

मजदूर के हाथ।।

 मजदूर नहीं तो

  गड्ढे खोदकर

 बिजली स्तंभ का

 स्थापित करना असंभव।

माली न तो बाग नहीं।

 हर हाल, अस्पताल मंदिर साफ रहना है तो

 चाउ मजदूर के हाथ।

शौचालय सार्वजनिक 

स्थान में 

 साफ़ करने मज़दूर के हाथ।,

 पैसे, बड़े पद, रईश आदि  मजदूर साथ हाथ न देगा तो 

 कुछ न होगा जान।

मजदूर के हाथ मजबूत।

 हर क्षेत्र में मजदूर 

 के साथ न लगने पर

 सारे काम चौपट जान।।












 


Thursday, January 29, 2026

लाला लाजपत राय

 +लाला लाजपत राय++++++++++++++++

एस . अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

+++++++++30-1-26


भारत के स्वतंत्रता

 संग्राम में तीन नाम लाल-पाल-बाल के नाम से प्रसिद्ध हैं।

 लाल का मतलब लालालजपत राय।

 पाल का मतलब है

 विपिन चंद्र पाल।

 बाल का मतलब है

 बालगंगाधर तिलक।

 लाला लाजपत राय है

 पंजाब के सिंह।

 लाहौर में साइमन कमिशन के विरुद्ध 

 आंदोलन में लाठीचार्ज सहे। इसी कारण वे देश के शहीद हो गए।

 अपने प्रिय नेता की मृत्यु के कारक पुलिस अधिकारी 

सांडर्स को भाग्य सिंह, सुखदेव चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु मिलकर 

 हत्या कर दिया।

 इस कारण से ही 

तीनों को अंग्रेजी सरकार ने फाँसी पर चढ़ा दिया।

 लाल ने  पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना की।

हिंदी  के प्रचार में उनका योगदान भी महत्वपूर्ण है।

 उनके यादगार में अनेक संस्थान की स्थापना हुई।

लाला लाजपत राय की जय हो।

उनके देशभक्ति मार्ग पर चलना ही हर भारतीय को उनके प्रति बड़ी श्रद्धांली होगी।

Wednesday, January 28, 2026

कल्पनाएँ

 कोमल कल्पनाएँ

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

29-1-26

++++++++++

कोमल कल्पनाएँ,

परिस्थितिवश

 कठोर भी हो जाती है।

सर्वे जना सुखिनो भवन्तु 

 जय जगत

 वसुधैव कुटुंबकम् 

 ये कोमल कल्पनाएँ।

 मंडन मिश्र का तोता

 वेद मंत्र सुनाता।

 डाकू का तोता 

विपरीत।

 भद्रकुल की कलपनाएँ कोमल,

विश्वकल्याण के लिए।

खलनायक, चुनाव लड़नेवालों की कल्पना 

 विपरीत।

करोड़ों के खर्च 

कैसे पाँच साल में 

कमाना शत्रु पक्ष

 को हराने के षडयंत्र 

 कल्पनाएँ।

 साहित्यकार की कल्पना 

 जगतोद्धार के लिए 

उनमें धन लोभी स्वार्थी 

 साहित्यकार समाज बिगाड़ने अश्लील कल्पनाएँ।

 ईमानदारी अधिकारियों की कलपनाएं कोमल

 जनकल्याणकारी।

पर भ्रष्टाचार रिश्वतखोरों की कल्पनाएँ न्याय विरुद्ध।

 रत्नाकर कीकल्पना 

  चोरी डाकू,

वाल्मीकि ने कल्पना 

दिव्य शक्ति भक्ति।

राष्ट्र प्रेमियों की कल्पना 

 आंबी जैसे देश द्रोही की कल्पना कठोर।

 तटस्थ परोपकारी लोगों की कल्पना अलग।

 कर्ण के जैसे।

 दुर्योधन के संग

 कृतज्ञतावश अलग।

 पाश्चात्य देशवासियों की कल्पना जन हित 

आविष्कार। पर

 भारतीय कल्पना 

 जगत मिथ्या,

ब्रह्म सत्यं 

 ईश्वर भक्ति।

 भारतीय सुखी वातावरण 

 भोजन पदार्थ के

 हजारों किस्म।

शांति अहिंसा प्रिय देश।

 अतः कल्पनाएँ कोमल 

 मानव कल्याणकारी।

 सोचिए विचारिए 

 देश कल्याण की कल्पनाएँ।

समाज कल्याण की कल्पनाएँ 

 मातृभाषा रक्षा की कल्पना।

विश्व हित की कल्पनाएँ।

हिंदी और तमिलनाडु प्रचारक

 You tube. सम्मान पत्र ठीक  है, लेकिन दर्शक कम।

 हमेशा की तरह प्रमाण पत्र देंगी तो 

बढ़िया रहेगा।

 हम  भी अलग संकलन करने की सुविधा होगी।

 इस शुभ कार्य में 

 धनी भारतीय भाषा प्रेमी

 सहयोग राशि भेज सकते हैं, कवियों को भी विशेष सम्मान दे सकते हैं।

आदि काल से भारतीय भाषाएँ व्यक्तिगत धनियों के कारण ही जिंदा है।

 लेखक सब धनी नहीं है।

 तमिलनाडु में तो नौकरी की संभावना ही हिन्दी के द्वारा नहीं।

तमिलनाडु के प्रचारक 

 त्यागी बनकर हिंदी की सेवा कर रहे हैं।

 खासकर तमिलनाडु के हिंदी सेवकों को प्रोत्साहित करना है।

 आप लोग हिंदी प्रोफेसर, हिंदी अधिकारी डाक्टरेट का ही हिन्दी सेवक मानकर बढ़िया रकम दे रहे हैं।

 तमिलनाडु में हिंदी सीखनवालों की संख्या डाक्टरेट लाखों कमानेवालों से नहीं,

 तन मन से हिंदी प्रचार सभा की उपाधि लेकर 

  हजारों प्रचारक हिंदी सबेरे और शामको हिंदी चाहकों को हिंदी सिखा रहे हैं। इनके समर्थन में 

 न केंद्र सरकार और न राज्य सरकार।

 ये LIC Agent के समान सभा के परीक्षार्थी संख्या के आधार पर कमिशन से जी रहे हैं।

 इनकी हालत न समझ कर उनको प्रोत्साहित न करके एक लाख दो लाख मासिक वेतन लेकर दस विद्यार्थियों के प्रोफेसर  को ही ‌प्रोत्साहित कर रहे हैं।

 तमिलनाडु में हिंदी प्रचारकों की हालत जानना है।

 कम आमदनी अधिक परिश्रम।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

  

 



Tuesday, January 27, 2026

 आत्मकथा हिंदी सेवा का मूल्य । 

एस. अनंत कृष्णन चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

 

आपके भाव, अनुभव और गर्व को केंद्र में रखकर—सरल, स्पष्ट और सच्चे स्वर में:

मैंने हिंदी को कभी आजीविका का साधन नहीं बनाया, फिर भी हिंदी ने मुझे जीवन में गौरव दिया। धन की दौड़ में जब चारों ओर लोग अंग्रेज़ी को सफलता की कुंजी मान बैठे, तब भी मैंने भारतीय भाषाओं का साथ नहीं छोड़ा। हिंदी के प्रचार के लिए मुझे विरोध सहना पड़ा, अपमान झेलना पड़ा, यहाँ तक कि अपने ही प्रदेश में “द्रोही” कहे जाने का कष्ट भी उठा। परंतु इन सबके बीच मेरा आत्मसम्मान कभी डगमगाया नहीं, क्योंकि मुझे यह विश्वास रहा कि मैं गलत नहीं, अपने दायरे में सही कर रहा हूँ। साहित्य से मिलने वाला पारिश्रमिक भले ही कम रहा हो, पर हिंदी के कारण जो आत्मिक संतोष और पहचान मुझे मिली, वह किसी धनराशि से बड़ी है। आज भी मैं यही मानता हूँ कि हिंदी की सेवा करना मेरे लिए घाटे का सौदा नहीं, बल्कि जीवन का सौभाग्य है—और यही मेरा गर्व है।

[27/01, 9:18 pm] sanantha.50@gmail.com: आप तो गलत समझा रहे हैं।

आपने पहले ही कह दिया 3500/रूपये दूँगी।


मैं तो मान लिया और लिख दिया।

 आपने पैसे भी भेज दिये।

धन्यवाद जी 

++++++++++++

 मुझे मालूम है कि प्रकाशन करना  

 मुश्किल है।

 मैंने लेखकों की बुरी    दशा लिखा है।

 बस इतना ही।

 आप प्रकाशित करेंगे तो

 दो तीन प्रतियाँ भेजिए।

 आपने कहा मेरा नाम भी लिखा जाएगा।

धन्यवाद।

संक्षिप्त रामायण लिखी अनुवाद किया।

 रामायण प्रचार परिशोधन प्रतिष्ठान ने प्रकाशित किया।

 उसमें मूल लेखक डा.विशाल भरद्वाज ट

का नाम 

 और अनुवादक मेरा नाम लिखा है।

 अंतिम पृष्ठ में मेरा परिचय भी।

 वह आध्यात्मिक सेवा बिल्कुल मुफ़्त।

 भगवान देगा तो छप्पर तोड़कर देगा। लेगा तो छप्पर उड़ाकर लेगा।

जय श्रीराम।

 हिंदी विरोध प्रांत में 

 सर्वत्र हिंदी विरोध।

 तमिलनाडु सरकारी स्कूल में स्नातकोत्तर अध्यापक।

 ईश्वरीय देन।

[मैं पंद्रह  हजार की प्रतीक्षा में था।

 कम से कम दस हजार।

 एक मज़दूर  भी दो घंटे काम के लिए ढाई हज़ार माँगता है।  

 एक भिखारी भी अधिक कमाता है।

 3500/तो अधिक कम है।

 

पर साहित्यकार सब की स्थिति है ऐसी ही है।

 दिमाग से लड़ते हैं,

 प्रकाशन खर्च अलग।

 रामशंकर  झांसा के प्रसिद्ध कवि, 

वे अपनी पुस्तकों  की ताँता लगाकर  अपनी राम कहानी लिखते हैं।

 हिंदी किताबें किलो 

 15रूपये।

 अतः पता चलता है कि भारतीय भाषाओं का महत्व धीरे धीरे  युवकों के मन से मिट रहा है।

 इसलिए मैं धन को प्रधानता न देकर  हिंदी की सेवा  कर रहा हूँ।

 भारतीय भाषाएँ  देवभाषा  संस्कृत भी मृत्यु दशा में।

 125 वर्ष की खड़ी बोली

 व्रज माधुरी , मैथिली, अवधि आदि से नौ दो ग्यारह हो रहे हैं।

 हिंदी के विकास को रोकने तमिलनाडु कटिबद्ध है।

 अर्थ को छोड़कर 

 भारतीय भाषाओं की रक्षा करने हिंदी विरोध आंदोलन के समय मैं मार खाकर अपमान सहकर 

 तमिल द्रोही की उपाधि पाकर देश की एकता के लिए हिंदी का प्रचार कर रहा हूँ। सब ने कहा, हिंदी छोड़ो, गणित सीखो। मालामाल बन जाओगे।पर सच्चे सेवकों के साथ भगवान रहता है।

 आगे अंग्रेज़ी मोह से भारतीय युवक युवती सांसद विधायक सरकारी अधिकारी जिला देश,शिक्षा विभाग  के अधिकारी एंटी कंपनियां, निजी उद्योग जीविकोपार्जन के साधन के इस जमाने में 

 भारतीय भाषाओं की रक्षा सिवा  मानवेत्तर शक्ति ही कर सकती है।

 अनेक प्रांत  महाराष्ट्र   तक हिंदी   के विरोध में 

 कर्नाटक भी।

 भारत भर में  अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूल  बढ़ रहे हैं। वहाँ नाम मात्र के लिए भारतीय भाषाएँ

 दसवीं कक्षा तक।

 उसके बाद अंग्रेज़ी माध्यम  अंग्रेज़ी मिश्रित 

संवाद में कितने गौरव 

 युवक युवतियाँ

 अनुभव करती हैं,

 भारतीय भाषाओं के पतन युवकों की अंग्रेज़ी प्रियता विज्ञापनों में 

 मोटे अक्षरों में अंग्रेज़ी 

  भारतीय भाषाएँ

 सिगरेट बाक्स में 

 धूम्रपान  फेफड़ों के लिए बरा है लिखने के समान है।

 शराब बोतल में 

शराब पीना घर और देश के लिए खराब लिखने के समान है।

 केंद्र सरकार और प्रांतीय सरकार दोनों दिल से अंग्रेज़ी स्कूल खोलने की अनुमति ।

 अनुमति लेने अब पचास लाख तक भ्रष्टाचार  ।

जय हिन्दी बाहर

व्यवहार में जीविकोपार्जन की भाषा 

धन कमाने की भाषा

उच्च शिक्षा की भाषा 

सर्वव्यापी अंग्रेज़ी राज।।

 एक पृष्ठ टंकण के लिए 

 सौ रूपये।

डाक्टर दस मिनट कंसल्ट के लिए हज़ार रूपये।

सद्यःफल जनता देने तैयार।

 एक कविता के अनुवाद 

  यों ही नाड़ी देख कर नहीं,

 चिंतन चिंतन उचित शब्द का प्रयोग फिर टंकण।

 हृदय से साहित्यकार को 

 पैसे दे नहीं सकते।

 क्योंकि एक किताब को प्रकाशित करके जन जन तक पहुंचाना आसान नहीं।

हो सकता है हिंदी प्रांत की सरकार पैसे दे सकती है।

पर उनके अपने नियम हैं।

मेरे दोस्त एक लाख तक खर्च करके बिक्री के अभाव में रो रहा है।

 संस्कृत के महान ब्राह्मण 

धन या संस्कृत के सामने धन को अपना लिया।

 विदेश में भारतीय वेद उपनिषद  अंग्रेज़ी माध्यम के कारण नित्यानंद जो भारतीय  अधिकारियों के सामने  अपराधी है,

वह अरबपति एक अलग देश के निर्माण।

 भारतीय भाषाओं के कारण नहीं अंग्रेज़ी के कारण।

 कोई भी राजभाषा अधिकारी,

 हिंदी प्राध्यापक 

 सांसद विधायक 

 अपनी संतानों को भारतीय भाषा माध्यम के द्वारा शिक्षा देना अमर्यादित अपमानित मानता है।

संस्कृत के प्रकांड विद्वान अंग्रेज़ी शासन काल में 

तुरंत अंग्रेज़ी के सिलवर  टंक  नाम पाने,

अंग्रेज गुमास्ता बनने,

 उनके खुशामद करने में अपनी दिव्य भाषा

 यहाँ तक गायत्री मंत्र भी भूल गये।

 अर्थ प्रधान ब्रह्मांड में 

 चांदी सोने के सिंहासन हीरे के मुकुट के आश्रम आचार्यो को मालामाल बनाने में लोग तैयार।

 अपनी भाषा की बरबादी पर विचार देने न तैयार।

  अंग्रेज़ी के डाकमेट के टंकण में एक दिन हजारों की आमदनी।

 अनुवादक अपने 

समय  को  एक मजदूर में लगने पर हजार रुपए।

 सोचिए उपन्यास सम्राट भी ग़रीबी में।

  अतःआज की परिस्थिति में आम विद्वत जनता हिंदी के लिए खर्च करने तैयार नहीं।

हर गाँव में अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल।

 हर गाँव में विदेश में नौकरी।

 मेरे शहर पवनी में 

 हर घर मे विदेशी नौकरी।

 उनके लिए रूपये हाथ का मैल।

अड़ोस पड़ोस देखने पर कर्जा लेकर अंग्रेज़ी माध्यम पढ़ाने तैयार।

आ सेतु हिमाचल में यही स्थिति है।

 मातृभाषा के पंडितों के घर में पैसों की तंगी।

 मनःसाक्षी से बोलिए 

 दिव्य भाषा संस्कृत से अधोगति की हालत में 

 भारतीय भाषाएँ।


एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

Monday, January 26, 2026

राष्ट्रीय बालिका दिवस एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 27-1-26 +++++++++++++++ नमस्ते वणक्कम्। ++++++-++++++ बालिका बालांबिका देवी स्वरुपा उनकी रक्षा के लिए उनको शक्ति स्वरूपा ज्ञान स्वरुपा, तन स्वरूपा त्रिदेवियों का स्वरूपा सप्त कन्या सप्त माता स्वरूपा की आराधना देवियाँ रामायण, महाभारत काल से अपमानित स्त्रियाँ काली का भयंकर स्वरूप, मीनाक्षी देवी का शांत स्वरूप, हमारे मुनि ऋषियों ने सम्मानित बालिकाएँ फिर भी समाज में वह भोग की वस्तु बनी। छः साल की बच्ची से बलात्कार, लड़कियों की सुरक्षा नहीं, इससे बड़ी निर्दयता गर्भ में लड़की है के जानते ही भ्रूण हत्याएँ। इन सबके कारण अबला को सबला बनाने, राष्ट्रीय बालिका दिवस नारी जागरण के लिए नारी की अपनी शक्ति समझने समझाने के लिए नर तुल्य बनाने के लिए बालिका दिवस। सती प्रथा, जवाहर व्रत विधवा का अपमान, किसी पुरूष से बोलने पर वारांगना के अपशब्द विधवा स्त्री को आम मंगल कार्य करने से रोकना। भरी सभा में अपमानितकरना नारी को रखकर जुआ खेलना धंधा करना, इन सब से बालिका राष्ट्रीय दिवस। नारी जागरण नारी का संपत्ति अधिकार अराजकल की नारियाँ शिक्षित हैं। ये सब सुथार और भी सुदृढ करने राष्ट्रीय बालिका दिवस।

 राष्ट्रीय बालिका दिवस 

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

27-1-26

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नमस्ते वणक्कम्।

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बालिका 

बालांबिका

देवी स्वरुपा

 उनकी रक्षा के लिए 

 उनको शक्ति स्वरूपा 

 ज्ञान स्वरुपा,

 तन स्वरूपा

 त्रिदेवियों का स्वरूपा

सप्त कन्या

 सप्त माता

स्वरूपा 

की आराधना देवियाँ

 रामायण, महाभारत काल से  अपमानित स्त्रियाँ

काली का भयंकर स्वरूप,

 मीनाक्षी देवी का शांत स्वरूप,

हमारे मुनि ऋषियों ने 

सम्मानित बालिकाएँ

फिर भी समाज में 

वह भोग की वस्तु बनी।

छः साल की बच्ची से बलात्कार,

लड़कियों की सुरक्षा नहीं,

 इससे बड़ी निर्दयता 

 गर्भ में लड़की है के

जानते ही भ्रूण हत्याएँ।

इन सबके कारण 

 अबला को  सबला बनाने,

  राष्ट्रीय बालिका दिवस 

 नारी जागरण के लिए 

 नारी की अपनी शक्ति 

 समझने समझाने के लिए 

 नर तुल्य बनाने के लिए 

बालिका दिवस।

 सती प्रथा,

 जवाहर व्रत 

 विधवा का अपमान,

 किसी पुरूष से बोलने पर

वारांगना के अपशब्द 

 विधवा स्त्री को आम मंगल कार्य करने से रोकना।

भरी सभा में अपमानितकरना

 नारी को रखकर

जुआ खेलना

 धंधा करना,

 इन सब से बालिका

 राष्ट्रीय दिवस।

नारी जागरण 

 नारी का संपत्ति अधिकार 

 अराजकल की नारियाँ

 शिक्षित हैं।

ये सब  सुथार और भी

 सुदृढ करने

 राष्ट्रीय बालिका दिवस।

Sunday, January 25, 2026

गणतंत्र दिवस

 गणतंत्र दिवस 

++++++++++++++

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 

तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

26-1-2026

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नाचेंगे 

आनंद नर्तन करके,

शहर शहर गाँव-गाँव 

 मेरा जुलूस मनाएँगे।

हर एक भारतीय का

 अपना एक महत्व है,

हर्षोल्लास कोलाहाल से

इस अद्भुत पर्व दिन,

विभिन्न मज़हबी,

त्योहार

 अलग -अलग भक्ति,

 पर  सब मिल जुलकर 

 सहोदर भाव से

 मनाने का राष्ट्रीय त्योहार 

 यह गणतंत्र दिवस।

विश्व भर के भारतीयों के,

हर्षोल्लास के अपूर्व दिन।

एक स्वर में  नारा लगाएँगे,

 देश प्रेम, देश भक्ति श्रद्धा से

जय भारत!

जय हिन्द!

 वंदे मातरम्!

 सारे जग में 

 यह आनंद नारा

 विश्व भर में गूँज उठें।

76 साल बीत गये,

धर्म निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक देश में,

 सब को समान अधिकार,

पर यही

 खेद की बात है 

 व्यवहार में, 

अल्पसंख्यकों का अत्यधिक सुविधाएँ,

  भारत देश में 

 मजहबी स्वतंत्र,

 अल्प संख्यकों को

 सब प्रकार  की आर्थिक सहायता,

 अब 76साल हो गये

 अल्पसंख्यकों के 

अधिकार को मिटाकर 

 सब के लिए 

समान अधिकार 

 चाहिए,

कम अंक अधिक आयु 

आदि सहूलियतें मिटानी चाहिए।

 एक ही परिवार,

 सब को छात्रवृत्ति 

  गरीब उच्च जाति 

 प्रतिभाशाली होने पर भी

 जाति के आधार पर,

छात्रवृत्ति, नियुक्ति 

 संविधान के समान अधिकार का शाश्वत दाग।

 सरकारी दफ्तरों के भ्रष्टाचार 

 चुनाव में  धन का मनमाना प्रयोग।

 जिसकी लाठी उसकी भैंस।

 न्यायालय के फैसला फैसला है,

 लागू में लाना 

 न्यायाधीश पर कलंक लगाना,

 ये जनतंत्र देश में 

 न्याय नहीं,

धन और बल का अधिकार।

ज़रा खुशी के अवसर पर 

  संविधान के  लिखित रूप

 व्यवहार में नहीं।

 इसे बदलना होगा।

 तभी गणतंत्र का महत्व।

ओट देने में नोट का महत्व 

 नाश होना चाहिए।

तभी 100% जनतंत्र की

 सफलता होगी।

आनंदोल्लास सभी भारतीयों को आनंद देगा।





 



 


 



 



 

 


 


 


 



 


 


 


 

 

 










 

 

 

 
















नागरी लिपि दिवस

 नागरी लिपि की कमियों 

 पर जितना भी ध्यान दें

‌कमी रहित कहना    

 नामुमकिन है।

 हर भाषा की अपनी ध्वनियाँ हैं, 

 ज, ज़ 

तमिल में तीन न है

 ண.ந.ன.

ந ன दोनों के लिए 

तमिल में न का ही प्रयोग है।

 ण --ண. 

ट वर्ग का अंतिम अक्षर।

त वर्ग न। ந.

ன र के बाद यह  नागरी लिपि में नहीं है।

वैसे ही ल के तीन रूप

ல/ழ/ள.

इसको ल,ऴ,ळ का रूप दिया गया है।

 कुछ लोग ऴ ழ को 

ष़  लिखते हैं। 

 इसमें मत भेद है।

  दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा  में பழைய தும் புதியதும் को 

पष़ैयतुम  ही लिखते हैं।

 इनका मानक रूप चाहिए।

 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा  संदैह निवारण के लिए 

 लिखित विचार।

Thursday, January 22, 2026

छत्रपति शिवाजी

 छत्रपति शिवाजी 

एस. अनंतकृष्णन चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

23-1-26

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भारत भूमि ज्ञान भूमि

 आध्यात्मिक पक्ष भूमि 

 वीर धीर गंभीर भूमि

  अहिंसा परमो धर्मप्पः 

त्याग की शांत भूमि।

 अतिथि देवो भव

 के उद्देश्य लेकर 

 सबका स्वागत किया 

 लुटेरे विदेशी 

 त्यागमय भारत को 

 द्रोहियों को प्रलोभन देकर 

 भारत के शासक बने।

 ऐसे समय पर  

 भारत में युग पुरुष और

 युग वीर देशभक्त का 

होता है जन्म।

क्रांति वीर,।मुगलौं का सिंह स्वप्न थै  

छत्रपति शिवाजी।

 आध्यात्मिक गुरु 

 रामदास के मार्गदर्शन

 पर वे आदर्श गुरु भक्त बने।

 अपनी छोटी सेना में 

‌जाति मजहब के भेद 

बिना  सबको अपनाया।

  माता की  सीख उनको

 वीर धीर चतुर  देश भक्त

 हिंदू भक्त बनाया।

 उनकी युद्ध नीति  अपूर्व थी।

 शत्रुओं को अडघनै देना,

उनका मार्ग रोकना,

 खाद्य-पदार्थों को 

  मिलने न देना,

 अफजल खां का षडयंत्र 

 जानकर दोस्ती के नाम से

 गले लगाकर बघनखे द्वारा मारना,

औरंगजेब के कारावास से मिठाई कै झांसे में 

 छिपकर बचना

 मुगलों के लिए 

 उनका छापामार 

 अति खतरा बना।

 अंग्रेज़ी के प्रति उन्होंने 

 खतरे का सावधान था।

 वीर छत्रपति शिवाजी

 भारतीय युवकों के लिए 

 अनुकरणीय देश भक्त ,

वीर, साहसी शासक।

उनकी घोषणा थी,

 देश के लिए 

 जिनमें ज्ञान है

 ज्ञान से देश भक्ति 

और देश की सेवा करना।

जिनमें बल है,

देश की सुरक्षा और 

 अमन चमन पर सतर्क रहना।

जिनके पास धन है

आर्थिक सहायता करना।

 जो न

दुर्बल है,

सच्चे मन से

 प्रार्थना करना।

आज भी चेन्नई तमिलनाडु में 

 कालिकांबाल मंदिर प्रसिद्ध है, 

जहाँ शिवाजी आकर 

 देवी से प्रार्थना की।

 भवानी माँ के भक्त 

 वीर शिवाजी 

 मराठा राज्य की स्थापना करके 

 भारतीयों में 

 सनातन धर्म और हिन्दू राष्ट्र स्थापित करने का संदेश दिया।

 जय जय 

छत्रपति शिवाजी।

 उनकी जीवनी पढ़ना

अनुकरण करना

 हर भारतवासी के लिए 

 प्रेरणादायक है।

 देश भक्त वीर कुशल शासक,

शिवाजी महाराज की जय।



  









 



 


 


 

 


 

 


मधुर स्मृति

 मधुर स्मृति

+++++++++++

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु 

22-1-25

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मानव जीवन में,

 बचपन से बुढ़ापे तक की

 मधुर स्मृतियाँ अनेक।

 मेरे जीवन की मधुर स्मृतियाँ उनमें  एक है

 तमिलनाडु के हिंदी विरोध आंदोलन।

1967की बात।

 तभी मैं और मेरी माँ

श्रीमती गोमती जी 

हिंदी विश्वविद्यालय 

आरंभ करके 

 हिंदी के प्रचार में लगे।

 मेरी माँ 1957से अंतिम साँस तक हिंदी वर्ग चलिती रही। 

मेरी हिंदी अभिमन्यु समान माँ के गर्भ से मिली।

 माँ के सामने बैठकर

 न सीखी हिंदी।

कितने दोहे पद याद है

 मैं बैठकर न रटा।


तब हिंदी  विरोध का बड़ी जुलूस निकला।

 वे मेरे घर के सामने 

 खड़े होकर 

नारा लगाने लगे।

मूडु मूडु हिंदी विश्वविद्यालय नटत्ताते।

अर्थात 

बंद करो,बंद करो,

 हिंदी विद्यालय बंद करो।

 मत चलाओ, मत चलाओ हिंदी विश्वविद्यालय मत चलाओ।

 जुलूस से कुछ लोग 

 पत्थर भी फेंकने लगे।

 तब मैं बाहर गया तो

 उन से कहा विदेशी भाषा गुलाम बनाती भाषा,

 अंग्रेज़ी सीखने से ही

 तमिल का नाश होगा।

 क्रिया आगे कर्म पीछे।

 हमारी भाषाएँ

 कर्म आगे, क्रिया पीछे।

पढ़ता हूँ पुस्तक नहीं,

 बोलता हूँ हिंदी नहीं,

पुस्तक पढ़ता हूँ,

 करने का पता आगे

 अंग्रेज़ी में पता नहीं,

 क्रिया आगे पता नहीं 

 कर्म क्या है।

जीविकोपार्जन करने

 अंग्रेज़ी सीखना सही है तो

 हिंदी सीखने बहुत गुना सही है।

 पुलिस के आने से सब चले गये।

 देखता हूँ हिंदी विरोध 

 पुरुषों के घर की महिलाएँ  हिंदी सीखने आयीं।

 आजकल जैसे मंदिर विरोध मुख्यमंत्री स्टालिन की पत्नी  दुर्गा स्टालिन 

 मंदिर मंदिर जाती हैं।

 हिंदी वर्ग में छोड़ने

 ले जाने हिंदी विरोध पुरुष बाहर खड़े रहते।

 वह मधुर स्मृति 

भूल नहीं सकता।

 आज भी तमिलनाडु में 

 महिला   प्रचारिका 

 और छात्राएंँ अधिक।

 सत्रह साल के वह हिंदी प्रचार, 76 साल की उम्र 

 हरी भरी से।

 दुरंगी राजनीति 

 भक्ति में

 और हिंदी प्रचार में 

स्वार्थ की चरम सीमा पर

 तमिलनाडु में।

 दोनों में भीड़ अधिक।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

 


 


  





 

 

 

 

 




 


Sunday, January 18, 2026

ஃआशीर्वाद

 आशीर्वाद 

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई 

19-1-26.

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भारतीय शास्त्रों में 

 वेद उपदेशों में 

 आशीर्वाद का अपना महत्व है।

 भारतीय संस्कृति का अविभाज्य अंग है

‌आशीषें और नमस्कार।

 संध्या वंदन में 

 गोत्र , ऋषियों के नाम पिता के नाम और अपने नाम कहकर 

 नमस्कार करके आशीषें

 प्राप्त करना,

 गुरु का नमस्कार करके आशीषें पाना,

 जीवन में अमन चमन शांति संतोष प्रगति के लिए

 आवश्यक है।

 आशीर्वाद 

में सकारात्मक उर्जा।

आशीषें  

  दीर्घायुष भव।

‌सौभाग्यवती भव।

 विधवा ब्राह्मणी को

 आशीर्वाद दिया

पुत्रवती भव।

 कबीर का जन्म हुआ।

 पुत्र वाणी का डिक्टेटर बना।

परशुराम ने कर्ण को शाप दिया।

 भीष्म ने कुंती को

 सौभाग्यवती भव का आशीर्वाद दिया ।

जन कल्याण के लिए 

 समाज कल्याण के लिए 

 सकारात्मक मंगल शब्द 

 आशीर्वाद।

 भगवान भला करे।

आयुष्मान भव 

 विजयी बनो

  सदा खुशी रहो।

 फूलों फलों

 ये आशीष वचन 

 ही सनातन धर्म का 

‌संदेश है।

 माता पिता दादा दादी 

 और बुजुर्गों से

‌आशीषें  पाने का रिवाज़ 

 धीरे धीरे लुप्त हो रहा है।

 परिणाम आज कल के

 युवक युवतियों के जीवन में 

 शांति संतोष चैन नहीं है।

 तलाक चाय पीने के समान 

 माता पिता के क्रोध 

 दुख के भागी बनकर शादी

 बगैर शुभाशीष के

 जीवन में

 न प्रेरणा

न प्रोत्साहन 

 न सुख चैन।

सदा मंगल शब्द 

सुनने   नमस्कार करके

 आशीर्वाद की शुभकामनाएँ

 जीवन में देगी  आनंद।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

Friday, January 16, 2026

नीम ज्ञके पेड़

 नीम का पेड़

एस.अनंतकृष्णन्, चेन्नई 

17-126

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भारत वर्ष अति दिव्य  देश।

 ईश्वर की कृपा भरी।

  दिव्य जड़ी बुटी,

 वृक्ष शरीर को स्वस्थ बनाने से,

 हर क्षेत्र का 

अपना 

 स्थल वृक्ष।

 देवी वृक्ष  नीम।

 मीन राशि उत्तरप्रोष्टपद 

नक्षत्र के भाग्य पेड़।

 सर्वरोग निवारणी।

 नीम की लकड़ी 

दाँत मंचन के लिए।

 नीम के फूल का रस

नीम के फल नीम तेल।

नीम के तना अति मजबूत।

चेचक का एक मात्र दवा

 नीम के पत्तों की हवा।।

तमिल में मारियम्मन देवी।

 संस्कृत में इंद्राक्षी देवी।

तमिलनाडु में नीम के पत्तों के  वस्त्र पहनकर 

 औरतें मनौतियाँ करती  हैं।

 पेट के कीड़े  मिटाने नीम का तेल।

 चेहरा फुँसी के लिए दवा

 नीम पेड़  के सकल 

पेड़ अत्यंत उपयोगी।

 तमिलनाडु में वह स्थल वृक्ष।

 शीतला देवी है वह।

Thursday, January 15, 2026

संपत्ति का दफ्तर

 दौलत का दर्पण

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई।

दौलत का दर्पण 

 दान धर्म करो

 दर्पण में  तेरा

  खुशी भरा 

 मानसिक संतोष भरा 

 अभिगमन का चेहरा     दीख पड़ेगा।

 भ्रष्टाचार और रिश्वत के धन से  खुल्लमखुल्ला खुशी न होगा जान।

 दौलत का दर्पण सब कुछ देता नहीं,

 बड़े बड़े रईस

 शासक पदाधिकारी 

 महाराजा दशरथ तक

 संतान भाग्य के लिए

 तड़प रहे थे।

 दानी कर्ण का नाम 

अमर।

 धन के ढेर,

शरिया मृत्यु शय्या पर

 दौलत का दर्पण 

 हँस रहा है,

 कोई प्रयोजन नहीं है।

बड़े बड़े रईस के सुपुत्र 

 अल्पायुष में

 मर चुके हैं।

  दौलत के दर्पण को देखो,

 अन्याय की सफलता,

 पढ़ें लिखे प्रतिभाशाली वकील  अपराधी को दंड से छुड़ाते हैं।

 खूनी बच जाता है,

करोड़ों का बैंक लोन 

 न चुकाकर विदेश में

 सानंद बस गये।

 दस हजार कर्जा 

 गरीब कानून के शिकंजे में।

 लाखों करोड़ों के मंत्री

 विधायक सांसद भ्रष्टाचार के पैसे से मनमाना कर रहे हैं।

 नशीले पदार्थ के व्यापारी 

 मालामाल।

 कबीर ने कहा

 गो रस गली गली बिकै,

 मदिरा बैठा आराम।

 धन  का लोभ

 मातृभूमि के विरोध 

 द्रोह,

 मातृभाषा को मारकर 

 अंग्रेज़ी का उत्थान।

 मातृभाषा बोलना अपमानित।

दौलत का दर्पण 

 झीलों को नदारद करता है।

 सोचो समझो 

 मेहनती अन्नदाता किसान 

आत्महत्या कर्जदार।

 धनी थोक व्यापारी 

 मालामाल।

 दौलत का दर्पण 

 अश्वमेध यज्ञ,

 लड़ाई दुर्बल राजाओं की हत्या।

 दौलत का दर्पण 

 भाग्यवानों को दिखाता है।

हीरे मुकुट के मंदिर में भीड़।

 वटवृक्ष के नीचे बैठे

 विधायक  अकेले।

 स्वर्ण शांति के आसन में 

 दिव्या श्रम वासी,

प्रवचन देता है

 धन से सुख नहीं 

‌पर उसके पलंग का दाम

 80लाख।

 दौलत के दर्पण यह भी दिखाता है,

 करोड़ों रुपए खर्च करो

 अन्याय क्यों, तुम बनोगे

 सांसद , विधायक मंत्री।

 दौलत का दर्पण स्वर्ण

 स्वर्ग हीरा।

 सदा रहेगा चमकता।

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

Saturday, January 10, 2026

विश्व हिंदी दिवस

 विश्व हिंदी दिवस।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

11-1-26.

++++++++++++++

बहुत भाषी भारत देश में,

 ज्ञान की लहरें बढ़ते देश में,

ज्ञान के सुनामी विश्व को हिलाते देश में,

 हजारों जनप्रिय  आध्यात्मिक देश में 

संस्कृत, अवधि, व्रज, मैथिली   तमिल आदि 

 भक्ति लहरों के देश में 

 खड़ी बोली की सुनामी

 आकर हिंदी के रूप में बदली।।  

अहिंदी प्रांत के राजाराम मोहन राय, दयानंद सरस्वती, मोहनदास करमचंद गांधी ,

दक्षिण के स्वतंत्रता प्रेमी 

 नेताओं के अधिक कठोर 

 प्रयत्न कह के प्रचार में 

 संस्कृत की बेटी बनकर 

 उर्दू की बहन बनकर 

 आज महाविकट रूप धारण कर विश्व की तीसरी भाषा बनी।

 यद्यपि यह अंग्रेज़ी जीविकोपार्जन और ज्ञानोपार्जन की भाषा के रूप में लोक प्रिय है,

 फिर भी हिंदी के विकास 

 आत्मीय रूप में,

 विश्व की बड़ी तीसरी भाषा के रूप में 

 चमक रही है।

 रामचरित मानस की अवधि साहित्य,

 सूरसागर की व्रज भाषा

 कबीर की सधुक्कडी, खिचड़ी भाषा 

 सब बन गये हिंदी साहित्य।

भारतेंदु काल 10वीं शताब्दी  से पक्की नींव डाली गयी।

 जयशंकर प्रसाद, मैथिली शरण गुप्त, रामधारी सिंह दिनकर, हरिवंशराय बच्चन , गद्य में मुंशी प्रेमचंद, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय 

 महादेवी वर्मा,

 सुभद्र कुमारी चौहान 

 आदि सरस्वती पुत्र- पुत्रियों ने   समृद्ध बनाया।

126साल ही खड़ी बोली हिन्दी का इतिहास।

 आज आश्चर्यजनक 

 उत्तुंग चोटी पर पहुँचकर

 विश्व की भाषा तीसरी भाषा के रूप में चमक रही है।

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई 1918 में 

स्थापित  करमचंद गांधी जी की दूरदर्शिता 

हिंदी विरोधी शासकों के बावजूद पनप कर वटवृक्ष बन गई हैं।

 जिसकी छाया में 

  हजारों प्रचारक 

 तन मन से हिंदी की सेवा कर रहे हैं।

 जय भारत!जय हिन्दी! 

जय भारत की भाषाएँ।

जय हिन्दी के निस्वार्थ तमिलनाडु के प्रचारक।

 जिनके साथ नहीं 

 केंद्र सरकार।

 नहीं राज्य सरकार।

 जनता साथ हैं।

 कवि सम्राट कण्णदासन

 अपनी भारतीय भाषाओं के योगदान गीत में लिखा है

 हिंदी मोर नाचो नाचो।

 मातृभूमि एक दिन अपनाएगी।

 कवि वचन मिथ्या नहीं।

 आज प्रमाण है हिंदी का विराट विकास विश्व दर्शन।

 एस. अनंत कृष्णन सौहार्द सम्मान प्राप्त 

 हिंदी सेवक।





Sunday, January 4, 2026

साहसिक विजय

 साहस की जीत

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

5-1-26.

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 साहस  

 मानव को प्रोत्साहित 

 करता रहता है।

 सत्य के आधार पर का साहस,

 सीना तानकर खड़ा करता है।

 मूर्खता पुर्ण दुस्साहस 

 अधोगति पहुँचाता है।

 साहस पूर्ण कार्य के लिए 

 चाहिए बल।

 शारीरिक बल,।

मानसिक बल।

 आर्थिक बल।

मित्र बल

 समर्थक बल।

 प्रशंसक बल।

 प्रेरित प्रैत्साहित

 करनेवालों का बल।

 इन सब से श्रेष्ठ फल

आत्मबल।

आत्मज्ञान बल।

 अहं ब्रह्मास्मी के

 सोच समझ का बल।

 उन सब से बड़ा है

 कर्म फल।

 सर्वश्रेष्ठ बल है

 सर्वेश्वर का असीमित अनुग्रह।

 सिरों रेखा और 

 भाग्य बल।

 साहसी तो प्रयत्न करके 

 विजयी बन सकता है।

 विजयी होकर राम सा दुखी।

 युधिष्ठिर और पांडव सा दुखी।

अभिमन्यु का वध।

कर्ण का त्याग 

 साहस पूर्ण होकर 

 अपूर्ण विजय।

बुद्ध, महावीर, 

 शंकराचार्य,

 रामानुजाचार्य 

 शीरडी बाबा

 स्वामी विवेकानंद 

 आध्यात्मिक विजय।

Saturday, January 3, 2026

धन संस्कारवान

 आप के विचार के लिए।

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पैसे 

 मैं घंटों बैठकर लिखा करता हूँ,

निजी, अनूदित 

तमिल हिंदी सिखाना

पर आर्थिक लाभ नहीं।

अब है मेरी उम्र 76.

  दुनिया देखी।

  जवानी का जोश 

 आत्मसंतोष के लिए 

 आत्मानंद के लिए 

 अर्थ न कमाया।

 अब   बुढ़ापा है।

 मंदिर जाने पर 

 पैसे हैं तो तुरंत दर्शन।। अस्पताल गया तो

 पैसे के बिना चपरासी भी नहीं बोलता।

सेवा मुफ्त,

 मानव दिल्लगी का पात्र बनता।


 बेचारा भला आदमी।

 मेरे तमिल हिंदी संपर्क 

 75000 दर्शक।

 यहाँ प्रकाशक की किताबों का सम्मान।

सौ किताब, एक सभा में प्रकाशन , सम्मिलित।

 मेरे चार ब्लाग 

 2,00,000/  से ज़्यादा दर्शक।

 न कोई सम्मान।

 न साहित्य अकादमी का ध्यान।

 आत्म संतोष से कोई

 लाभ   ,

बुढ़ापे में अर्थ न तो

 जीवन व्यर्थ।

 अब पछताने से हो क्या,

जब चिड़िया चुग गई खेत।

आँखें अंधे होने के बाद 

 सूर्य नमस्कार से क्या लाभ।

   


 


 


 


 

 

 

 

 

 

 



 


 

 

 

 

 


 

 

 


 


 

 



 


 


 



 

 



 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 



 

हर स्थान में पैसे।

[04/01, 9:48 am] sanantha.50@gmail.com: संस्कारवान।

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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संस्कार  का मतलब है

 सही आकार देना।

 मानसिक  शुद्धिकरण।

 चरित्र निर्माण, 

 मानवता का विकास।

भारतीय धर्म बचपन से

 स्वास्थ्य, ज्ञान, अहिंसा,    त्याग , प्रेम, दान-धर्म,

 चरित्र निर्माण , अच्छी चाल-चलन, धर्म मार्ग

 सकारात्मक सोच,

 इन गुणों से युक्त मनुष्य 

 संस्कारवान।

  ऐसे संस्कारवान व्यक्ति 

 अति दुर्लभ।

 राम के चरित्र में कलंक,

 कृष्ण के चरित्र में कलंक।

 दधिचि   ही महान तपस्वी।

 हरिश्चंद्र का आदर्श,

 भक्त रैदास, भक्त त्याग राज जैसे संस्कारवान 

नहीं जगत में।

Friday, January 2, 2026

जीवन आनंद

 जीवन का आनंद 

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

3-1-26

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जीवन का आनंद,

 विविध मानव 

प्रकृति के अनुसार।

ऋषि मुनियों का आनंद 

 मन मिटाकर आत्मा परमात्मा एक करके 

 आत्मज्ञान पाना, ब्रह्म ज्ञान पाना।

  शासकों के आनंद धन कमाना।

 अधिकारियों का आनंद वेतन नहीं, रिश्वत पाने में।

 धन के आनंद समझने वाले,,

 नये नये घर लेने में 

 आनंद  लेनेवाले,

  संतानोत्पत्ति में आनंद लेनेवाले,

 वैवाहिक जीवन में 

 पत्नी के होते रखैल में 

 जीवन आनंद लेने वाले,

   तीन चार शादी करके

 जीवन का आनंद 

 समझने वाले,

  ईमानदारी जीवन में 

 आनंद समझनेवाले,

 कर्तव्य पालन में 

 जीवन का आनंद     समझनेवाले,

 जी चुराने बहाना बनाने में जीवन का आनंद समझनेवाले,

 राम जैसे एक पत्नी व्रत‌ में

 जीवन का आनंद 

 समझनेवाले।

कृष्ण सा द्विपत्नीवाले,

पतिव्रता धर्म को आनंद समझनेवाली,

वेश्यावृत्ति वेश्यागमन में 

 जीवन का आनंद समझनेवाले।

 जीवन तो मानव जीवन 

 पर चाह और आनंद भिन्न भिन्न।

चोरी डकैती में आनंद ,

 चोर को पकड़ने में आनंद।

जीव रक्षक का आनंद अलग।

जीव भक्षक का आनंद अलग-अलग।

 मधुशाला में आनंद।

स्वार्थता अहंकार में आनंद।

 निस्वार्थता त्याग में आनंद।

 यात्रा में आनंद,

गपशप में आनंद 

  संगीतकार को, 

लेखक कवि 

कलाकार 

 बागवान 

 किसान 

अनेक पेशेवर,

 अनेक प्रकार का आनंद।

 अपना अपना डफ़ली 

 अपना अपना राग।

सब के जीवन का आनंद 

 सुख मय जीवन बिताने में।

 ईश्वर दर्शन ब्रह्मानंद में।

नौकरी में व्यापार में 

 चालक बनने में,

चालाक बनने में 

 ठगने ठगाने में 

 आनंद अनेक जीवन में।

 आम आनंद सत्य में 

 परोपकार में, धर्म रक्षक में देश प्रेम में।

Sunday, December 28, 2025

असली नकली

 असली नकली

 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 

2912-25

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असली पौरुष

 नकली पौरुष 

 गोली खाकर पौरुष 

 असली सोना

 नकली सोना

असली चांदनी 

 नकली चांदनी

 असली मोती

नकली मोती

नकली हस्ताक्षर 

 असली हस्ताक्षर।

 असली प्रति

 नकली प्रति

 प्राकृतिक खुशबू

 कृत्रिम खुशबू

  प्राकृतिक हवा

 वातानुकूलित वायु

 पंखे की  हवा

 प्राकृतिक शोभा,

 बनावटी श्रृंगार।

फूल असली,

 प्लास्टिक नकली।

गुलाबी गाल,

 नकली गुलाबी गाल।

सोचिए ,परखिए

 असली नकली।

लंबा असली ऊँचा आदमी 

 नकली लंबा आदमी।

 कथानायक रजनी कांत


 असली रूप  का रजनीकांत।

 सोचिए परखिए 

 असली नकली।

पहाड़ी ठंड,

 वातानुकूलित ठंड

 नकली असली में 

 असली स्थाई अनश्वर।

 नकली अस्थाई नश्वर।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

Saturday, December 27, 2025

सहयोग

 नमस्ते। वणक्कम्। 🙏

कविता: सहयोग — अर्थ और लाभ

सहयोग वह सेतु है, जो दिलों को जोड़ता है।

एक-दूसरे का हाथ थाम, जीवन को मोड़ता है।

जहाँ मैं नहीं, वहाँ हम का भाव जन्म लेता है,

कठिन से कठिन पथ भी सरल बन जाता है।

सहयोग से दुख आधा, सुख दुगुना हो जाता है,

थके कदमों में फिर से साहस भर जाता है।

ज्ञान, श्रम और समय जब साथ बँटते हैं,

असंभव से सपने भी सच बनते हैं।

यह विश्वास की नींव पर खड़ा एक दीप है,

अंधकार में जो सबको दिशा देता है।

समाज, परिवार, राष्ट्र सब मजबूत होते हैं,

जब सहयोग के संस्कार जीवित रहते हैं।

सहयोग ही मानवता का सच्चा लाभ है।

यदि चाहें, मैं इसे सरल भाषा, बाल कविता, या तमिल–हिंदी मिश्रित रूप में भी लिख सकता हूँ।

Friday, December 26, 2025

भारतीय क़ृषि खेती

 किसान का जीवन 

एस. अनंत कृष्णन।

चेन्नई।

27-12-25.


भारत जीव नदियों का 

 सर्वसंपन्न देश है।

 अतः कृषि प्रधान देश है।

 यहाँ सभी प्रकार के अन्न

 तरकारियाँ, फल फूल 

 पैदा कर सकते हैं।

 पर आज़ादी के बाद 

 पाश्चात्य उद्योग धंधों को

 प्रधानता देकर 

 देश के खेतों में को

 झीलों को 

 नदारद करके‌

 अन्नदाता किसान की हालत  आत्महत्या तक।

 प्रदूषित पानी 

 पीने का पानी 

पैसे देकर 

 विदेशी कारखाने 

 के विकास,

 परिणाम चैन नगर के 

 चार बेकार कहानी के

जैसे मेहनती किसान 

 भूखा प्यासा।

 किसान को

 अपने धंधा छोड़कर 

 खेत बेचकर शहर में 

 छोटे मोटे काम में 

 लग जाते हैं।

 किसान के जीवन 

 अत्यंत दुख प्रद है।

 स्नातक स्नातकोत्तर डाक्टरेट की माया

 सब  के सब नौकरी में।

 मेहनत करने कोई तैयार नहीं।

गरीब किसान के बच्चे 

 अन्य कार्यों में लग जाते हैं।

 खेत के काम करने मज़दूर नहीं मिलते।

 मधुशाला खोलकर 

 किसान के जीवन को 

ग़रीबी के गड्ढे में डालने 

 सरकार तैयार।

 किसानों की गरीबी,

कर्ज का बोझ

 नौकरी छोड़ अन्य काम।

 हमारे नेता सब अंग्रेज़ों के पिछलग्गू,

 देश की आध्यात्मिकता शांति को नष्ट करके

 भारतीय प्रधान धंधा खेती  को लापरवाही 

 करके 

 विजयमल्लय्या,

 नीरव मोडी को कर्जा देकर

 प्रवासी भारतीय बना दिया।

उनका ऋण  मिटा दिया 

बिना वसूल किए।

 विदेशी खून मिश्रित नेता।

स्वार्थ पूर्ण धन लोभ।


 किसान को ऋण देने में 

 लापरवाही।

 उनकी माँग पूरी करने

 तैयार नहीं।

आधुनिक आविष्कार के मोह माया,

 किसान के जीवन पर

 ध्यान देने कोई नहीं।

इन शासकों के कारण 

 किसान असह्य कष्ट सह रहे हैं।

 भावी पीढ़ी एक एक दाने के लिए तड़पेगा।

 ऊंची इमारतें, ऊँची मूर्तियों से देश

 बाह्य सुंदरता से गौरवान्वित।। 

पर  असली विकास 

 नदियों का राष्ट्रीयकरण 

 किसान को प्रधानता न देना।

 भावी धनी नागरिक 

 अंग्रेज़ी देश का रूखा सूखा भोजन में।

 किसान है के बच्चे उद्योग धंधों में 

 सोचिए देश के विकास 

 बाह्य सुख,महँगाई।

 मानसिक शांति ,

  स्वच्छ वायु ,पानी 

 खोकर साँस लेने में मुश्किल।

 किसान के जीवन का कष्ट 

संपूर्ण देश धनी,

 धन रहेगा, मरेंगे लोग 

 भूखा प्यासा।

  किसान का जीवन 

 अति अशांति।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई